
Easter Island Mystery Solved : प्रशांत महासागर के बीचोंबीच बसा ईस्टर आइलैंड करीब 900 साल से एक रहस्य अपने भीतर समेटे हुए है। यहां जगह-जगह खड़ी विशाल पत्थर की मूर्तियां यानी मोआई (Moai) आखिर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाई कैसे गईं? कुछ मोआई करीब 33 फीट ऊंचे हैं और उनका वजन 86 टन तक बताया जाता है। ऐसे में इन विशाल प्रतिमाओं को उबड़-खाबड़ जमीन पर ले जाना आज भी किसी चमत्कार से कम नहीं लगता।
अब शोधकर्ताओं कार्ल लिपो और टेरी हंट ने इस रहस्य को समझने का एक दिलचस्प तरीका सामने रखा है। Journal of Archaeological Science में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, प्राचीन रापा नुई लोग इन भारी मूर्तियों को खींचकर नहीं, बल्कि रस्सियों की मदद से ‘चलाते’ हुए एक जगह से दूसरी जगह ले जाते थे (Easter Island Mystery Solved)।
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रस्सियों से ‘चलते’ थे पत्थर
शोधकर्ताओं के मुताबिक, मोआई को खड़ा करके उसके चारों ओर मजबूत रस्सियां बांधी जाती थीं। फिर दोनों तरफ से लोग रस्सियों को खींचते हुए मूर्ति को धीरे-धीरे दाएं-बाएं झुलाते थे। इस प्रक्रिया में मूर्ति आगे की ओर बढ़ती जाती थी।
लिपो के अनुसार, एक बार मूर्ति हिलने लगे तो उसे आगे बढ़ाना उतना मुश्किल नहीं था। असली चुनौती उसे पहली बार झुलाने की होती थी। शोधकर्ताओं ने छोटे आकार की प्रतिकृतियों के साथ इस तकनीक का परीक्षण भी किया। उनका दावा है कि 18 लोगों की टीम महज 40 मिनट में एक विशाल प्रतिकृति को करीब 100 मीटर तक ले जाने में सफल रही (Easter Island Mystery Solved)।
इससे यह संभावना मजबूत होती है कि रापा नुई लोगों ने हजारों किलो के इन पत्थरों को खींचने के बजाय उन्हें सचमुच ‘चलाया’ होगा।
इन मूर्तियों को किसने बनवाया?
मोआई को लेकर एक और दिलचस्प सवाल है कि आखिर इन्हें किसने बनाया था? लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि द्वीप पर किसी शक्तिशाली प्रमुख या एक प्रभावशाली समूह के नेतृत्व में इन विशाल प्रतिमाओं का निर्माण हुआ होगा (Easter Island Mystery Solved)।
लेकिन लिपो और हंट के मुताबिक, अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग समूहों और परिवारों के अपने निर्माण स्थल थे। वहां एक के बाद एक कई मूर्तियां बनाई जाती थीं।
मोआई के चेहरों में दिखाई देने वाली छोटी-छोटी भिन्नताएं भी इस विचार को समर्थन देती हैं। कुछ प्रतिमाओं की नाक बड़ी है तो कुछ के चेहरे में अपेक्षाकृत स्त्रैण विशेषताएं दिखाई देती हैं। इससे संकेत मिलता है कि इन्हें अलग-अलग समुदायों ने अपनी परंपराओं और पहचान के अनुसार बनाया होगा (Easter Island Mystery Solved)।
ये सिर्फ सिर नहीं, पूरी मूर्तियां हैं
ईस्टर आइलैंड की तस्वीरों में अक्सर मोआई को केवल विशाल सिर के रूप में दिखाया जाता है। लेकिन असल में ये पूरे शरीर वाली मानव आकृतियां हैं। समय के साथ इनके शरीर का बड़ा हिस्सा मिट्टी में दब गया और ऊपर केवल सिर तथा कंधे दिखाई देने लगे (Easter Island Mystery Solved)।
इन मूर्तियों का वास्तविक उद्देश्य आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक प्रमुख मान्यता यह है कि रापा नुई लोगों ने इन्हें अपने पूर्वजों की स्मृति और उनके आध्यात्मिक प्रभाव यानी ‘माना’ को दर्शाने के लिए बनाया था।
ईस्टर आइलैंड का नाम कैसे पड़ा?
ईस्टर आइलैंड पर रापा नुई लोग सदियों पहले पोलिनेशिया से आकर बसे थे। यूरोपीय लोगों के लिए इस द्वीप का परिचय 1722 में हुआ, जब डच नाविक जैकब रोगेवीन यहां पहुंचे। संयोग से वह दिन ईस्टर संडे था। इसी वजह से यूरोपीय लोगों ने द्वीप का नाम ईस्टर आइलैंड रख दिया (Easter Island Mystery Solved)।
आज भी रापा नुई समुदाय के लोग यहां रहते हैं और अपनी भाषा तथा संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं। उनके पूर्वजों द्वारा बनाए गए मोआई आज दुनिया की सबसे रहस्यमयी प्राचीन संरचनाओं में शामिल हैं।



