
Shashi Tharoor
जब देश की राजनीति में विचारधाराओं के टकराव के बीच कोई नेता राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि मानकर आगे बढ़ता है, तो वह नजीर बन जाता है, मगर कभी-कभी वह खुद अपनी पार्टी के लिए असहज स्थिति भी पैदा कर देता है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) का केंद्र सरकार के एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल (multi-party delegation) का नेतृत्व करने का निमंत्रण स्वीकार करना ठीक वैसी ही स्थिति बन गया है।
दरअसल, केंद्र ने हाल ही में सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों का गठन किया है जो विदेशों में जाकर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति और रुख को दुनिया के सामने रखेंगे। इनमें से एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व शशि थरूर (Shashi Tharoor) को सौंपा गया।
थरूर, जो संयुक्त राष्ट्र में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं और विदेश मामलों की अच्छी समझ रखते हैं, ने इस जिम्मेदारी को सम्मानपूर्वक स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, ‘इसमें मुझे कोई राजनीति नहीं दिखती, यह देशसेवा का मामला है। जब देश संकट में हो और सरकार आपकी मदद मांगे, तो कोई भी नागरिक इनकार नहीं कर सकता।’
थरूर के इस कदम ने कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के भीतर असहजता पैदा कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा कि लोकतंत्र में जब कोई सांसद किसी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल में शामिल होता है, तो उसे पहले पार्टी की अनुमति लेनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की सुरक्षा से जुड़े मसले पर भी सरकार राजनीति कर रही है।
कांग्रेस का तर्क था कि जब सरकार ने नाम मांगे, तो उसने अपने स्तर से चार नेताओं – आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, सैयद नसीर हुसैन और राजा बरार – के नाम भेजे थे। बावजूद इसके, थरूर (Shashi Tharoor) को चुनकर सरकार ने कांग्रेस के निर्णय को नज़रअंदाज़ कर दिया।
Shashi Tharoor के स्टैंड से कांग्रेस असहज
लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती। थरूर ने न सिर्फ यह जिम्मेदारी स्वीकार की, बल्कि जब मीडिया ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने पार्टी से अनुमति ली थी, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘मैंने पार्टी को सूचित कर दिया था।’
थरूर ने इस पूरी बहस को ही बेवजह करार दिया और कहा कि जब देश एक 88 घंटे की जंग लड़ चुका हो, तब हम सबको एकजुट होकर दुनिया के सामने एक आवाज में बोलना चाहिए।
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कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी थरूर को अपमानित कर रही है, पर वह कहते हैं, ‘मुझे कोई इतनी आसानी से अपमानित नहीं कर सकता। मैं अपनी अहमियत जानता हूं।’
बीजेपी ने भी इस मौके को नहीं छोड़ा। पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस की पसंद पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं, उनमें ऐसे लोग भी हैं जिनसे जुड़ी पाकिस्तान समर्थक घटनाएं विवादों में रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि जब शशि थरूर (Shashi Tharoor) इतने काबिल हैं, तो कांग्रेस ने उन्हें खुद क्यों नहीं चुना? क्या यह ‘जलन’ है, ‘असुरक्षा’ है या फिर किसी काबिल नेता से ‘डर’?
केंद्र ने बनाईं 7 टीमें
केंद्र सरकार ने सात ऑल-पार्टी डेलीगेशन (All Party Delegations) की सूची जारी की है, जिनके जरिए भारत दुनिया को ये संदेश देगा कि आतंकवाद को लेकर उसका रुख Zero Tolerance का है।
इन डेलीगेशन में 59 सदस्य हैं, जिनमें 31 नेता NDA से हैं, जबकि बाकी 20 विपक्षी दलों से। हर डेलीगेशन के साथ एक पूर्व राजनयिक भी शामिल रहेंगे, जो इंटरनेशनल डिप्लोमैसी को संतुलित दिशा देंगे।
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सातों प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ये सांसद करेंगे – बैजयंत जय पांडा (BJP MP), रवि शंकर प्रसाद (BJP MP), शशि थरूर (Congress MP), संजय कुमार झा (JDU MP), श्रीकांत शिंदे (Shiv Sena MP), कनीमोई करुणानिधि (DMK MP), सुप्रिया सुले (NCP – Sharad Pawar MP)।
ये प्रतिनिधिमंडल 32 देशों में जाएगा। इनमें यूरोपीय यूनियन का मुख्यालय बेल्जियम भी शामिल है। इनकी यात्रा 23 मई से शुरू होगी।



