
North Korea : जब पहली नजर में आप इस फोन को देखेंगे, तो लगेगा जैसे कोई आम स्मार्टफोन हो। लेकिन आज के दौर में यह नागरिक जासूसी का सबसे बड़ा हथियार है। साल 2024 के अंत में उत्तर कोरिया (North Korea) से बाहर लाई गई इस डिवाइस की असलियत रोंगटे खड़े कर देती है।
यह फोन असल में तकनीक की आड़ में तैयार किया गया बेहद खतरनाक निगरानी यंत्र है। इसका मकसद लोगों को दुनिया से जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें किम जोंग उन की विचारधारा के बाड़े में कैद रखना है।
इस फोन में इंटरनेट तक सीधी पहुंच नहीं है। इसमें एक सॉफ्टवेयर हर 5 मिनट में स्क्रीन का स्क्रीनशॉट खींचता है और यूजर को बिना बताए उत्तर कोरिया (North Korea) की सरकार के पास भेज देता है।
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अगर कोई यूजर सिस्टम को बायपास करने की कोशिश करता है, तो उसे अपराध माना जाता है। हर टाइप किया गया शब्द एक सरकारी फिल्टर से गुजरता है, जो उसे उत्तर कोरियाई सरकार के प्रोपेगेंडा में ढाल देता है।
यानी यह डिवाइस यूजर के लिखे शब्दों को सरकारी भाषा में बदल देती है।
North Korea में डिजिटल विद्रोह
अच्छी बात यह है कि तस्वीर पूरी तरह काली नहीं है। कुछ जुझारू उत्तर कोरियाई युवा, खासकर जो किम इल सुंग यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़े हैं, इन फोनों को जेलब्रेक करने में लगे हुए हैं। वे यूएसबी और विंडोज पीसी की मदद से ऐसे सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करते हैं जो सेंसरशिप को तोड़ देता है।
इस विद्रोह का मुख्य मकसद होता है साउथ कोरियन ड्रामा, K-pop और अन्य प्रतिबंधित चीजों तक पहुंच बनाना।
दरअसल उत्तर कोरिया (North Korea) में दक्षिण कोरिया की कला, संस्कृति, फिल्मों, गानों को सांस्कृतिक दुश्मन की तरह देखा जाता है। यहां एक दक्षिण कोरियाई गाना या टीवी शो देखना देशद्रोह है।
दक्षिण कोरिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक 22 साल के युवक को केवल के-पॉप सुनने और शेयर करने के जुर्म में सार्वजनिक रूप से गोली मार दी गई थी।
इसके बावजूद बॉर्डर पार से फल के डिब्बों में USB छिपाकर भेजी जाती है, जिनमें साउथ कोरियन ड्रामा और गाने होते हैं।
जेलब्रेक एक नई अंडरग्राउंड इंडस्ट्री
इतने जोखिम के बावजूद कुछ युवा इस कैद को तोड़ने में लगे हैं। कुछ हैकर्स तो बाकायदा सर्विस के रूप में यह सुविधा भी देने लगे हैं। वे दूसरों के फोन से सेंसरशिप हटा देते हैं।
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दक्षिण कोरियाई सरकार ने इन ‘फोन मैनिपुलेशन प्रोग्राम्स’ के खिलाफ नए कानून बनाए हैं। इससे पता चलता है कि उसे बगावत की भनक लग चुकी है।
इतनी टेक्नोलॉजी उत्तर कोरिया (North Korea) ला कहां से रहा है?
संयुक्त राष्ट्र ने 2017 में उत्तर कोरिया (North Korea) पर मोबाइल हार्डवेयर के आयात पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन इसके बावजूद वहां करीब 60 लाख लोग मोबाइल चला रहे हैं। एक बेसिक फोन की कीमत $100-$400 तक होती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन फोन में ताइवान के चिप्स, चीन की बैटरी और बदला हुआ एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम होता है। इन्हें अक्सर चीनी कंपनियां जैसे Gionee तैयार करती हैं, हालांकि कंपनियां उत्तर कोरिया (North Korea) से डायरेक्ट व्यापार से इनकार करती हैं।
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किम जोंग उन खुलेआम इन मोबाइल नेटवर्क्स की तारीफ करते हैं और मोबाइल फैक्ट्रियों के टूर पर जाते हैं। इन फोन के जरिए न सिर्फ निगरानी होती है, बल्कि यह सरकार के लिए एक काला व्यापार भी बन चुका है।
दक्षिण कोरिया के एकीकृत मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि किम जोंग उन के राज में सेंसरशिप और भी सख्त हो गई है। अधिकारियों को खास तौर पर प्रशिक्षित किया गया है कि वे लोगों के फोन में दक्षिण कोरियाई slang, गाने या फिल्मों की जांच कर सकें।



