
Earthquakes History : धरती के भीतर होने वाली हलचल जब सतह तक पहुंचती है, तो कुछ ही सेकंड में शहरों को मलबे में बदल सकती है। मानव इतिहास में कई ऐसे भूकंप आए हैं, जिन्होंने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी और पूरे देशों को वर्षों पीछे धकेल दिया।
आज भी जब कहीं बड़ा भूकंप आता है, तो दुनिया को 1556 के चीन, 2004 की हिंद महासागर सुनामी और 2023 के तुर्की-सीरिया भूकंप जैसी भयावह घटनाएं याद आ जाती हैं (Earthquakes History)।
23 जनवरी 1556 : चीन का शानक्सी भूकंप
दुनिया के इतिहास का सबसे घातक भूकंप 23 जनवरी 1556 को चीन के शानक्सी प्रांत में आया था। इतिहासकारों के अनुसार इस आपदा में करीब 8.3 लाख लोगों की मौत हुई थी। उस समय भूकंप मापने की आधुनिक तकनीक मौजूद नहीं थी, इसलिए इसकी तीव्रता का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। फिर भी इसे मानव इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है (Earthquakes History)।
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31 मई 1935 : क्वेटा भूकंप
ब्रिटिश भारत के समय बलूचिस्तान के क्वेटा शहर में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया। इस आपदा ने पूरे शहर को तबाह कर दिया। अनुमान है कि 60 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी। हजारों इमारतें ढह गईं और लाखों लोग प्रभावित हुए।
ताइवान में तबाही
ताइवान अक्सर भूकंपों की वजह से चर्चा में रहता है। 1935 और 1999 में आए बड़े भूकंपों में कुल मिलाकर 5,600 से अधिक लोगों की जान गई थी। वर्ष 2024 में आए भूकंप के बाद इन पुरानी त्रासदियों की यादें फिर ताजा हो गई थीं (Earthquakes History)।
4 नवंबर 1952 : रूस का कामचटका भूकंप
रूस के कामचटका प्रायद्वीप के पास 9.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसके बाद आई सुनामी ने भी भारी तबाही मचाई। विभिन्न अनुमानों के अनुसार इस आपदा में करीब 10 हजार लोगों की मौत हुई थी।
22 मई 1960 : चिली
चिली में आया यह भूकंप आज भी पृथ्वी पर दर्ज सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। इसकी तीव्रता 9.5 मापी गई थी। इसने चिली के साथ-साथ प्रशांत महासागर के कई देशों को प्रभावित किया। हालांकि जनहानि अन्य बड़े भूकंपों की तुलना में कम रही, लेकिन इसकी ऊर्जा और विनाशकारी क्षमता आज भी रिकॉर्ड में दर्ज है (Earthquakes History)।
27 मार्च 1964 : अलास्का
अमेरिका के इतिहास का सबसे शक्तिशाली भूकंप 9.2 तीव्रता के साथ अलास्का में आया था। करीब साढ़े चार मिनट तक धरती कांपती रही। कम आबादी होने के कारण मौतों की संख्या लगभग 130 रही, लेकिन यह भूकंप भूगर्भीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है (Earthquakes History)।
26 जनवरी 2001 : गुजरात का भुज
भारत के इतिहास की सबसे दर्दनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक 26 जनवरी 2001 को आई थी। गणतंत्र दिवस की सुबह गुजरात के कच्छ और भुज क्षेत्र में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया। हजारों गांव और शहर प्रभावित हुए। विभिन्न अनुमानों के अनुसार 30 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई और लाखों लोग बेघर हो गए (Earthquakes History)।
23 जून 2001 : पेरू
पेरू में 8.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों को प्रभावित किया। हालांकि इसकी तीव्रता काफी अधिक थी, लेकिन अपेक्षाकृत कम आबादी वाले क्षेत्रों में असर होने के कारण लगभग 100 लोगों की मौत हुई।
26 दिसंबर 2004 : हिंद महासागर में भूकंप और सुनामी
आधुनिक इतिहास की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में शामिल यह भूकंप 9.1 तीव्रता का था। इसका केंद्र इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पास समुद्र के नीचे था। इसके बाद आई विशाल सुनामी ने इंडोनेशिया, भारत, श्रीलंका, थाईलैंड और कई अन्य देशों में भारी तबाही मचाई। करीब ढाई लाख लोगों की मौत हुई थी (Earthquakes History)। वैज्ञानिकों के अनुसार इस भूकंप से निकली ऊर्जा लगभग 23,000 हिरोशिमा परमाणु बमों के बराबर थी।
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28 मार्च 2005 : इंडोनेशिया भूकंप
सुमात्रा क्षेत्र में 8.6 तीव्रता का एक और शक्तिशाली भूकंप आया। हालांकि इसकी तीव्रता बहुत अधिक थी, लेकिन बड़े पैमाने की सुनामी नहीं आई। फिर भी लगभग 1,300 लोगों की मौत हुई।
8 अक्टूबर 2005 : कश्मीर भूकंप
भारत और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में 7.6 तीव्रता का भूकंप आया। सबसे ज्यादा तबाही पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र और कश्मीर में हुई। इस आपदा में करीब 86 हजार लोगों की मौत हुई और लाखों लोग बेघर हो ग (Earthquakes History)ए।
12 जनवरी 2010 : हैती
कैरेबियाई देश हैती की राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस के पास 7.0 तीव्रता का भूकंप आया। कमजोर बुनियादी ढांचे और घनी आबादी के कारण भारी जनहानि हुई। विभिन्न अनुमानों के अनुसार 1 लाख से 1.6 लाख लोगों तक की मौत हुई थी।
27 फरवरी 2010 : चिली
चिली में एक बार फिर 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। हालांकि यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में शामिल है, लेकिन बेहतर आपदा प्रबंधन और मजबूत निर्माण व्यवस्था के कारण जनहानि अपेक्षाकृत सीमित रही (Earthquakes History)।
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11 मार्च 2011 : जापान
9.0 तीव्रता का यह भूकंप आधुनिक जापान के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था। इसके बाद आई सुनामी ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को भी प्रभावित किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार करीब 18 हजार लोगों की मौत हुई। लाखों लोग विस्थापित हुए और तीन लाख से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गईं।
25 अप्रैल 2015 : नेपाल
नेपाल में 8.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने काठमांडू घाटी समेत कई ऐतिहासिक क्षेत्रों को तबाह कर दिया। इस आपदा में 10 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई और 23 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके झटके भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश तक महसूस किए गए (Earthquakes History)।
6 फरवरी 2023: तुर्की-सीरिया भूकंप
हाल के वर्षों की सबसे भयावह आपदाओं में से एक 6 फरवरी 2023 को आई। तुर्की और सीरिया में पहले 7.8 और फिर 7.5 तीव्रता के दो बड़े भूकंप आए। हजारों इमारतें ढह गईं और दोनों देशों में लगभग 59 हजार लोगों की मौत हुई (Earthquakes History)।



