
Uttarakhand Char Dham Yatra
बृजेश सती
उत्तराखंड स्थित चार धाम (Uttarakhand Char Dham Yatra) देश के ऐसे तीर्थ स्थल हैं, जहां कपाट खुलने और बंद होने की अनोखी परंपरा है। यहां 6 महीने नर और अगले छह महीने देवताओं द्वारा भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है।
अनादि काल से चली आ रही इसी परंपरा के अनुसार इस वर्ष अक्षय तृतीया, 30 अप्रैल (Akshaya Tritiya) से चार धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस दिन यमनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलेंगे। 2 मई को केदारनाथ मंदिर और 4 मई को बदरीनाथ मंदिर (Kedarnath and Badrinath) के द्वार खुलने तक यह परंपरा चलेगी।
चार धाम यात्रा (Uttarakhand Char Dham Yatra) पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या इस यात्रा काल में पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहने की संभावना है। अब तक 15 लाख से अधिक यात्रियों ने ऑनलाइन पंजीकरण करावाया है।
इसके अलावा ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा भी हरिद्वार, ऋषिकेश और विकास नगर में उपलब्ध है। पर्यटन विभाग का मानना है कि पहले 15 दिनों में चारों धाम में 10 लाख यात्री आ सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से व्यवस्था की जा रही है।
सरकार के इंतजामों की परीक्षा यात्रा शुरू होने के साथ ही शुरू हो जाएगी। सरकार के सामने यात्रा प्रबंधन और संचालन से संबधित चुनौतियां पहाड़ के समान हैं। इसमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण क्राउड मैनेजमेंट और जाम की समस्या है। इन दोनों से सिस्टम किस तरह निपटता है, यह देखना दिलचस्प होगा। इसके अलावा यात्रा मार्गों में व्यवस्थाओं और यात्रियों के दर्शन की सुविधा को लेकर किए गए प्रयास पर सबकी नजरें रहेंगी।
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सरकार के सामने बड़ी समस्या केदारनाथ और यमुनोत्री पैदल मार्ग में बेहतर यात्रा व्यवस्था के संचालन की भी है। खास तौर से यमुनोत्री का मार्ग संकरा है और यहां आवागमन के लिए केवल एक ही रास्ता है। इसी से पैदल यात्री, घोड़े-खच्चर और पालकी वाले आते-जाते हैं। वैसे यमुनोत्री (Yamunotri) के लिए वैकल्पिक पैदल मार्ग बनाने की चर्चाऐं तो खूब हुईं, लेकिन धरातल पर योजना उतर नहीं पाई।
अनादिकाल से चल रही चार धाम यात्रा (Uttarakhand Char Dham Yatra)
चार धाम यात्रा का इतिहास ब्रिटिश काल और टिहरी रियासत से जुड़ा है। उस समय से लेकर उत्तर प्रदेश के दौर तक यह यात्रा निरंतर संचालित होती रही। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद बीते 24 वर्षों से यह यात्रा राज्य सरकार की देखरेख में हो रही है। पहले यात्रियों की संख्या सीमित हुआ करती थी, लेकिन अब हर साल इसमें तेजी से इजाफा हो रहा है, और श्रद्धालुओं की संख्या 50 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है।
राज्य गठन से पहले यात्रा की सभी व्यवस्थाएं और योजना लखनऊ से संचालित होती थीं। लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद भी यात्रा (Uttarakhand Char Dham Yatra) प्रबंधन और रणनीतियां अक्सर सवालों के घेरे में रही हैं। चार धामों में बढ़ती भीड़ के कारण अब यात्रियों की संख्या सीमित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हर यात्रा सीजन में इस फैसले का हितधारकों द्वारा विरोध किया जाता है।
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Uttrakhand Char Dham Yatra देश के अन्य तीर्थ स्थलों से कई मायनों में अलग है। यहां यात्रियों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण अनिवार्य है—ऐसी व्यवस्था शायद ही किसी अन्य तीर्थ स्थल पर हो।
इस वर्ष उत्तराखंड चार धाम यात्रा (Uttarakhand Char Dham Yatra) प्रबंधन को लेकर सरकार ने कई अभिनव प्रयोग किए हैं। उदाहरण के तौर पर, 50 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण को अनिवार्य किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बाकायदा एडवाइजरी भी जारी की गई है।
एक समय था जब बुजुर्ग यात्री जीवन के अंतिम चरण में मोक्ष की कामना लिए यहां आते थे और जीवित लौटने की संभावना कम मानी जाती थी। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। यात्रियों को अब फर्स्ट एड किट साथ लानी पड़ रही है और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है।
ट्रैफिक जाम से निपटना चुनौती
चार धाम यात्रा (Uttarakhand Char Dham Yatra) के दौरान सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है ट्रैफिक जाम। इस समस्या से निपटने के लिए पुलिस और प्रशासन को एक ठोस और व्यावहारिक कार्य योजना तैयार करनी होगी।
