
China Taiwan tensions : पूर्वी एशिया में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। चीन ने सोमवार को ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर लाइव-फायर मिलिट्री ड्रिल शुरू की। इन सैन्य अभ्यासों को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने Justice Mission 2025 नाम दिया है। युद्धपोतों, फाइटर जेट्स, बॉम्बर्स और ड्रोन की तैनाती के साथ चीन ने साफ संकेत दिया है कि वह ताइवान की स्वतंत्रता समर्थक ताकतों और विदेशी दखल के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सोमवार दोपहर 3 बजे तक 89 चीनी सैन्य विमान और ड्रोन ताइवान के आसपास देखे गए, जिनमें से 67 विमान ताइवान के रिस्पॉन्स जोन में घुस आए। इसके बाद ताइवान ने अपनी सेनाओं को हाई अलर्ट पर रख दिया और त्वरित प्रतिक्रिया अभ्यास शुरू कर दिया (China Taiwan tensions)।
चीन की Eastern Theatre Command ने बताया कि यह अभ्यास ताइवान के उत्तर और दक्षिण-पश्चिमी समुद्री इलाकों में किया जा रहा है। इसमें समुद्री लक्ष्यों पर लाइव फायरिंग, नकली हमले, और ताइवान के अहम बंदरगाहों को ब्लॉक करने जैसे अभ्यास शामिल हैं। चीनी मीडिया के अनुसार, कीलुंग (उत्तर) और काओह्सिओंग (दक्षिण) जैसे बड़े पोर्ट्स को सील करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है (China Taiwan tensions)।
PLA के प्रवक्ता शी यी ने बयान जारी कर कहा कि यह अभ्यास ताइवान की आजादी की मांग करने वाली ताकतों और बाहरी हस्तक्षेप के लिए गंभीर चेतावनी है। PLA ने ऐसे पोस्टर भी जारी किए हैं, जिनमें पूरे ताइवान को टारगेट में दिखाया गया है (China Taiwan tensions)।
दूसरी ओर, ताइवान की सरकार ने इन सैन्य अभ्यासों की कड़ी निंदा की है। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें अमेरिका से मिले HIMARS रॉकेट सिस्टम दिखाए गए हैं। ये रॉकेट चीन के फुजियान प्रांत तक हमला करने में सक्षम माने जाते हैं। ताइवान के तट रक्षक बलों को भी समुद्री इलाकों में तैनात कर दिया गया है ताकि शिपिंग और मछली पकड़ने की गतिविधियों पर असर कम हो (China Taiwan tensions)।
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यह ड्रिल ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका ने हाल ही में ताइवान को 11.1 अरब डॉलर के हथियार बेचने का ऐलान किया था। चीन पहले ही इस पर नाराज़गी जता चुका है और सख्त कदम उठाने की चेतावनी दे चुका था। विश्लेषकों का मानना है कि चीन की ये लगातार सैन्य गतिविधियां अब रूटीन ट्रेनिंग और असली हमले की तैयारी के बीच की रेखा को धुंधला कर रही हैं, जिससे ताइवान और उसके सहयोगियों को चेतावनी का समय कम मिल सकता है।
इस बीच, जापान भी इस तनाव में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो गया है। जापान के प्रधानमंत्री के हालिया बयान के बाद चीन ने टोक्यो को कड़ी चेतावनी दी और जापान में अपने नागरिकों को सतर्क रहने को कहा है (China Taiwan tensions)।
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और बल प्रयोग से भी पीछे न हटने की बात कहता रहा है, जबकि ताइवान साफ कहता है कि उसके भविष्य का फैसला केवल वहां के लोग करेंगे।



