
Tarique Rahman : बांग्लादेश चुनाव ने दक्षिण एशियाई राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। Tarique Rahman के नेतृत्व में Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इस जीत के साथ ही ढाका की सत्ता में वापसी करने वाले तारिक रहमान अब भारत-बांग्लादेश संबंधों के भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत बधाई देकर यह संकेत दिया कि नई दिल्ली ढाका में नई सरकार के साथ सकारात्मक शुरुआत चाहती है। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने और भारत आने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में ठंडक देखी गई थी।
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Tarique Rahman की संतुलित विदेश नीति
17 साल के लंदन प्रवास के बाद लौटे तारिक रहमान (Tarique Rahman) ने खुद को एक बदले हुए और व्यावहारिक नेता के रूप में पेश किया है। उनका नारा ‘Bangladesh First’ भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच संतुलित संबंधों की बात करता है।
भारत के लिए राहत की बात यह रही कि उन्होंने शुरुआती भाषणों में भारत-विरोधी बयानबाजी से दूरी बनाए रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म व्यक्ति का विषय है, राज्य सबका है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय, की सुरक्षा को लेकर यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है बांग्लादेश?
भारत और बांग्लादेश लगभग 4,000 किमी लंबी सीमा साझा करते हैं। दोनों देशों के संबंध कई रणनीतिक पहलुओं से जुड़े हैं – सीमा सुरक्षा और पूर्वोत्तर भारत की स्थिरता, व्यापार और आर्थिक साझेदारी, ऊर्जा आपूर्ति और कनेक्टिविटी, क्षेत्रीय भू-राजनीतिक संतुलन।
तारिक रहमान (Tarique Rahman) की जीत के भारत के लिए मायने
- भारत तारिक रहमान (Tarique Rahman) की जीत को न संकट मानेगा न उत्सव। नई सरकार की नीतियां तय करेंगी कि संबंध किस दिशा में जाएंगे।
- भारत ने हमेशा बांग्लादेश के जनादेश का सम्मान किया है और इस बार भी वही रुख अपनाया है।
- Jamaat-e-Islami Bangladesh की सक्रियता भारत के लिए चिंता का विषय रही है। BNP अगर संतुलन बनाए रखती है तो भारत सहज रहेगा।
- भारत यह देखेगा कि तारिक (Tarique Rahman) की नई सरकार पाकिस्तान और चीन के साथ कितनी नजदीकी बढ़ाती है। संतुलन साधा गया तो सहयोग बढ़ेगा, झुकाव बढ़ा तो सतर्कता भी बढ़ेगी।
- BNP ने चुनाव अभियान में कट्टर एजेंडा नहीं अपनाया और हिंसा की घटनाओं की आलोचना की। इससे अल्पसंख्यक समुदाय में सीमित लेकिन सकारात्मक उम्मीद जगी है।
भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल-वितरण समझौता लंबे समय से लंबित है। तारिक रहमान (Tarique Rahman) ने इसे प्राथमिकता बताया है। इसके अलावा सीमा पर होने वाली हत्याएं और अवैध गतिविधियां भी अहम मुद्दे हैं। इन मामलों में प्रगति भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय करेगी।
‘डार्क प्रिंस’ से मुख्यधारा के नेता तक
2001-2006 के दौर में, जब Khaleda Zia सत्ता में थीं और भारत में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, तब दोनों देशों के संबंधों में तनाव रहा। उस समय तारिक रहमान (Tarique Rahman) पर उग्रवादी समूहों से नरमी बरतने के आरोप लगे और उन्हें डार्क प्रिंस कहा गया।
हालांकि 2024 के बाद कई मामलों में राहत मिलने के साथ वे अब एक संतुलित और सुधारवादी नेता की छवि गढ़ने में लगे हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंध इस समय दो पटरियों पर चल रहे हैं – रणनीतिक आवश्यकता और जनभावना की संवेदनशीलता। आने वाले महीनों में तीन मुद्दे निर्णायक रहेंगे – तीस्ता जल समझौता, सीमा सुरक्षा और अल्पसंख्यक,
शेख हसीना का प्रत्यर्पण मुद्दा। अगर तारिक रहमान (Tarique Rahman) संतुलित विदेश नीति और घरेलू स्थिरता बनाए रखते हैं, तो भारत-बांग्लादेश रिश्तों में वास्तविक ‘रीसेट’ संभव है।
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