
Yogi Adityanath Netaji slogan controversy : पश्चिम बंगाल में चुनावी पारा गरम है। इस बीच यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का एक बयान बड़ा विवाद खड़ा कर गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एक चुनावी सभा में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रसिद्ध नारे ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ को स्वामी विवेकानंद से जोड़ दिया। इसके बाद विपक्षी दलों ने BJP पर इतिहास की अनदेखी और अज्ञानता का आरोप लगाया।
क्या कहा योगी आदित्यनाथ ने?
रिपोर्ट्स के अनुसार, योगी आदित्यनाथ पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के जॉयपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था, तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। (Yogi Adityanath Netaji slogan controversy)
यही बयान विवाद का कारण बना, क्योंकि यह ऐतिहासिक नारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ा हुआ है।
यह नारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दिया था। उन्होंने यह नारा जुलाई 1944 में बर्मा (अब म्यांमार) में भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा था। यह नारा भारत की आजादी की लड़ाई के सबसे प्रेरक नारों में गिना जाता है।
तृणमूल कांग्रेस का हमला
टीएमसी (TMC) की सांसद सागरिका घोष ने सबसे पहले इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि BJP की बंगाल के इतिहास को लेकर अज्ञानता फिर सामने आ गई है।
उन्होंने कहा कि यह नारा स्वामी विवेकानंद नहीं, बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दिया था। तृणमूल कांग्रेस ने भी बयान जारी कर कहा कि एक ही वाक्य में बंगाल के दो महान सपूतों का अपमान किया गया है (Yogi Adityanath Netaji slogan controversy)।
अखिलेश यादव ने भी साधा निशाना
सपा के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी से उत्तर प्रदेश की छवि को ठेस पहुंची है (Yogi Adityanath Netaji slogan controversy)।
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों का स्वतंत्रता आंदोलन में कोई योगदान नहीं रहा, उन्हें आजादी के सेनानियों का इतिहास कैसे पता होगा।
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बंगाल चुनाव में इतिहास और पहचान की राजनीति
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बंगाल के महान नेताओं, साहित्यकारों और संतों का नाम अक्सर चुनावी भाषणों में लिया जाता है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रविंद्रनाथ टैगोर और रामकृष्ण परमहंस जैसे नाम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े हैं। ऐसे में किसी ऐतिहासिक तथ्य की गलती चुनावी माहौल में बड़ा मुद्दा बन जाती है।
इस विवाद (Yogi Adityanath Netaji slogan controversy) से BJP को राजनीतिक नुकसान इसलिए भी हो सकता है क्योंकि बंगाल में पार्टी लंबे समय से अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष कह सकता है कि बाहरी नेताओं को बंगाल का इतिहास नहीं पता। पश्चिम बंगाल में वैसे भी बंगाली अस्मिता का सवाल बहुत गहरा है।



