
Gautam Gambhir : गुवाहाटी टेस्ट में मिली 408 रन की शर्मनाक हार ने भारतीय क्रिकेट को झकझोर दिया है। यह हार सिर्फ सीरीज का अंत नहीं थी, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में रनों के अंतर से भारत की अब तक की सबसे बड़ी हार भी बन गई। दक्षिण अफ्रीका ने 2-0 से सीरीज जीतकर भारत को घर में दूसरी बार लगातार क्लीन स्वीप का स्वाद चखा दिया। इस कड़वे नतीजे के बाद भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर सामने आए और खुलकर बात की। उन्होंने हार की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि अब उनके भविष्य का फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के हाथों में है।
गंभीर (Gautam Gambhir) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि वह न तो जिम्मेदारी से भागेंगे और न ही किसी खिलाड़ी पर उंगली उठाएंगे। उन्होंने कहा, ‘मेरे भविष्य का फैसला BCCI करेगी। लेकिन मैं वही कोच हूं जिसने आपको इंग्लैंड में नतीजे दिलाए और चैंपियंस ट्रॉफी जिताई।’
गंभीर (Gautam Gambhir) का इशारा इस साल की शुरुआत में हुए इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के 2-2 ड्रॉ और चैंपियंस ट्रॉफी खिताब की ओर था, जिसे वह अपने कार्यकाल की उपलब्धियों के रूप में सामने रख रहे थे।
हार का कारण पूछे जाने पर गंभीर (Gautam Gambhir) ने इसे पूरी टीम की सामूहिक नाकामी बताया। उन्होंने कहा कि 95/1 से 122/7 तक गिरना स्वीकार करने लायक नहीं है। किसी एक खिलाड़ी या किसी एक शॉट को दोष देकर बात खत्म नहीं होती। ‘दोष सबका है, और शुरुआत मुझसे होती है’, गंभीर ने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह (Gautam Gambhir) कभी भी किसी खिलाड़ी को सार्वजनिक रूप से दोष नहीं देते और आगे भी ऐसा नहीं करेंगे।
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18 टेस्ट में 10 हार
गंभीर (Gautam Gambhir) के कोचिंग कार्यकाल पर सवाल इसलिए बढ़ गए हैं क्योंकि भारत ने पिछले 18 टेस्ट मैचों में से 10 गंवाए हैं। न्यूजीलैंड ने पिछले साल भारत को घर में 3-0 से हराया था और अब दक्षिण अफ्रीका ने 2-0 से क्लीन स्वीप कर दिया है। भारतीय क्रिकेट में ऐसा दौर बेहद कम देखने को मिलता है, जब टीम लगातार घरेलू टेस्ट सीरीज हार जाए।
गंभीर (Gautam Gambhir) की टीम चयन नीति भी चर्चा में है। कई पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों ने उन पर आरोप लगाया है कि वह स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों के बजाय ऑलराउंडर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे टीम का संतुलन बिगड़ रहा है। हालांकि गंभीर ने अपने फैसलों का बचाव करते हुए कहा कि टेस्ट क्रिकेट में चमक-दमक वाले खिलाड़ी नहीं, बल्कि जज़्बे और मानसिक मजबूती वाले खिलाड़ी सफल होते हैं।
‘टेस्ट खेलने के लिए सबसे ज्यादा टैलेंट नहीं चाहिए, बल्कि मजबूत चरित्र चाहिए। थोड़ी क्षमता और बहुत हिम्मत रखने वाले खिलाड़ी ही अच्छे टेस्ट क्रिकेटर बनते हैं’, उन्होंने कहा।
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