हाल ही में वीकेंड और बैसाखी के दौरान हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी में जो भारी जाम लगा, उसने आने वाले दिनों की स्थिति की गंभीरता को पहले ही उजागर कर दिया है। ऐसे जाम न सिर्फ तीर्थ यात्रियों की यात्रा को प्रभावित करते हैं, बल्कि कई बार उन्हें अपनी फ्लाइट या ट्रेन की बुकिंग तक रद्द करनी पड़ जाती है।
इस बार यात्रा व्यवस्था में यह नया नियम जोड़ा गया है कि श्रद्धालु जिस दिन के लिए पंजीकृत होंगे, उसी दिन उन्हें संबंधित धाम में दर्शन की अनुमति दी जाएगी।
हालांकि, यदि किसी कारणवश – जैसे कि प्राकृतिक आपदा, सड़क जाम या अन्य बाधाओं के चलते यात्री तय तिथि पर धाम नहीं पहुंच पाते, तो उन्हें दर्शन से वंचित कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था यात्रियों के लिए अनुचित और कठोर प्रतीत होती है, जिस पर पुनर्विचार आवश्यक है।
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भीड़ प्रबंधन सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। पिछली बार यात्रियों की अत्यधिक भीड़ के चलते यात्रा व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई थीं। इस बार ऐसी स्थिति न दोहराई जाए, इसके लिए पहले से एक मजबूत और लचीली रणनीति बनाना जरूरी है।
चार धामों में संचार सुविधाएं भी बड़ी समस्या हैं। अक्सर नेटवर्क बाधित रहने के कारण देश-विदेश से आए तीर्थ यात्रियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नेटवर्क न होने से वे न सिर्फ अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पाते, बल्कि डिजिटल भुगतान और कैशलेस लेनदेन की सुविधा भी ठप हो जाती है। इन तकनीकी अड़चनों का समाधान भी यात्रा की सफल व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
Uttarakhand Char Dham Yatra में हवाई सेवा में गड़बड़ी
केदारनाथ के लिए हवाई सेवा (हेली सेवा) से जाने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन हेली कंपनियां अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को नहीं ले सकतीं। इसके बावजूद टिकटों में गड़बड़ी और यात्रियों से मनमाने दाम वसूलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
हेली सेवा के नाम पर साइबर ठगी के भी कई मामले दर्ज हो चुके हैं। ठग, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को हेलीकॉप्टर बुकिंग और होटल बुकिंग के नाम पर बैंक खातों से ठगने में लगे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ ने राष्ट्रीय स्तर पर तीर्थयात्रियों को अलर्ट जारी किया है।
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इस बार Uttarakhand Char Dham Yatra के बेहतर प्रबंधन के लिए विभिन्न विभागों ने कई प्रयोग किए हैं। परिवहन विभाग ने तय किया है कि यदि कोई ट्रैवल एजेंसी या निजी वाहन चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूलता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा और आवश्यक होने पर एजेंसी का लाइसेंस भी निलंबित किया जा सकता है।
इसके लिए ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून के एआरटीओ कार्यालयों में शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था की गई है। यात्रा पर जाने वाले वाहन चालकों की नियमित काउंसलिंग कराए जाने की भी योजना है।
मोबाइल ऐप पर यात्रा (Uttarakhand Char Dham Yatra) की जानकारी
पुलिस विभाग एक विशेष मोबाइल ऐप तैयार कर रहा है, जो चार धाम यात्रा से जुड़े रियल टाइम अपडेट, आपातकालीन सहायता और मार्ग स्थितियों की जानकारी देगा। इसके अलावा, गढ़वाल रेंज कार्यालय को चार धाम यात्रा का केंद्रीय नियंत्रण कक्ष बनाया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से यात्रा मार्गों पर चिकित्सकों की तैनाती रहेगी। खासतौर से 50 वर्ष से अधिक उम्र के तीर्थयात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें यात्रियों को फर्स्ट एड बॉक्स साथ लाने की सलाह दी गई है।
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सड़कों की दृष्टि से भी तैयारी की जा रही है। ऑल वेदर रोड और अन्य मुख्य मार्गों के संवेदनशील स्थलों की मैपिंग की योजना बनाई गई है। यात्रा मार्ग पर लगभग छह हजार पुलिसकर्मियों के साथ 17 पीएसी कंपनियां भी तैनात रहेंगी।
फिर भी, यात्रा (Uttarakhand Char Dham Yatra) की अधूरी तैयारियों का खामियाजा हर साल देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ता है, जो विषम परिस्थितियों में चार धाम की यात्रा के लिए यहां आते हैं। अनावश्यक प्रयोगों के बजाय यात्रियों को बेहतर, सुगम और सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराने पर प्राथमिकता से ध्यान देना समय की मांग है।



