

Iran US ceasefire conditions : अमेरिका और ईरान ने जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या की थी, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि लड़ाई इतनी लंबी खिंच जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब समझौते की बात की है, पर उसमें 15 सूत्रीय शर्तें हैं।
खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। हालांकि ईरानी सेना का दावा है कि ईरान की तरफ से कोई बातचीत नहीं की जा रही है। हालांकि ईरान ने अपनी भी कड़ी शर्तें रख दी हैं (Iran US ceasefire conditions)।
ईरान की मांग (Iran US ceasefire conditions)
ईरान की सबसे बड़ी मांग यह है कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपने सभी सैन्य ठिकानों को बंद करे और ईरान पर हुए हमलों के लिए मुआवजा दे। इसके अलावा ईरान चाहता है कि उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं, क्योंकि यही उसकी अर्थव्यवस्था पर सबसे बड़ा दबाव बना रहे हैं।
ईरान की एक और अहम मांग Strait of Hormuz से जुड़ी है। वह चाहता है कि इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से वह शुल्क वसूले। ठीक उसी तरह जैसे स्वेज नहर पर होता है।
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इसके अलावा, ईरान ने साफ कर दिया है कि उसका मिसाइल प्रोग्राम किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं होगा। वह अपने क्षेत्रीय सहयोगियों, जैसे हिजबुल्ला पर हमले बंद करने की भी मांग कर रहा है (Iran US ceasefire conditions)।
तेहरान इस बात की गारंटी चाहता है कि भविष्य में युद्ध दोबारा नहीं शुरू होगा।
अमेरिका की मांग
अमेरिका का 15-पॉइंट प्रस्ताव दिखने में शांति की दिशा में एक कदम लगता है, लेकिन इसकी शर्तें ईरान के लिए बेहद कड़ी हैं (Iran US ceasefire conditions)।
सबसे पहले, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु हथियार बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म करे। इसके तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन बंद करना होगा और अपने पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में देना होगा।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी International Atomic Energy Agency (IAEA) करेगी। साथ ही ईरान को अपने प्रमुख परमाणु केंद्र, जैसे Natanz Nuclear Facility, Fordow Fuel Enrichment Plant और Isfahan Nuclear Technology Center को खत्म या अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में देना होगा।
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अमेरिका यह भी चाहता है कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को सीमित करे और इसे केवल आत्मरक्षा तक ही रखे। साथ ही, ईरान को अपने प्रॉक्सी ग्रुप्स, जैसे हमास और हिजबुल्ला को समर्थन देना बंद करना होगा (Iran US ceasefire conditions)।
इसके बदले में अमेरिका ने ईरान को प्रतिबंधों से राहत और सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में सहयोग देने का प्रस्ताव रखा है।
पाकिस्तान को बनाया मध्यस्थ
अमेरिका ने यह प्रस्ताव(Iran US ceasefire conditions) पाकिस्तान के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया है, जो इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है। असीम मुनीर और शहबाज शरीफ ने भी इस पहल का समर्थन किया है।
लेकिन समस्या यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की नीयत पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। ईरान पहले ही कह चुका है कि अमेरिका ने पिछले वर्षों में बातचीत के दौरान भी हमले किए, इसलिए उस पर भरोसा करना मुश्किल है।
इसके अलावा दोनों पक्षों की कुछ मांगों (Iran US ceasefire conditions) में आपस में टकराव है। ईरान अपने मिसाइल और सैन्य नेटवर्क को छूना नहीं चाहता, जबकि अमेरिका इस पर लगाम लगाना चाहता है। हिजबुल्ला पर अगर अमेरिका मान भी जाता है, तो शायद इस्राइल न माने।



