
China weapons betrayed Iran : चीनी सामान के बारे में कहा जाता है कि चले तो चांद तक वरना रात तक, यानी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती कि सामान कितना चलेगा। चीन बड़े पैमाने पर उत्पादन तो कर लेता है, लेकिन गुणवत्ता नहीं रहती।
अमेरिका-इजरायल और ईरान (US Israel Iran War) युद्ध में फिर से चीन के सामनों को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। ईरान ने चीन से एयर डिफेंस सिस्टम लिया है। चीन की मिसाइल प्रणाली HQ-9B को लेकर उसे बहुत भरोसा था, लेकिन जिस तरह से अमेरिकी-इजरायली हथियारों ने ईरान के भीतर तक तबाही मचाई है, उससे पूछा जा रहा है कि क्या चीनी हथियार भरोसे के काबिल हैं भी (China weapons betrayed Iran)?
20 से ज्यादा ईरानी प्रांतों में फैली तबाही ने यह संकेत दिया कि हमले बेहद संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत थे। सैन्य ठिकानों, मिसाइल बेस, परमाणु प्रतिष्ठानों और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया गया। अमेरिका और इजरायल ने स्टेल्थ फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सटीक गाइडेड हथियारों का इस्तेमाल किया। ईरान में तैनात चीनी हथियारों के पास इनका कोई जवाब नहीं था (China weapons betrayed Iran)।
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ईरान ने बनाई थी कई परतों वाली सुरक्षा
ईरान ने अपनी वायु सुरक्षा को कई परतों में तैयार किया था। लंबी दूरी की रक्षा में चीन की HQ-9B, रूस की S-300PMU-2 और स्वदेशी Bavar-373 शामिल बताए जाते हैं।
मध्यम और कम दूरी की सुरक्षा के लिए अलग-अलग सिस्टम तैनात थे, ताकि कोई भी मिसाइल या विमान एक ही झटके में अंदर तक न घुस सके।
ईरान की प्लानिंग थी कि अगर एक लेयर चूक जाती है, तो दूसरी उसे रोक ले। हालांकि इस हमले ने बता दिया कि सारी लेयर बेकार साबित हुईं (China weapons betrayed Iran)।
कितनी ताकतवर चीनी मिसाइल?
China Aerospace Science and Industry Corporation द्वारा विकसित HQ-9B को चीन की उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली माना जाता है।
बताया जाता है कि यह लगभग 250–260 किलोमीटर तक लक्ष्य भेद सकती है और ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों, क्रूज मिसाइलों और कुछ बैलिस्टिक खतरों को रोकने की क्षमता रखती है। यह सिस्टम एक साथ दर्जनों लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और कई पर एक साथ हमला कर सकता है। लेकिन इस संघर्ष में ऐसा कुछ नहीं हुआ (China weapons betrayed Iran)।
वैसे बता दें कि चीन ने आधिकारिक तौर पर ईरान को HQ-9B देने से इनकार किया है। लेकिन कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि चीन ने तेल के बदले ईरान को कई हथियार दिए हैं और उसमें यह मिसाइल सिस्टम भी है।
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माना जा रहा है कि ईरान के चीनी हथियार दो वजहों से नाकाम हो सकते हैं (China weapons betrayed Iran) –
- अमेरिका और इजरायल ने बड़ी संख्या में मिसाइल दागीं। इससे चीनी सिस्टम के लिए उनको रोकना मुश्किल हो गया। कोई भी डिफेंस सिस्टम असीमित मिसाइलें नहीं रोक सकता।
- दूसरी वजह यह मानी जा रही है कि अमेरिका और इजरायल (US Israel Iran War) ने पहले ही कमांड सेंटर को निशाना बना लिया होगा।
चीन की साख पर असर
चीन बहुत अरसे से दुनिया को अपने हथियार बेचने की कोशिश में लगा है। वह फ्रांस, अमेरिका और रूस जैसे बड़े हथियार निर्यातक देशों की कतार में खड़े होना चाहता है।
लेकिन उसके निर्यात का पैमाना अमेरिका और रूस जैसे देशों से बहुत छोटा है। ताजा डेटा के अनुसार 2024 में चीन ने लगभग 1,131 मिलियन डॉलर (लगभग 113 करोड़ डॉलर) के हथियार विदेशों को बेचे, जो पिछले साल की तुलना में काफी कम है। यह आंकड़ा वैश्विक हथियार निर्यात में उसका हिस्सा दर्शाता है, लेकिन फिर भी वह शीर्ष निर्यातक देशों की लंबी सूची में चौथे स्थान पर है।
ईरान में मिले धोखे (China weapons betrayed Iran) से चीन की साख को धक्का पहुंचा है। अब नए देश उसके हथियारों पर निर्भर रहने से पहले सोचेंगे।
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