LPG Sankat : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को हिला दिया है। खासतौर पर Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव ने पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ा है। इसी बीच भारत सरकार ने रसोई गैस संकट से निपटने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ‘प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026’ जारी किया है, जिसके तहत अब शहरी इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को प्राथमिकता दी जाएगी और कई जगहों पर इसे अनिवार्य भी बना दिया गया है। यह कदम एलपीजी संकट (LPG Sankat) की वजह से उठाया गया है।
क्या है सरकार का नया आदेश?
सरकार के नए नियम के मुताबिक, जिन क्षेत्रों में PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां रहने वाले लोगों के लिए PNG कनेक्शन लेना जरूरी होगा। अगर कोई उपभोक्ता ऐसा नहीं करता है, तो अधिकृत एजेंसी द्वारा सूचना दिए जाने के तीन महीने बाद उसकी LPG (सिलेंडर) आपूर्ति बंद कर दी जाएगी।
यह कदम सीधे तौर पर LPG की बचत और उसके बेहतर वितरण से जुड़ा है (LPG Sankat)।
सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण गैस और तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। खाड़ी देशों में गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावटों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर (LPG Sankat) कर दिया है।
ऐसे में भारत ईंधन के विकल्प बढ़ाने की नीति पर तेजी से काम कर रहा है। इसका मकसद यह है कि जहां पाइपलाइन मौजूद है, वहां PNG का इस्तेमाल बढ़े और LPG सिलेंडर उन इलाकों में भेजे जा सकें जहां पाइपलाइन पहुंचाना मुश्किल है।
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हाउसिंग सोसाइटी नहीं माने तो क्या होगा?
सरकार ने हाउसिंग सोसाइटी की मनमानी पर भी रोक लगा दी है। अब सोसाइटी को गैस पाइपलाइन बिछाने की अनुमति तीन कार्य दिवसों के भीतर देनी होगी और 48 घंटे में अंतिम कनेक्टिविटी सुनिश्चित करनी होगी।
अगर कोई सोसाइटी अनुमति देने से मना करती है, तो उसे नोटिस जारी किया जाएगा। इसके तीन महीने बाद पूरे कॉम्प्लेक्स की LPG सप्लाई बंद कर दी जाएगी। विवाद सुलझाने के लिए अधिकारियों को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां भी दी गई हैं।
कंपनियों और एजेंसियों के लिए क्या नियम हैं?
सरकार ने सिर्फ उपभोक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि गैस कंपनियों और सरकारी एजेंसियों पर भी सख्त समय-सीमा तय की है।
तय समय में अनुमति नहीं मिलने पर मंजूरी स्वतः मानी जाएगी। गैस कंपनियों को चार महीने के भीतर काम शुरू करना होगा और देरी होने पर जुर्माना या लाइसेंस खत्म होने का खतरा है। इन कदमों से एलपीटी संकट (LPG Sankat) से निपटने में मदद मिलेगी।
इन सभी नियमों की निगरानी Petroleum and Natural Gas Regulatory Board (PNGRB) करेगा।
अगर PNG देना संभव नहीं हो तो?
सरकार ने इसमें लचीलापन भी रखा है। अगर किसी घर तक तकनीकी कारणों से PNG पहुंचाना संभव नहीं है, तो संबंधित गैस कंपनी एक NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी करेगी। ऐसे में उस उपभोक्ता की LPG सप्लाई बंद नहीं होगी। इससे उसे गैस की परेशानी (LPG Sankat) नहीं होगी।
PNG अपनाने के फायदे क्या हैं?
PNG को LPG के मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है। यह सीधे पाइपलाइन से किचन तक पहुंचती है, जिससे बार-बार सिलेंडर बुक करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा यह एक निरंतर और सुरक्षित आपूर्ति का विकल्प है।
सरकार का यह कदम सिर्फ एक अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल के मुताबिक, यह संकट भारत के लिए एक अवसर भी बन सकता है।
इस फैसले से गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार होगा, दूरदराज के इलाकों में LPG की उपलब्धता बढ़ेगी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक संकटों (LPG Sankat) का असर कम होगा।



