
देश की सुरक्षा से जुड़ी जमीन का सौदा, वह भी फर्जी कागजों के दम पर! यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है, जो 28 साल बाद सामने आई है।
मामला फिरोजपुर के फत्तूवाला गांव में स्थित एक पुराने एयरस्ट्रिप का है, जिसे भारतीय वायुसेना (IAF) ने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में इस्तेमाल किया था। अब खुलासा हुआ है कि यह जमीन 1997 में एक मां-बेटे की जोड़ी ने राजस्व विभाग के कुछ अफसरों की मिलीभगत से बेच दी थी।
इस घोटाले में आरोपी हैं उषा अंसल और उनका बेटा नवीन चंद, जो डुमनी वाला गांव के निवासी हैं। जांच में पता चला है कि इन्होंने ब्रिटिश काल में अधिग्रहित की गई इस जमीन के नकली दस्तावेज तैयार किए और खुद को मालिक दिखाकर जमीन बेच दी। 1945 में यह जमीन ब्रिटिश सरकार ने वायुसेना (IAF) के इस्तेमाल के लिए अधिग्रहित की थी और तभी से वायुसेना के पास ही रही है।
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इस जालसाजी की शिकायत सबसे पहले रिटायर्ड राजस्व अधिकारी निशान सिंह ने की थी, लेकिन सालों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2021 में हलवारा एयरफोर्स स्टेशन के कमांडेंट ने भी इस घोटाले को लेकर फिरोजपुर के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखा, लेकिन फिर भी फाइलें दबा दी गईं।
तब जाकर निशान सिंह ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि जमीन के असली मालिक मदन मोहन लाल की मौत 1991 में हो गई थी, लेकिन 1997 में उस जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई! इतना ही नहीं, 2009-10 की जमाबंदी में कई लोगों के नाम मालिक के तौर पर दर्ज पाए गए, जबकि सेना (IAF) ने यह जमीन कभी किसी को सौंपी ही नहीं थी।
कोर्ट का सख्त रुख, जांच के आदेश
इस गंभीर चूक को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए हाईकोर्ट ने फिरोजपुर के डिप्टी कमिश्नर को फटकार लगाई। जस्टिस हरजीत सिंह ब्रार ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के प्रमुख निदेशक को जांच के आदेश दिए और कहा कि चार सप्ताह के भीतर इसकी जांच पूरी की जाए।
20 जून 2025 को विजिलेंस ब्यूरो ने रिपोर्ट दाखिल की, जिसके आधार पर उषा अंसल और नवीन चंद के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई है। इसमें आईपीसी की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं – जैसे 419 (छलपूर्वक व्यक्ति का रूप धारण कर धोखाधड़ी), 420 (धोखा देकर संपत्ति प्राप्त करना), 465 और 467 (जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज को असली बताकर प्रयोग करना), और 120B (आपराधिक साजिश)। अब इस मामले की जांच DSP करन शर्मा की अगुआई में हो रही है, जो इस बहुचर्चित जमीन घोटाले में शामिल सभी दोषियों की पहचान करेंगे।
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क्या है इस जमीन की अहमियत?
फत्तूवाला गांव का यह एयरस्ट्रिप पाकिस्तान सीमा से बेहद करीब है और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। युद्धकाल में इसका इस्तेमाल एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड के रूप में होता रहा है। इसलिए यह मामला सिर्फ जमीन कब्जे का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत भी है।
मई 2025 में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार यह जमीन रक्षा मंत्रालय को वापस सौंप दी गई। लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है कि 28 साल तक यह फर्जीवाड़ा कैसे दबा रहा? कौन-कौन इसमें शामिल था? और क्या इससे सबक लेकर अब बाकी सैन्य जमीनों की स्थिति की जांच होगी?
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