
Could Mahatma Gandhi Save Bhagat Singh : भारत की आजादी की लड़ाई के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत महात्मा गांधी के योगदान को लेकर किसी को शक नहीं है। लेकिन कुछ सवाल जरूर हैं, जो बार-बार उठते हैं। एक वक्त ऐसा भी था, जब बापू को नाराजगी बेहद बढ़ गई थी। जब देश को आजादी मिलने वाली थी, तब एक वर्ग महात्मा गांधी की पाकिस्तान और मुस्लिमों को लेकर नरम रुख से नाराज था।
एक और बड़ी नाराजगी महात्मा गांधी से यह रही कि उन्होंने भगत सिंह को नहीं बचाया। क्या वाकई ऐसा था? क्या महात्मा गांधी चाहते तो भगत सिंह बच सकते थे? (Could Mahatma Gandhi Save Bhagat Singh) इसके दो पक्ष हो सकते हैं।
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हर तरह की हिंसा के खिलाफ
गांधीजी किसी भी कीमत पर हिंसा का समर्थन नहीं करते थे। उनका कहना था कि हिंसा कोई भी हो, उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता – भले ही इसका उद्देश्य स्वतंत्रता ही क्यों न हो। इसका सबसे बड़ा उदाहरण चौरी-चौरा कांड है।
तब अंग्रेज सरकार असहयोग आंदोलन की वजह से दबाव में थी, लेकिन महात्मा गांधी ने चौरी-चौरा कांड से खफा होकर इसे वापस ले लिया। उन्होंने कहा था कि स्वराज जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण है अहिंसा।
महात्मा गांधी ने कभी खुद का भी बचाव नहीं किया। उन्होंने हमेशा कहा कि अगर मैंने जुर्म किया है तो मैं उसकी सजा भुगतने के लिए तैयार हूं। वह हमेशा सोचते थे कि जो भी हम काम करें, उसकी कीमत चुकाने के लिए हमें सहज तैयार रहना चाहिए (Could Mahatma Gandhi Save Bhagat Singh)।
इरविन के साथ समझौते की बंदिश
गांधीजी जब जेल में थे, तभी भगत सिंह को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी थी। 26 जनवरी 1931 को गांधीजी रिहा हुए। उसके बाद मार्च में गांधी-इरविन समझौता हुआ। गांधीजी पर दबाव था कि उन्हें यह समझौता तोड़ देना चाहिए।
देश में यह भावना बन रही थी कि महात्मा गांधी को अंग्रेज सरकार के सामने शर्त रखनी चाहिए कि पहले भगत सिंह और उनके साथियों की फांसी की सजा रोकी जाए। हालांकि तब के हालात को देखते हुए ऐसा संभव नहीं था। गांधी-इरविन समझौते के तहत करीब 90 हजार राजनीतिक कैदियों की रिहाई हुई थी।
इन कैदियों की जब्त संपत्ति भी ब्रिटिश सरकार ने वापस कर दी थी। लेकिन इसमें तय था कि उन कैदियों को रिहा नहीं किया जाएगा, जो हिंसक गतिविधियों में शामिल थे। अंग्रेज सरकार पहले ही इस पर अड़ी हुई थी (Could Mahatma Gandhi Save Bhagat Singh)।
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गांधीजी क्या भगत सिंह को बचा सकते थे (Could Mahatma Gandhi Save Bhagat Singh)?
वह प्रयास कर सकते थे और उन्होंने किया। सुभाष चंद्र बोस ने ‘इंडियन स्ट्रगल’ में लिखा है कि गांधीजी अपनी ओर से जितना प्रयास भगत सिंह को बचाने के लिए कर सकते थे उन्होंने किया। जब तक इरविन ने फांसी के ऑर्डर पर दस्तख्त नहीं किए थे, उससे पहले गांधीजी ने तीन चिट्ठियां लिखी थीं। उसमें उन्होंने इरविन को कहा कि फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दीजिए। 18 फरवरी, 19 मार्च और 23 मार्च 1931 को ये चिट्ठियां लिखीं (Could Mahatma Gandhi Save Bhagat Singh)।
इरविन ने गांधीजी की बात नहीं मानी। इसके पीछे अंग्रेजों की चाल भी थी। वे चाहते थे कि भारत के लोगों को ऐसा लगे कि गांधीजी ने भगत सिंह और उनके साथियों को बचाने का प्रयास नहीं किया। इससे आंदोलनकारियों के बीच फूट पड़ जाती। अंग्रेज किसी भी तरह से महात्मा गांधी की लोकप्रियता को कम करना चाहते थे।
फिर यहां सवाल यह भी उठता है कि गांधीजी और क्या कर सकते थे, क्या उनके पास कोई सरकारी पद था? नहीं, वह अपनी मांग बातचीत के जरिये ही रख सकते थे और उन्होंने किया (Could Mahatma Gandhi Save Bhagat Singh)। लेकिन भगत सिंह और उनके साथियों से अंग्रेज सरकार इतना डर गई थी कि वह इनको छोड़ने का जोखिम नहीं लेना चाहती थी।
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