

कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें सभी थिएटर और मल्टीप्लेक्स में सिनेमा टिकट की अधिकतम कीमत 200 रुपये तय की गई थी (Movie ticket price cap)। मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, फिल्म प्रोड्यूसर्स और थिएटर मालिकों ने सरकार के नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। इस पर जस्टिस रवि वी. होसमणि की बेंच ने यह अंतरिम आदेश दिया है।
मामला क्या है?
मार्च 2025 के बजट भाषण में कर्नाटक सरकार ने घोषणा की थी कि जनता के हित में फिल्मों के टिकट की कीमत 200 रुपये से अधिक नहीं होगी (Movie ticket price cap)। इसके लिए Karnataka Cinemas (Regulation) Amendment Rules, 2025 का ड्राफ्ट भी जारी किया गया।
सरकार का कहना था कि यह कदम पब्लिक इंटरेस्ट में है और सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्यों को टिकट दरें नियंत्रित करने का अधिकार दे चुका है। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों का तर्क था कि यह नियम मनमाना है और इसका कोई डेटा-बेस्ड आधार नहीं है।
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फिल्म इंडस्ट्री की दलीलें
मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि इतनी बड़ी लागत से मल्टीप्लेक्स बनाए जाते हैं। ऐसे में सरकार यह तय नहीं कर सकती कि टिकट सिर्फ 200 रुपये में ही बेचे जाएं (Movie ticket price cap)। अगर ऐसा है तो फिर सभी एयरलाइंस को भी केवल इकॉनमी क्लास में उड़ना चाहिए।
थिएटर मालिकों ने भी दलील दी कि टिकट की कीमत (Movie ticket price cap) दर्शक और प्रदर्शक के बीच का निजी अनुबंध है, इसमें सरकार को दखल नहीं देना चाहिए।
क्या भारत में फिल्म टिकट महंगे हैं?
भारत में सिनेमा टिकटों की कीमत शहर, लोकेशन और सिनेमा हॉल के प्रकार पर निर्भर करती है।
मेट्रो शहरों (मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु) में मल्टीप्लेक्स टिकट 250 से 700 रुपये तक पहुंच जाते हैं, जबकि IMAX या प्रीमियम स्क्रीनिंग में यह 1,000 रुपये से भी ज्यादा हो सकते हैं।
छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन थिएटर में टिकट 100 से 200 रुपये तक मिल जाते हैं।
अगर हम भारत की तुलना दूसरे देशों से करें तो तस्वीर दिलचस्प है।
अमेरिका में एक मूवी टिकट की औसत कीमत 11 से 15 डॉलर (लगभग 900–1200 रुपये) होती है। यूके में 8 से 12 पाउंड यानी लगभग 850–1200 रुपये।
चीन में मूवी टिकट 50–80 युआन (Movie ticket price cap) का पड़ता है। भारतीय रुपये में बदलें तो 600–900 रुपये।
देखा जाए तो भारत में औसतन टिकट (Movie ticket price cap) अब भी अमेरिका और यूरोप से सस्ते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि भारत में अमीर और मिडिल क्लास दर्शकों के बीच टिकट प्राइसिंग का गैप बहुत ज्यादा है।
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