
Singham vs Pushpa in Bengal election : पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और चुनाव आयोग के पुलिस ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। आरोप है कि ऑब्जर्वर ने पार्टी कार्यकर्ताओं और उम्मीदवार को धमकाने की कोशिश की, जिसके बाद सड़क पर विरोध शुरू हो गया।
कैसे भड़का विवाद?
मामला फाल्टा का है, जहां TMC उम्मीदवार जहांगीर खान के घर और दफ्तर के बाहर समर्थकों ने नारेबाजी की। पार्टी नेताओं का कहना है कि एक पुलिस ऑब्जर्वर का काम निगरानी करना है, न कि सीधे घर पहुंचकर चेतावनी देना (Singham vs Pushpa in Bengal election)।
दरअसल, चुनाव आयोग को शिकायत मिली थी कि उम्मीदवार के कुछ समर्थक मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी शिकायत के बाद अजय पाल शर्मा इलाके में पहुंचे और सख्त लहजे में कार्रवाई की बात कही।
इस दौरे का एक वीडियो तेजी से वायरल हो गया, जिसमें अजय पाल शर्मा यह कहते सुनाई देते हैं कि अगर धमकी देने का सिलसिला जारी रहा तो ठीक से निपटा जाएगा। बस, यही बात TMC को नागवार गुजरी और मामला सियासी विवाद में बदल गया।
अजय पाल शर्मा को उनकी सख्त छवि के कारण सिंघम कहा जाता है, वहीं जहांगीर खान ने भी फिल्मी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘यह बंगाल है, अगर वो सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं।’ साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब बीजेपी के इशारे पर किया जा रहा है (Singham vs Pushpa in Bengal election)।
TMC ने निष्पक्षता पर सवाल उठाए
राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और अरूप बिस्वास समेत कई नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या एक ऑब्जर्वर को इस तरह सीधे हस्तक्षेप करने का अधिकार है? उनका कहना है कि अगर कोई गड़बड़ी है तो पुलिस की तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, न कि इस तरह सार्वजनिक चेतावनी देकर (Singham vs Pushpa in Bengal election)।
अजय पाल शर्मा उन 95 पर्यवेक्षकों में शामिल हैं, जिन्हें निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल में तैनात किया गया है। फाल्टा, डायमंड हार्बर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जिसका प्रतिनिधित्व TMC सांसद अभिषेक बनर्जी करते हैं।



