
टेस्ला के सीईओ एलन मस्क हमेशा अपने बयानों और ट्वीट्स को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। इस बार उन्होंने जर्मनी में वायरल हुए एक वीडियो पर प्रतिक्रिया (Elon Musk on Muslim Migrants) दी है, जिसमें कुछ मुस्लिम प्रवासी (Germany Migrants Video) खुले तौर पर यह कहते दिख रहे हैं कि ‘जब हम बहुसंख्यक होंगे तो जर्मन कानून की जगह (Sharia Law) लागू किया जाएगा।’
इस पर मस्क ने सिर्फ तीन शब्दों में लिखा – I believe him, यानी मुझे उस पर भरोसा है। मस्क का बयान कटाक्ष है कि वाकई एक दिन मुस्लिम प्रवासी जर्मनी का कानून बदल देंगे। इस बयान (Elon Musk on Muslim Migrants) के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई है।
जर्मनी में शरिया कानून की चेतावनी (Sharia Law in Germany)
वायरल वीडियो में एक प्रवासी कहता दिखा, ‘हर मुसलमान को पूरी दुनिया में शरिया चाहिए। मैं जर्मनी में शरिया चाहता हूं। जब हम बहुसंख्यक होंगे तो जर्मन कानून खत्म कर देंगे और शरिया कानून लागू करेंगे। जो भी इसका विरोध करेगा, उस पर हमला होगा। ईसाइयों और यहूदियों को या तो इस्लाम कबूल करना होगा या देश छोड़ना होगा।’
मस्क का सीधा जवाब (Elon Musk on Muslim Migrants) यह दिखाता है कि वे इस खतरे को हल्के में नहीं ले रहे हैं।
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पाकिस्तानियों पर भी बोले थे मस्क (Elon Musk on Pakistanis)
यह पहली बार नहीं है जब मस्क ने ऐसा मुद्दा उठाया हो। हाल ही में उन्होंने एक और वीडियो पर प्रतिक्रिया (Elon Musk on Muslim Migrants) दी थी, जिसमें एक पाकिस्तानी प्रवासी (Pakistanis in Europe) डेनमार्क के एक व्यक्ति से कह रहा था, ‘हम 5 बच्चे पैदा कर रहे हैं और तुम सिर्फ 1-2। अगले 10-15 साल में डेनमार्क में पाकिस्तानी तुमसे ज्यादा होंगे। जल्द ही तुम खत्म हो जाओगे। देखो स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड – हम लाखों में हैं।’
मस्क ने इस पर लिखा था – His math is correct यानी उसकी गणित सही है।
मस्क ने क्यों कहा सही बात? (Elon Musk Truth on Demographics)
मस्क का यह बयान (Elon Musk on Muslim Migrants) बिल्कुल सही है क्योंकि यूरोप के कई देशों में Demographic Change साफ दिखाई दे रहा है। मुस्लिम प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वहां के लोकल नागरिकों की जनसंख्या घट रही है।
यूरोप की पारंपरिक पहचान और कानून पर दबाव बढ़ रहा है।
जर्मनी, डेनमार्क, स्वीडन, नार्वे जैसे देशों में यह एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। एलन मस्क का कहना है कि अगर इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो भविष्य में यूरोप का कल्चर पूरी तरह बदल सकता है।
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क्या कहते हैं आंकड़े
2020 में यूरोप की कुल आबादी लगभग 75.3 करोड़ थी। इसमें से लगभग 4.6 करोड़ लोग मुस्लिम थे, यानी लगभग 6% हिस्सेदारी। 2010 से 2020 के बीच, मुस्लिम आबादी में लगभग 16% की वृद्धि हुई है। इस दौरान ईसाइयनों की संख्या घटकर 67% हो गई, जबकि धर्मनिरपेक्ष लोग बढ़कर 25% हो गए।
2010–2016 के मध्य, लगभग 70 लाख लोग यूरोप आए। इनमें से लगभग 37 लाख मुस्लिम थे और बाकी गैर-मुस्लिम। यानी नए आने वालों में 53% से अधिक मुसलमान।
सीरिया, अफगानिस्तान और इराक से आने वाले अधिकांश शरणार्थी मुस्लिम थे। जर्मनी ने अकेले लगभग 12 लाख शरणार्थियों में से 78% मुस्लिम स्वीकार किए।
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2050 में क्या होगा यूरोप का हाल
अनुमान है कि मध्यम माइग्रेशन की सूरत में यूरोपीय मुस्लिम आबादी 10–15% तक बढ़ सकती है।
उच्च माइग्रेशन स्थिति में कुछ देशों में यह 20–30% तक चला जाएगा। यह खतरा ब्रिटेन, स्वीडन और नार्वे पर ज्यादा मंडरा रहा है।
आंकड़े साफ दिखाते हैं कि यूरोप में मुस्लिम आबादी न केवल बढ़ रही है, बल्कि उच्च जन्म दर के कारण जनसंख्या संरचना बदल रही है।
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