

Taiwan : मार्च 2024 में ताइवान (Taiwan) की उपराष्ट्रपति Hsiao Bi-khim की चेक गणराज्य यात्रा के दौरान जो घटना महज एक सड़क हादसा लग रही थी, वह अब एक गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश का रूप ले चुकी है।
चेक की खुफिया एजेंसी ने खुलासा किया है कि प्राग स्थित चीनी दूतावास से जुड़े अधिकारियों ने जानबूझकर Hsiao की गाड़ी से टक्कर की योजना बनाई थी। इसका उद्देश्य था उन्हें डराना और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ताइवान (Taiwan) की उपस्थिति को रोकना।
क्या हुआ था प्राग में?
2024 में ताइवान (Taiwan) में चुनाव जीतने के बाद राष्ट्रपति Lai Ching-te और उपराष्ट्रपति Hsiao Bi-khim ने चेक गणराज्य की राजधानी प्राग का दौरा किया था। यह पहली विदेश यात्रा थी, जिसे चीन ने पहले से ही ‘एक चीन नीति’ के खिलाफ बताया था।
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यात्रा के दौरान, एक चीनी राजनयिक ने लाल बत्ती पार कर Hsiao के काफिले का पीछा किया। उस समय इसे एक डिप्लोमैटिक चूक माना गया। लेकिन अब चेक सैन्य खुफिया निदेशक Petr Bartovský और प्रवक्ता Jan Pejšek ने बताया है कि चीन के नागरिक गुप्तचर (civil secret service) ने ताइवानी उपराष्ट्रपति की कार को टक्कर मारने की योजना बनाई थी।
यह योजना अपने अंतिम चरण तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन इसमें शामिल अधिकारी वियना कन्वेंशन का गंभीर उल्लंघन कर रहे थे, जो राजनयिक संबंधों के संचालन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
Hsiao का जवाब – Taiwan डरने वाला नहीं
Hsiao Bi-khim ने इस खुलासे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की ये हरकतें मुझे ताइवान (Taiwan) की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने से नहीं रोक सकतीं।’ उन्होंने चेक अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया और इस घटना को ‘ताइवान को चुप कराने की कोशिश करार दिया।
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क्या है ताइवान-चीन विवाद (China Taiwan tensions)
ताइवान और चीन के बीच तनाव कोई नया नहीं है। 1949 में जब माओत्से तुंग की कम्युनिस्ट पार्टी ने चीन पर कब्जा किया, तब पराजित राष्ट्रवादी सरकार (Kuomintang) ताइवान (Taiwan) भाग गई और वहीं अपनी सत्ता स्थापित की। तब से ताइवान ने खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश के रूप में विकसित किया, जबकि चीन आज भी ताइवान को अपना एक विलग हुआ प्रांत मानता है।
चीन की ‘एक चीन नीति’ के तहत कोई भी देश अगर ताइवान के नेताओं को आधिकारिक मान्यता देता है या उनके साथ संबंध बनाता है, तो वह चीन की नजर में राजनयिक अपराध बन जाता है। यही वजह है कि Hsiao की चेक यात्रा चीन को खटक रही थी।
चीन की धमकी
चीन के विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले को ‘झूठा प्रचार’ बताया। प्रवक्ता Guo Jiakun ने कहा कि चीनी राजनयिक हमेशा मेजबान देश के कानूनों का पालन करते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने Hsiao को कट्टर ताइवान (Taiwan) स्वतंत्रता समर्थक बताया और चेतावनी दी कि ऐसे अलगाववादियों को मौत की सजा भी दी जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि चेक सरकार ने Hsiao को बुलाकर चीन के आंतरिक मामलों में गंभीर हस्तक्षेप किया है, जो द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है।
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वियना कन्वेंशन का उल्लंघन?
चेक खुफिया एजेंसी के अनुसार, यह पूरी योजना वियना कन्वेंशन 1961 का उल्लंघन है, जिसके तहत राजनयिकों को मेजबान देश की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान करना होता है। यदि किसी दूतावास के भीतर से जानबूझकर किसी विदेशी नेता पर हमला या दुर्घटना की साजिश रची जाती है, तो वह पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन जाता है।



