
उत्तर प्रदेश का आदिवासी बहुल जिला सोनभद्र (Uranium Oxide in Sonbhadra) अब भारत की ऊर्जा क्रांति में बड़ी भूमिका निभा सकता है। यहां म्योरपुर ब्लॉक के नकटू क्षेत्र में वैज्ञानिकों को यूरेनियम ऑक्साइड का बड़ा भंडार मिलने के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं।
अनुमान है कि यहां करीब 785 टन यूरेनियम ऑक्साइड मौजूद है। यह खोज इसलिए अहम है क्योंकि यूरेनियम-308 श्रेणी का यह अयस्क सीधे परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडी) पिछले पांच सालों से सोनभद्र में खोज (Uranium Oxide in Sonbhadra) और परीक्षण का काम कर रहा है। अब तक के सर्वेक्षण से पता चला है कि जिले में कई जगहों पर यूरेनियम की अच्छी-खासी उपलब्धता है। खासतौर पर नकटू, कूदरी, अंजनगिरा, बीजपुर और दुद्धी-म्योरपुर के बीच के इलाके प्रमुख माने जा रहे हैं। रिहंद डैम और उसके तटवर्ती क्षेत्रों से लेकर झारखंड-छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे इलाके तक कुल 32 स्थलों पर यूरेनियम की मौजूदगी की संभावना जताई गई है।
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दरअसल, जुलाई 2025 में केंद्र सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें बताया गया कि 12 राज्यों के 47 स्थलों पर लगभग 4.33 लाख टन यूरेनियम ऑक्साइड के भंडार की पुष्टि हुई है। इनमें झारखंड, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और मेघालय जैसे राज्य शामिल हैं। अब सोनभद्र (Uranium Oxide in Sonbhadra) का नाम भी इस सूची में जुड़ गया है, जिससे उत्तर प्रदेश पहली बार परमाणु ईंधन उत्पादन की दौड़ में शामिल हो सकता है।
सोनभद्र पहले से ही कोयले के बड़े भंडार और थर्मल पावर प्लांट्स के लिए जाना जाता है। अब यहां यूरेनियम की संभावनाओं के उजागर होने से उम्मीद की जा रही है कि यह जिला आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा का भी हब बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यहां मिले यूरेनियम भंडार का वाणिज्यिक स्तर पर दोहन शुरू हो गया, तो न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि सरकार के न्यूक्लियर एनर्जी मिशन को भी नई गति मिलेगी।
भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है और इसके लिए ऊर्जा क्षेत्र की आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है। ऐसे में सोनभद्र का यह खोज अभियान (Uranium Oxide in Sonbhadra) केवल एक खनन परियोजना नहीं है, बल्कि भारत के भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम है।
कितनी बड़ी खोज है यह?
- भारत में अभी परमाणु ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है और हमें कई बार आयात (Import of Uranium) पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में 785 टन यूरेनियम ऑक्साइड का मिलना अपने आप में बड़ी बात है।
- यह ऊर्जा आत्मनिर्भरता (Energy Self-Reliance) की दिशा में एक मजबूत कदम होगा।
- अगर आगे और रिजर्व मिले तो भारत की परमाणु बिजली उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।
- यह खोज (Uranium Oxide in Sonbhadra) केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक विकास की नई संभावनाओं को जन्म देगी।
- सोनभद्र आदिवासी बहुल और पिछड़ा इलाका है। यहां यूरेनियम खनन से रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
- भारत के परमाणु मिशन को स्थानीय स्तर पर मजबूत आधार मिलेगा।
भारत में कहां-कहां हैं यूरेनियम के भंडार?
जुलाई 2025 तक की AMD रिपोर्ट के मुताबिक देश के 12 राज्यों में 47 जगहों पर यूरेनियम ऑक्साइड के बड़े भंडार की पुष्टि हुई है।
इसमें कुल अनुमानित भंडार 4,33,800 टन बताया गया है। झारखंड (जादूगोड़ा), राजस्थान (उदईपुर), आंध्र प्रदेश (तुम्मलापल्ली), मेघालय, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ पहले से यूरेनियम खनन के लिए जाने जाते हैं। अब सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) का नाम भी इस सूची (Uranium Oxide in Sonbhadra) में शामिल हो सकता है।
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