पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को जाफर एक्सप्रेस पर एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ (Blast in Jaffar Express)। यह हादसा सुलतान कोट के पास हुआ, जो शिकारपुर और जैकबाबाद के बीच स्थित है। विस्फोट इतनी ताकतवर था कि ट्रेन के छह कोच पटरी से उतर गए और कई यात्री घायल हो गए। ट्रेन क्वेटा से पेशावर की ओर जा रही थी।
स्थानीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह हमला रिमोट-कंट्रोल्ड आईईडी से किया गया। बलूचिस्तान रिपब्लिकन गार्ड्स ने हमले (Blast in Jaffar Express) की जिम्मेदारी ली और कहा कि इस दौरान ट्रेन में पाकिस्तानी सेना के कई कर्मी मौजूद थे। समूह ने दावा किया कि विस्फोट में कई सैनिक मारे गए और घायल हुए।
पुलिस ने बताया कि विस्फोट (Blast in Jaffar Express) सुलतान कोट के गांव के पास हुआ, जिससे ट्रैक भी क्षतिग्रस्त हो गया। मार्च 2025 में भी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इसी ट्रेन को हाईजैक किया था। जाफर एक्सप्रेस अक्सर बलूच अलगाववादियों का निशाना बनती है, क्योंकि यह क्वेटा और पंजाब के बीच सेना के कर्मियों को ले जाती है।
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पाकिस्तानी सेना ने गांव पर बोला था हमला
बलूचिस्तान में हाल ही में पाकिस्तानी सेना ने एक गांव पर हवाई हमले किए थे। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मछ और कोहलू जिलों में हवाई हमले किए गए थे, जिनमें कई लोगों के मारे जाने की खबर आई थी।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, ये हमले आतंकवाद विरोधी अभियान के नाम पर किए गए, पर जिन इलाकों को निशाना बनाया गया, वे अधिकतर ग्रामीण और आबादी वाले क्षेत्र थे। विभिन्न मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, मरने वालों में महिलाओं और बच्चों की भी संख्या शामिल थी। मानवाधिकार संगठनों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।
पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसने बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्दोष लोगों को मारा गया और गांव के कई घर पूरी तरह तबाह हो गए।
बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के भीतर विद्रोह और असंतोष का केंद्र रहा है। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर यह इलाका दशकों से सैन्य कार्रवाई, जबरन गुमशुदगियों और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए चर्चित रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना ने सवाल खड़े किए हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने इन हवाई हमलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। वहीं, बलूच नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप करने की अपील की है। पाकिस्तान की सरकार ने इसे आंतरिक सुरक्षा मामला बताकर बाहरी हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है।


