
Iran Rejects US Ceasefire : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब कहा कि वह पांच दिनों तक वह ईरान के एनर्जी ठिकानों को निशाना नहीं बनाएंगे और तेहरान के साथ बातचीत चल रही है, तो दुनिया ने कुछ राहत की सांस ली, लेकिन अब लग रहा है कि ऐसी कोई बात हुई ही नहीं थी। ईरान के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल Ebrahim Zolfaghari ने अमेरिका की शांति पहल का खुलेआम मजाक उड़ाते हुए साफ कर दिया कि तेहरान फिलहाल किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है।
सरकारी टीवी पर दिए गए बयान में जोलफाघरी ने ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत जारी है। ईरानी प्रवक्ता ने तीखे अंदाज में कहा कि क्या आपकी आंतरिक समस्याएं इतनी बढ़ गई हैं कि आप खुद से ही बातचीत कर रहे हैं (Iran Rejects US Ceasefire)?
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हम जैसे लोग आप जैसे लोगों के साथ कभी समझौता नहीं कर सकते। न अभी, न कभी। उन्होंने कहा कि जिस रणनीतिक शक्ति की बात वॉशिंगटन करता था, वह अब रणनीतिक विफलता में बदल चुकी है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका अपनी हार को समझौते के रूप में पेश करने की कोशिश न करे।
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पीस प्लान पर ठंडा रुख (Iran Rejects US Ceasefire)
अमेरिका ने हाल ही में 15 बिंदुओं वाला एक शांति प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे पाकिस्तान के माध्यम से तेहरान तक पहुंचाया गया। पाकिस्तान ने बातचीत की मेजबानी की पेशकश भी की, लेकिन ईरान के ताजा रुख से साफ है कि इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की संभावना बेहद कम है (Iran Rejects US Ceasefire)।
ईरान पहले ही कह चुका है कि पिछले दो सालों में उच्च-स्तरीय वार्ताओं के दौरान अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के कारण वह अब भरोसा नहीं कर सकता।
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत Reza Amiri Moghadam ने बुधवार को स्पष्ट कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच न तो सीधे और न ही किसी तीसरे देश के जरिए कोई बातचीत हुई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे हालात में यह सामान्य बात है कि दोस्ताना देश दोनों पक्षों से संपर्क में रहते हैं और तनाव कम करने की कोशिश करते हैं (Iran Rejects US Ceasefire)।
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हजारों मौतें, मंदी का डर
चार हफ्तों से जारी इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है। हालात इतने गंभीर हैं कि इसे इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकटों में से एक माना जा रहा है। खासकर Strait of Hormuz के आसपास की हलचल ने दुनिया भर के तेल बाजार को हिला दिया है।
तेल की कीमतों में तेजी आई है और वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा गहरा गया है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यहां ऊर्जा आयात पर भारी निर्भरता है।
अमेरिका की सैन्य तैयारी तेज
कूटनीति के कमजोर पड़ते ही अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। पेंटागन ने दो मरीन यूनिट्स को तैनात किया है, जिसमें करीब 5,000 सैनिक और हजारों नौसैनिक शामिल हैं। इस बीच हवाई हमले और मिसाइल अटैक लगातार जारी हैं।



