Mohini Ekadashi : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। साल भर में आने वाली 24 एकादशियों में मोहिनी एकादशी का विशेष स्थान है। यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी मन को शुद्ध करने और जीवन में संतुलन लाने का अवसर देता है।
मान्यता है कि इस दिन (Mohini Ekadashi) भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति आती है।
अप्रैल महीने में आने वाली यह एकादशी वैशाख शुक्ल पक्ष की ग्यारस को पड़ती है और इसे विशेष पुण्य देने वाली तिथि माना जाता है।
मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) कब है?
मोहिनी एकादशी का व्रत सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।
- पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि प्रारंभ : 26 अप्रैल 2026, शाम 6:06 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त : 27 अप्रैल 2026, शाम 6:15 बजे
उदयातिथि के आधार पर व्रत 27 अप्रैल को ही रखा जाएगा।
पारण का समय
- 28 अप्रैल 2026, सुबह 05:43 बजे से 08:21 बजे तक
- द्वादशी तिथि समाप्त : 28 अप्रैल 2026, शाम 06:51 बजे
धार्मिक मान्यता के अनुसार सही समय पर पारण करना बहुत आवश्यक होता है, तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
यह भी पढ़ें : Cooler vs AC fact : क्या चूना और नमक वाली बर्फ से कूलर AC जैसा ठंडा होता है?
मोहिनी एकादशी का नाम कैसे पड़ा? (Mythology Behind Mohini Ekadashi)
पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत को लेकर विवाद हुआ, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। इस रूप में उन्होंने असुरों को भ्रमित करके देवताओं को अमृत पिला दिया।
इसी दिव्य घटना की स्मृति में इस एकादशी को मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) कहा जाता है। यह व्रत प्रतीक है मोह, भ्रम और नकारात्मकता से मुक्ति का।
धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया व्रत हजारों यज्ञों के बराबर फल देता है। भगवान विष्णु की पूजा से जीवन के कष्ट कम होते हैं। मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) से पुराने कर्मों के दोष कम होते हैं और जीवन में नई शुरुआत के अवसर बनते हैं।
मोहिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि
मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) के दिन पूजा बहुत सरल लेकिन श्रद्धा से की जाती है।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
पूजा में ये चीजें अर्पित करें – पीले वस्त्र, तुलसी दल, पीले फूल, फल और पंचामृत।
इसके बाद ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करें या ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
इस दिन केवल भोजन त्याग ही नहीं, बल्कि व्यवहार और विचारों की शुद्धि भी जरूरी मानी जाती है।
ध्यान रखें कि मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) पर सात्विक भोजन करें। क्रोध, झूठ और अपमान से बचें। नकारात्मक सोच से दूर रहें और जरूरतमंदों को दान करें।
अगले दिन द्वादशी पर ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराकर व्रत का पारण करें।



