
वैदिक पंचांग के अनुसार बुधवार, 25 फरवरी को रोहिणी व्रत (Rohini Vrat) रखा जाएगा। यह पावन व्रत भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित है। इस दिन श्रद्धालु भक्तिभाव से पूजा करते हैं और व्रत रखकर सुख, शांति और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया रोहिणी व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
रोहिणी व्रत (Rohini Vrat) शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी 25 फरवरी को रोहिणी व्रत मनाया जाएगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु इस समय के भीतर या अपनी सुविधा अनुसार दिन में पूजा कर सकते हैं।
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रोहिणी व्रत (Rohini Vrat) पर बन रहे शुभ योग
इस बार रोहिणी व्रत (Rohini Vrat) पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं, जो इसे और भी विशेष बना रहे हैं।
सर्वार्थ सिद्धि योग
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस योग में पूजा-पाठ और शुभ कार्य करने से सफलता, सिद्धि और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
रवि योग
रवि योग दोपहर 1 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर रात भर रहेगा। इस योग में भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा करने से आरोग्य, करियर और व्यापार में लाभ मिलने की मान्यता है।
शिववास योग
फाल्गुन शुक्ल नवमी को शिववास योग भी बन रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव कैलाश पर माता पार्वती के साथ विराजमान रहते हैं। इस योग में पूजा-अभिषेक करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
रोहिणी व्रत (Rohini Vrat) पूजा विधि
रोहिणी व्रत (Rohini Vrat) के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठें और घर की साफ-सफाई करें। स्नान कर गंगाजल युक्त जल से शुद्धि करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
अब पंचोपचार विधि से भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा करें। उन्हें फल, फूल और नैवेद्य अर्पित करें। अंत में आरती कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।
रोहिणी व्रत (Rohini Vrat) का महत्व
ज्योतिषियों के अनुसार, फाल्गुन माह का रोहिणी व्रत विशेष फलदायी होता है। सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और शिववास जैसे शुभ संयोगों में की गई पूजा से जीवन में खुशहाली, सफलता और मानसिक शांति मिलती है।
यदि आप अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन चाहते हैं, तो इस रोहिणी व्रत (Rohini Vrat) पर श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान वासुपूज्य स्वामी की आराधना अवश्य करें।



