
Reservation
कर्नाटक की राजनीति में जातीय जनगणना (Caste Census) की लीक रिपोर्ट ने तूफान ला दिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार जिस उम्मीद से सामाजिक न्याय का नारा लेकर चली थी, अब उसी की सियासी जमीन खिसकती नजर आ रही है।
लीक हुई इस रिपोर्ट में ओबीसी के लिए आरक्षण (OBC Reservation) को 32% से बढ़ाकर 51% करने और मुस्लिम समुदाय के लिए 4% से 8% आरक्षण (Reservation) की सिफारिश की गई है। इसने कांग्रेस पार्टी के भीतर ही टकराव पैदा कर दिया है, जबकि विपक्षी बीजेपी ने इसे अल्पसंख्यक तुष्टिकरण (Minority Appeasement) का नाम देकर हमले तेज कर दिए हैं।
वोक्कालिगा और लिंगायत : दो ध्रुव, दो विरोध
कर्नाटक की राजनीति में दो सबसे प्रभावशाली जातियां हैं – वोक्कालिगा (Vokkaliga) और लिंगायत (Lingayat)। लेकिन इस रिपोर्ट के आंकड़ों ने इन दोनों समुदायों को नाराज कर दिया है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि वोक्कालिगा समुदाय की आबादी करीब 61.6 लाख (10.3%) है और उन्हें 7% आरक्षण (Reservation) मिलना चाहिए। वहीं लिंगायत समुदाय की आबादी 66.3 लाख (11%) मानी गई है, जिसके आधार पर उन्हें 8% आरक्षण (Reservation) की सिफारिश की गई है।
लेकिन लिंगायत नेताओं ने इस आंकड़े को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि लिंगायतों की वास्तविक संख्या राज्य की आबादी का 35% है। अखिल भारतीय वीरशैव लिंगायत महासभा के प्रमुख और पूर्व डीजीपी शंकर बिदारी ने कहा कि कर्नाटक के 31 में से कम से कम 15 ज़िलों में लिंगायतों की संख्या 10 लाख से ज़्यादा है।
उप-जातियों ने बिगाड़ा गणित?
लिंगायतों की घटती गिनती पर उद्योग मंत्री और लिंगायत नेता एम.बी. पाटिल ने कहा कि कई उप-जातियां जैसे हिंदू गणिगा, हिंदू बनजिगा, और हिंदू सदारास, आरक्षण (Reservation) के फायदे के लिए खुद को अलग कैटेगरी में दर्ज करवा चुकी हैं। इस वजह से मुख्य धारा की लिंगायत पहचान बंटी हुई दिख रही है। उन्होंने कहा कि अगर इन सभी उप-जातियों को जोड़ लें तो लिंगायतों की आबादी एक करोड़ से ज्यादा है।
Muslim Reservation पर विवाद
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुस्लिम आबादी 12.6% यानी 75.2 लाख है। इसलिए उनके लिए आरक्षण (Reservation) को 4% से बढ़ाकर 8% करने की सिफारिश की गई है।
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इसी बिंदु पर बीजेपी ने सरकार पर करारा प्रहार किया है। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, ‘यह रिपोर्ट सीएम की पसंद से तैयार की गई लगती है। वरना मुसलमानों को बहुसंख्यक समुदाय कैसे बताया जा सकता है?’
बीजेपी से निष्कासित विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने तो यहां तक कह दिया कि अगर मुसलमान बहुसंख्यक हैं, तो उन्हें अल्पसंख्यक (Minority) का दर्जा क्यों? इस तर्क से तो 2% ब्राह्मणों को अल्पसंख्यक मानना चाहिए।
कांग्रेस में बिखराव
कांग्रेस के अंदर भी इस रिपोर्ट को लेकर एकराय नहीं है। वोक्कालिगा संतों और नेताओं ने रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया है। वहीं, अखिल भारतीय वीरशैव लिंगायत महासभा ने इसे अवैज्ञानिक बताते हुए एक नई जनगणना कराने की मांग की है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता शमनुर शिवशंकरप्पा ने कहा कि सर्वे टीम हमारे घर तक नहीं आई, तो यह रिपोर्ट कैसे भरोसेमंद हो सकती है?
उधर, डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार का कहना है कि हर कोई अपने समुदाय को बचाने की कोशिश कर रहा है। यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। 17 अप्रैल को कैबिनेट इस रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा करेगा।
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उन्होंने यह भी कहा कि बतौर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष, उनकी जिम्मेदारी है कि सभी समुदायों के साथ न्याय हो।
सुप्रीम कोर्ट में टिकेगा मामला?
इस रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुसार, कर्नाटक में कुल आरक्षण (Reservation) अब 73.5% तक पहुंच जाएगा। इसमें 15% एससी (SC), 7.5% एसटी (ST), और शेष ओबीसी (OBC) तथा मुसलमानों को दिया जाएगा।
यह सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50% की अधिकतम सीमा से अधिक है। ऐसे में कानूनी चुनौती भी तय मानी जा रही है।
सवाल यह नहीं है कि जातीय जनगणना होनी चाहिए या नहीं – सवाल यह है कि अगर की जाए तो वह विश्वसनीय और वैज्ञानिक आधार पर हो।
फिलहाल, सिद्धारमैया सरकार खुद अपने ही बनाए इस सामाजिक समीकरण में उलझ गई है। जहां एक तरफ कांग्रेस का परंपरागत वोटबैंक असमंजस में है, वहीं बीजेपी को सरकार को घेरने का एक नया मुद्दा मिल गया है।
अब सबकी निगाहें 17 अप्रैल की कैबिनेट बैठक पर हैं, जहां यह तय होगा कि रिपोर्ट को अपनाया जाएगा या इतिहास की फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।
अगर आप चाहते हैं कि जातीय संतुलन के नाम पर असंतुलन न पैदा हो, तो यह रिपोर्ट सिर्फ एक कागज़ नहीं, बल्कि एक बहस का दस्तावेज है। इस पर सोच-समझकर फैसला लिया जाना चाहिए।



