

यह नारा इस ओर इशारा करता है कि नेपाल में राजशाही की वापसी की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। दिलचस्प बात यह है कि जिस Gen Z ने इस बार सत्ता परिवर्तन की बागडोर संभाली, उसी पीढ़ी से नेपाल का एक शाही चेहरा भी सुर्खियों में आ गया है – हृदयेंद्र शाह (Nepal Prince Hridayendra Shah)।
शाही परिवार का सबसे युवा चेहरा
हृदयेंद्र शाह (Nepal Prince Hridayendra Shah) नेपाल के शाही परिवार के सबसे युवा पुरुष सदस्य हैं। उन्हें कभी ‘नव युवराज’ की उपाधि दी गई थी, हालांकि 2008 में जब नेपाल गणराज्य बना और 240 साल पुरानी राजशाही खत्म हुई, तब यह उपाधि भी इतिहास का हिस्सा बन गई।
हृदयेंद्र (Nepal Prince Hridayendra Shah) का जन्म 30 जून 2002 को काठमांडू के मशहूर नारायणहिती पैलेस में हुआ। उनका जन्म उस दौर के तुरंत बाद हुआ जब 2001 में शाही परिवार पर भीषण नरसंहार ने सबको झकझोर दिया था। शायद इसी वजह से आज राजतंत्र समर्थक लोग उनमें एक नई उम्मीद देखते हैं।
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दादा ज्ञानेंद्र ने बनाया था उत्तराधिकारी
हृदयेंद्र (Nepal Prince Hridayendra Shah) के दादा और नेपाल के अंतिम राजा ज्ञानेंद्र शाह ने उन्हें बचपन में ही भावी उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। यह फैसला खास इसलिए माना गया क्योंकि उन्होंने अपने बेटे पारस शाह को दरकिनार कर सीधे पोते हृदयेंद्र को वारिस बनाया। माना जाता है कि पारस की खराब छवि और विवादित जीवनशैली की वजह से यह फैसला लिया गया था।
हृदयेंद्र शाह (Nepal Prince Hridayendra Shah) पूर्व प्रिंस पारस शाह और हिमानी शाह के बेटे हैं। उनकी दो बहनें हैं – पूर्णिका शाह और कृतिका शाह। शुरुआती पढ़ाई काठमांडू के लिंकन स्कूल से करने के बाद उन्होंने विदेश का रुख किया। फिलहाल वह अमेरिका के बोस्टन में मास्टर्स कर रहे हैं। उनका बचपन और युवावस्था का एक बड़ा हिस्सा सिंगापुर और थाईलैंड में गुजरा। कहा जाता है कि यह फैसला उन्हें सुरक्षा और नेपाली राजनीति से दूर रखने के लिए लिया गया था।
नेपाल में हृदयेंद्र (Nepal Prince Hridayendra Shah) अक्सर सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहते हैं, लेकिन सोशल मीडिया, खासकर Instagram पर एक्टिव हैं। पिछली बार वे अपनी मां हिमानी शाह के साथ हिमानी ट्रस्ट के एक कार्यक्रम में दिखे थे।
ज्ञानेंद्र (Gyanendra Shah) के साथ जनता
नेपाल में राजशाही के अंत से पहले अंतिम राजा रहे ज्ञानेंद्र शाह आज एक आम नागरिक की तरह जीवन बिता रहे हैं। उनका स्थायी निवास काठमांडू का निर्मल निवास है, लेकिन 2024 से वह ज्यादातर समय शहर के बाहरी इलाके नागार्जुन पहाड़ियों में बने फार्महाउस में बिताते हैं।
इस साल मार्च में जब राजशाही समर्थकों ने बड़ा आंदोलन किया था, तब ज्ञानेंद्र पोखरा से काठमांडू लौटे थे और हजारों लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया था। उस समय यह बात जोर पकड़ रही थी कि जनता देश में फिर से राजा की वापसी चाहती है।
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अब ज्ञानेंद्र के पोते (Nepal Prince Hridayendra Shah) से उम्मीदें लगाई जा रही हैं। इसकी वजह है। वह युवा हैं, पढ़े-लिखे हैं, स्मार्ट हैं और अब तक किसी बड़े विवाद से दूर रहे हैं। शाही परिवार के समर्थक उनमें कभी लोकप्रिय राजा बीरेंद्र शाह की झलक देखते हैं।
नेपाल की सड़कों पर उठते नारों और सोशल मीडिया की चर्चाओं से साफ है कि शाही परिवार, खासकर हृदयेंद्र शाह, एक बार फिर जनता की कल्पनाओं में जगह बनाने लगे हैं। यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि नेपाल की राजनीति राजशाही की ओर लौटेगी या नहीं, लेकिन इतना तय है कि हृदयेंद्र शाह (Nepal Prince Hridayendra Shah) का नाम आने वाले समय में नेपाल की सत्ता की बहस का अहम हिस्सा रहेगा।
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