
Why Christmas celebrated on 25 December : हिंदुओं की दिवाली और मुस्लिमों की ईद की तरह ही ईसाई समुदाय का सबसे पवित्र त्योहार है क्रिसमस। हर साल दिसंबर में सर्दी के साथ क्रिसमस को लेकर लोगों उत्साह भी चरम पर होता है। बच्चे खासतौर पर गिफ्ट के लिए लाल रंग के कपड़ों में सफेद दाढ़ी-मूंछ वाले सेंटा क्लॉज के आने का इंतजार करते हैं। क्रिसमस ईसाई धर्म के संस्थापक जीसस क्राइस्ट के जन्म की खुशी में मनाया जाता है।
जीसस क्राइस्ट यानी ईसा मसीह को ईश्वर की संतान माना जाता है। क्रिसमस का नाम भी उन्हीं के नाम पर पड़ा। जीसस की जन्मतिथि को लेकर काफी मतभेद रहे। यहां तक कि बाइबल में भी उनके जन्म की तारीख का कोई जिक्र नहीं (Why Christmas celebrated on 25 December)।
ईसाई धर्म में प्रचलित कथा के मुताबिक, भगवान ने अपने दूत जिब्राईल, जिसे गैब्रियल भी कहते हैं, को मरियम नाम की एक महिला के पास भेजा था। जिब्राईल ने मरियम को बताया कि जो बच्चा उनकी गर्भ से जन्म लेगा, उसका नाम जीसस क्राइस्ट होगा और वह ऐसा राजा बनेगा, जिसका साम्राज्य असीमित होगा।
हालांकि, पहले 25 दिसंबर (Why Christmas celebrated on 25 December) को क्रिसमस मनाने का रिवाज नहीं था। सूर्य के उत्तरायण में जाने के मौके पर एक दूसरा बड़ा त्योहार मनाया जाता। उस दिन सूर्य की उपासना की जाती।
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25 दिसंबर से दिन बढ़ने लगता है, इसलिए ईसाइयों के बीच मान्यता थी कि इस दिन सूर्य का पुनर्जन्म होता है। उन्हें जीसस क्राइस्ट के जन्म की वास्तविक तिथि के बारे में पता नहीं था, तो उन्होंने इसी खास मौके को यीशु के जन्मदिन यानी क्रिसमस के रूप में मनाना शुरू कर दिया। इससे पहले ईस्टर ईसाइयों का प्रमुख त्योहार था।
इतिहास की नजर से देखें तो पोप सेक्स्तुस जूलियस अफ्रिकानुस वह पहले शख्स थे, जिन्होंने बड़े दिन की तारीख तय की। उन्होंने साल 221 में ईसाई क्रोनोग्राफी में 25 दिसंबर का उल्लेख किया है। रोम के पहले ईसाई सम्राट कॉन्सटेंटाइन ने भी इसी तिथि को मान्यता दी है (Why Christmas celebrated on 25 December)।
क्रिसमस से जुड़ा पहला खास त्योहार 336 ईस्वी के दौरान रोम में मनाया गया। उसके बाद से इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई। अब यह शायद दुनिया का इकलौता त्योहार है, जब लगभग सभी देशों में छुट्टी रहती है (Why Christmas celebrated on 25 December)। इसे दुनिया के हर देश में हर जाति और वर्ग के लोग मनाने लगे हैं। कई मुल्कों में 24 दिसंबर की शाम से ही क्रिसमस से जुड़े कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। वहीं, ब्रिटेन और राष्ट्रमंडल देशों में क्रिसमस के अगले दिन यानी 26 दिसंबर को बॉक्सिंग डे के रूप में मनाया जाता है।
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कहां से आते हैं सेंटा क्लॉज
क्रिसमस को खास बनाती हैं उसकी परंपराएं। इस दिन एक-दूसरे को गिफ्ट दिया जाता है। इसकी शुरुआत करने वाले थे सेंट निकोलस। इन्हें फादर क्रिसमस भी कहते हैं, लेकिन सबसे प्रचलित नाम वह है, जिसका बच्चे बेसब्री से इंतजार करते हैं, सेंटा क्लॉज। (Why Christmas celebrated on 25 December)
इनका जन्म ईसा मसीह के लगभग 280 साल बाद तुर्किस्तान के मायरा नाम के शहर में हुआ। सेंट निकोलस की जीसस में अटूट आस्था थी। माता-पिता की कम उम्र में मौत के बाद वह मॉनेस्ट्री में पढ़ने चले गए और 17 साल की उम्र में पादरी की उपाधि मिल गई।
सेंट निकोलस ने अपना पूरा जीवन यीशू और उनकी सीख के प्रति समर्पित कर दिया था। वह हमेशा गरीब और जरूरतमंदों की मदद करते। बताते हैं कि उन्हें बच्चों से बेहद प्यार था। यीशू के जन्मदिन के मौके पर वह आधी रात को निकलते और बच्चों पास खाने-पीने के सामान और खिलौने रख जाते। उनकी कहानियां इतनी मशहूर हुईं कि बच्चे आज भी गिफ्ट के लिए सेंटा का इंतजार करते हैं।
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दूसरी अहम परंपरा क्रिसमस ट्री की है। यीशू के जन्म (Why Christmas celebrated on 25 December) के मौके पर एक फर के पेड़ को सजाया गया था, जिसे बाद में क्रिसमस ट्री कहा जाने लगा। इसकी भी एक कहानी है। बताया जाता है कि क्रिसमस पर ट्री सजाने की परंपरा जर्मनी से शुरू हुई।
आठवीं शताब्दी में बोनिफेस नाम के एक ईसाई धर्म प्रचारक ने इसकी शुरुआत की थी। आज तो बिना ट्री के क्रिसमम की कल्पना भी नहीं की जा सकती। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और वास्तु दोष दूर होता है।
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