
Is America going to attack Iran : ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद भारतीयों को तुरंत निकल जाने के लिए एडवाइजरी जारी की है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण यह इलाका कभी भी युद्ध की चपेट में आ सकता है।
भारतीय दूतावास ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि सभी लोग – स्टूडेंट्स, धार्मिक यात्री, बिजनेसमैन और टूरिस्ट, ईरान को छोड़कर निकल जाएं। इससे पहले जनवरी की शुरुआत में इसी तरह की एडवाइजरी जारी की गई थी। तब पूरे ईरान में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और अमेरिका ने धमकी दी थी कि वह हमला कर सकता है।
दूतावास ने आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं- +989128109115, 989128109109, 989128109102, 989932179359।
खाड़ी में खतरनाक होता माहौल (Is America going to attack Iran)
फारस की खाड़ी में इस समय माहौल सामान्य नहीं है। अमेरिका ने बड़ी संख्या में फाइटर जेट, एयरक्राफ्ट कैरियर, क्रूजर और पनडुब्बियां इलाके में भेजी हैं। कई लड़ाकू विमानों के साथ एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर भी मध्य-पूर्व की ओर जाते देखे गए हैं। आम तौर पर ऐसा तब होता है जब लंबी दूरी की सैन्य कार्रवाई की तैयारी हो। इसलिए यह तैनाती सिर्फ दिखावे की नहीं लगती।
तनाव का सबसे बड़ा केंद्र है Strait of Hormuz। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। अगर यहां हलचल बढ़ती है, तो उसका असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ईरान ने इस इलाके में नौसैनिक अभ्यास तेज किए हैं और कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद भी किया है। इससे भी संकेत मिल रहा कि कुछ बड़ा होने वाला है (Is America going to attack Iran)।
बातचीत के बीच युद्ध की तैयारी
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी चल रही है। मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कह चुके हैं कि अगर ईरान अमेरिकी शर्तें नहीं मानेगा, तो ताकत का इस्तेमाल किया जा सकता है (Is America going to attack Iran)। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद कर दे।
इस मामले में इस्राइल भी चिंतित है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu लंबे समय से कह रहे हैं कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें इस्राइल के लिए खतरा हैं। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसकी मिसाइलें उसकी सुरक्षा के लिए हैं और वह उन्हें खत्म नहीं करेगा।
अमेरिका यह भी चाहता है कि ईरान हिज्बुल्लाह और हूती जैसे समूहों को समर्थन देना बंद करे। लेकिन ईरान का कहना है कि ये अलग क्षेत्रीय मुद्दे हैं और बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम पर होनी चाहिए। बदले में वह अमेरिका से आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहा है। साफ है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।
अगर सैन्य टकराव (Is America going to attack Iran) होता है, तो उसका असर बहुत बड़ा हो सकता है। पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकाने और इस्राइल दोनों निशाने पर आ सकते हैं। हजारों अमेरिकी सैनिक पहले से वहां तैनात हैं।
ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को पद से हटाना चाहते हैं। दिसंबर में जब ईरान में प्रदर्शन भड़के थे, तब भी ट्रंप चाहते थे कि खामेनेई का तख्ता पलट दिया जाए। वह युद्ध के जरिये (Is America going to attack Iran) मकसद पाना चाहते हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने ट्रंप को पहले ही बता दिया है कि हमले से ईरान में सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य पूरा होने की गारंटी नहीं है।
एशिया के शिकारी के डर से ऑस्ट्रेलिया ने बनाई सबसे बड़ी दीवार



