

Gen Z Protests in Nepal Live
मरने वाले 22 हुए : काठमांडू और आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों (Gen Z Protests in Nepal) और पुलिस के बीच हिंसक झड़पों में अब तक 22 मौतें और 400 से अधिक घायल।
नेताओं के घरों पर हमले : प्रदर्शनकारियों (Gen Z Protests in Nepal) ने संसद भवन में आग लगा दी और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और कई मंत्रियों के घरों को जला दिया।
मंत्रियों की पिटाई : गुस्साए युवाओं (Gen Z Protests in Nepal) ने पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा को उनके घर में घुसकर पीटा। वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को काठमांडू में उनके घर के पास दौड़ा-दौड़ाकर मारा गया। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’, शेर बहादुर देउबा और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के घरों को भी आग के हवाले कर दिया।
भारतीय नागरिकों के लिए Advisory : भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने एडवाइजरी जारी कर कहा कि भारतीय फिलहाल नेपाल यात्रा न करें और जो लोग नेपाल में मौजूद हैं वे घरों से बाहर न निकलें। बढ़ते तनाव के बीच भारत ने नेपाल सीमा पर SSB की निगरानी बढ़ाई।
हवाई सेवाएं बाधित : काठमांडू का त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया। Air India और IndiGo समेत कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द कीं।
मंत्रियों के इस्तीफे : पीएम ओली के अलावा गृहमंत्री रमेश लेखक और कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी इस्तीफा दे दिया।
प्रधानमंत्री का इस्तीफा : नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने काठमांडू में भड़के हिंसक प्रदर्शनों और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच इस्तीफा दे दिया। इससे पहले संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरूंग ने कहा था कि प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं देंगे। सरकार ने सोशल मीडिया बैन (Social Media Ban in Nepal) हटाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया था। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने पीएम ओली के निजी निवास (बालकोट) के बाहर प्रदर्शन किया और घर को आग के हवाले कर दिया।
मंत्रियों की हवाई निकासी : राजधानी में बढ़ते विरोध को देखते हुए नेपाली सेना ने हेलीकॉप्टर की मदद से मंत्रियों को भैसेपाटी स्थित उनके सरकारी आवासों से सुरक्षित निकाला।
मंत्रियों के घरों पर हमला : प्रदर्शनकारियों (Gen Z Protests in Nepal) ने कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की। भैसेपाटी में एक मंत्री का घर भी जला दिया गया।
एयरपोर्ट बंद : लगातार हिंसा (Gen Z Protests in Nepal) और सुरक्षा संकट के चलते त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (TIA) को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। सभी उड़ानें स्थगित कर दी गईं।
नेपाल में जारी जन-जी (Gen Z Protests in Nepal) आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। सोमवार को सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 19 लोगों की मौत के बाद मंगलवार को हालात और बिगड़ गए। प्रदर्शनकारियों ने कई नेताओं के घरों पर हमला किया और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरूंग (Communication Minister Prithvi Subba Gurung) के निजी निवास को आग के हवाले कर दिया। इस बीच, सरकार ने भारी दबाव में आकर सोशल मीडिया बैन (Social Media Ban) को हटा लिया है।
आंदोलन क्यों भड़का? (Why Gen Z Protests in Nepal)
नेपाल सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स – फेसबुक (Facebook), व्हाट्सऐप (WhatsApp), एक्स (X) और इंस्टाग्राम (Instagram) – पर अस्थायी रोक लगा दी थी। सरकार का कहना था कि यह कदम कानून और अदालत के आदेश के तहत रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को लागू करने के लिए उठाया गया। लेकिन युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (Nepal PM KP Oli) ने स्वीकार किया कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल को रोकने का सरकार का कोई इरादा नहीं था। गलतफहमी और सूचना की कमी की वजह से यह स्थिति बनी।
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प्रदर्शन ने क्यों पकड़ा जोर?
सोमवार को संसद भवन की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों (Gen Z Protests in Nepal) पर पुलिस ने गोलियां चलाईं। इससे हालात और बिगड़ गए। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने फिर सड़कों पर उतरकर नेताओं के घरों पर हमला किया और मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरूंग (Prithvi Subba Gurung) के निवास को आग के हवाले कर दिया।
इस बीच, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी (Agriculture Minister Ram Nath Adhikari) ने इस्तीफा देकर सरकार की कार्रवाई की निंदा की।
पीएम ओली का रुख (PM Oli on Gen Z Protests)
प्रधानमंत्री ओली ने सर्वदलीय बैठक बुलाई और देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा,
‘आज की घटना से हुई मौतों पर मुझे गहरा दुख है। सरकार मृतकों के परिवारों को मुआवजा और घायलों को मुफ्त इलाज देगी। साथ ही 15 दिनों के भीतर एक जांच समिति रिपोर्ट पेश करेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।’
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दुनियाभर में चिंता
इस बीच, नेपाल में हुई हिंसा को लेकर अमेरिका (US), ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और फिनलैंड के दूतावासों ने संयुक्त बयान जारी कर गहरी चिंता जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं है। असली गुस्सा नेपाल में लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार (Corruption in Nepal), बेरोजगारी (Unemployment in Nepal) और युवाओं के सामने घटते अवसरों से जुड़ा हुआ है।



