
Why are bank employees striking : देशभर में बैंक कर्मचारी और अधिकारी 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिन की हड़ताल पर रहेंगे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने यह हड़ताल बुलाई है। UFBU सात बैंक यूनियनों का साझा मंच है। संगठन का दावा है कि वह बैंकिंग क्षेत्र के 90 फीसदी से अधिक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है।
हड़ताल का सबसे बड़ा मुद्दा सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग और दो दिन छुट्टी की मांग है। इसके अलावा प्रदर्शन से जुड़े प्रोत्साहन यानी PLI को लेकर भी यूनियनों की आपत्ति है।
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पांच दिन बैंक खोलने की मांग क्यों?
फिलहाल बैंक सोमवार से शुक्रवार तक पूरे दिन और महीने के पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को काम करते हैं। दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है।
मई 2015 में हुए समझौते के बाद दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी लागू हुई थी। इसके बदले बाकी शनिवार को पूरे दिन काम करने की व्यवस्था की गई। उस समय सभी शनिवार को छुट्टी देने की दिशा में आगे बातचीत की बात भी कही गई थी (Why are bank employees striking)।
मार्च 2024 के वेतन संशोधन समझौते में भारतीय बैंक संघ और बैंक यूनियनों के बीच बाकी शनिवार को भी छुट्टी देने पर सहमति बनी। इसके बदले कर्मचारियों ने सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना काम के समय में 40 मिनट की बढ़ोतरी स्वीकार की। यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा गया, लेकिन अब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
UFBU का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों, RBI, LIC, GIC, NABARD और कई निजी कंपनियों में पहले से पांच दिन काम की व्यवस्था है। शेयर, मुद्रा और विदेशी मुद्रा बाजार भी पांच दिन चलते हैं (Why are bank employees striking)।
UFBU के अनुसार 2012-13 में बैंक कर्मचारियों की संख्या करीब 8.86 लाख थी, जो मार्च 2025 तक घटकर 7.58 लाख रह गई। दूसरी ओर बैंकिंग कारोबार 283 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
यूनियन का कहना है कि बैंकिंग सेवाओं का काम और दबाव बढ़ा है, जबकि कर्मचारियों की संख्या कम हुई है। ऐसे में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करना जरूरी है (Why are bank employees striking)।
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PLI को लेकर क्या विवाद है?
हड़ताल का दूसरा मुद्दा परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) है। यह व्यवस्था 2020 के वेतन समझौते के तहत शुरू की गई थी और इसे बैंकों के प्रदर्शन से जोड़ा गया।
बाद में वरिष्ठ बैंक अधिकारियों के लिए PLI की संशोधित व्यवस्था लाई गई। इसमें चौथे स्तर और उससे ऊपर के अधिकारियों को शामिल किया गया, जबकि निचले स्तर के अधिकारियों को बाहर रखा गया। बैंक अधिकारी यूनियनें इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं और प्रोत्साहन के वितरण पर सवाल उठा रही हैं (Why are bank employees striking)।
सरकार और बैंक यूनियनों के बीच क्या हुआ?
22 सितंबर को नई दिल्ली में श्रम मंत्रालय के उप मुख्य श्रम आयुक्त के कार्यालय में सुलह बैठक हुई। इसमें UFBU, भारतीय बैंक संघ, वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग और बैंक प्रबंधन के प्रतिनिधि शामिल हुए।
UFBU ने कहा कि पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था पर मार्च 2024 में सहमति बन चुकी है, लेकिन इसे लागू करने को लेकर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ (Why are bank employees striking)।
भारतीय बैंक संघ ने कहा कि प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है और यूनियन से हड़ताल वापस लेने की अपील की। वित्तीय सेवा विभाग ने भी कहा कि फैसला लेने से पहले संबंधित पक्षों की राय पर विचार करना जरूरी है। UFBU ने कर्मचारियों पर हड़ताल से दूर रहने के लिए दबाव डालने का भी विरोध किया है (Why are bank employees striking)।
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हड़ताल में बैंकिंग सेवाओं पर क्या असर पड़ेगा?
तीन दिन की हड़ताल से बैंक शाखाओं में नकदी जमा करने-निकालने, चेक क्लियरेंस, खाते से जुड़े काम और दूसरी शाखा सेवाओं पर असर पड़ सकता है। खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है।
हालांकि UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी डिजिटल सेवाएं जारी रहने की उम्मीद है। फिर भी किसी तकनीकी या परिचालन समस्या की स्थिति में ग्राहकों को परेशानी हो सकती है (Why are bank employees striking)।
हड़ताल से पहले 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत है। लगातार कई दिन बैंक शाखाओं के बंद रहने से ग्राहकों को परेशानी न हो, इसलिए सरकार ने 27 सितंबर, रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को खुला रखने का फैसला किया है।
RBI ने भी 27 सितंबर को बैंक शाखाओं, कार्यालयों, ATM से जुड़े केंद्रों और करेंसी चेस्ट को संचालित रखने की मंजूरी दी है (Why are bank employees striking)।
क्या सितंबर की सैलरी में देरी होगी?
केंद्र सरकार ने बैंक हड़ताल को देखते हुए सितंबर 2026 की सैलरी और पेंशन पहले जारी करने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के अनुसार केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की सितंबर की सैलरी, मजदूरी और पेंशन 25 सितंबर को जारी की जाएगी।
प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी पर असर उनकी कंपनी की भुगतान प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। अगर कंपनी 28 सितंबर से पहले सैलरी प्रोसेस कर देती है तो भुगतान समय पर हो सकता है। वहीं 28 से 30 सितंबर के बीच भुगतान प्रक्रिया होने पर देरी की संभावना है (Why are bank employees striking)।
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