
Tarique Rahman return to Dhaka : करीब 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की ढाका वापसी ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। गुरुवार को जब तारिक रहमान लंदन से ढाका एयरपोर्ट पहुंचे, तो राजधानी में समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यह सिर्फ एक नेता की घर वापसी नहीं थी, बल्कि उस दौर की वापसी मानी जा रही है, जब बांग्लादेश की राजनीति नए मोड़ पर खड़ी है।
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ऐसे समय में लौटे (Tarique Rahman return to Dhaka) हैं, जब देश 2024 की राजनीतिक उथल-पुथल, शेख हसीना के देश छोड़ने और बढ़ते असंतोष के दौर से गुजर रहा है।
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मिट्टी को छूकर दिया भावनात्मक संदेश
एयरपोर्ट पर उतरते ही तारिक रहमान ने जूते उतारे, जमीन की मिट्टी उठाई और माथे से लगाई। यह दृश्य उनके समर्थकों के लिए भावनात्मक क्षण बन गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह लाल-हरे रंग की बुलेटप्रूफ बस में सवार होकर आगे बढ़े, जो बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में सजी थी। उनके साथ पत्नी जुबाइदा रहमान, बेटी जाइमा रहमान और उनका पालतू बिल्ली ‘जेबू’ भी मौजूद थे।
1971 और 2024 को जोड़ा, कहा – मेरे पास एक योजना है
ढाका की जमीन पर अपने पहले भाषण में तारिक रहमान ने बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम और 2024 के राजनीतिक आंदोलन के बीच सीधा संबंध जोड़ा। उन्होंने कहा कि जैसे 1971 में देश ने आजादी हासिल की थी, वैसे ही 2024 में लोगों ने एक बार फिर लोकतंत्र और संप्रभुता की रक्षा की।
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उन्होंने मार्टिन लूथर किंग जूनियर की मशहूर पंक्ति को याद करते हुए कहा – I have a dream नहीं, आज मैं कहता हूं – I have a plan.
उनका कहना था कि बांग्लादेश के लोग अपनी बोलने की आजादी, लोकतांत्रिक अधिकार और सुरक्षा वापस चाहते हैं। उन्होंने सभी धर्मों, समुदायों और क्षेत्रों के लोगों को साथ लेकर एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाने की बात कही, जहां महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक बिना डर के घर से बाहर जा सकें (Tarique Rahman return to Dhaka)।
उस्मान हादी का जिक्र और भावनात्मक अपील
तारिक रहमान ने छात्र नेता उस्मान हादी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने आर्थिक अधिकारों की लड़ाई लड़ी। उन्होंने 1971 और 2024 में शहीद हुए लोगों के खून के कर्ज की बात करते हुए कहा कि अब समय है उस सपनों के बांग्लादेश को बनाने का, जिसके लिए लोगों ने बलिदान दिया।
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तारिक रहमान की वापसी (Tarique Rahman return to Dhaka) ऐसे समय में हुई है, जब उनकी मां और BNP सुप्रीमो खालिदा जिया गंभीर रूप से बीमार हैं और सक्रिय राजनीति से दूर हैं। ऐसे में तारिक रहमान अब पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। उनकी मौजूदगी से BNP को न सिर्फ नई ऊर्जा मिली है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले पार्टी को एक स्पष्ट नेतृत्व भी मिलता दिख रहा है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या पड़ेगा असर?
तारिक रहमान की वापसी (Tarique Rahman return to Dhaka) का असर सिर्फ बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पहले ही शेख हसीना के भारत में निर्वासन और 2024 की घटनाओं के बाद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
हसीना के देश छोड़ने के बाद ढाका और नई दिल्ली के बीच भरोसे की कमी बढ़ी है। वहीं BNP का पारंपरिक रुख भारत के प्रति हमेशा सतर्क और कई बार आलोचनात्मक रहा है। ऐसे में तारिक रहमान की वापसी (Tarique Rahman return to Dhaka) भारत के लिए भी एक नई कूटनीतिक चुनौती बन सकती है।
खासतौर पर उस समय, जब हाल ही में छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े दीपू चंद्र दास की मौत ने भारत में भी विरोध प्रदर्शन भड़काए हैं।



