
मुंबई की विशेष एनआईए अदालत (NIA Court) ने मालेगांव बम धमाका मामले (Malegaon Blast Case) में गुरुवार को सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। करीब 17 साल पुराने इस केस में अदालत ने सबूतों के अभाव में यह फैसला सुनाया। लेकिन इस फैसले के तुरंत बाद महाराष्ट्र एटीएस (ATS) के पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर (Mahboob Mujawar) का सनसनीखेज दावा सामने आया, जिसने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है।
मुजावर ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान उन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) को गिरफ्तार करने का दबाव डाला गया था। उन्होंने दावा किया कि यह दबाव उन्हें मौखिक रूप से उनके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा डाला गया था। हालांकि उन्होंने यह गिरफ्तारी नहीं की क्योंकि उन्हें इस दावे की सच्चाई पर संदेह था।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अदालत ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है, और इससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
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फडणवीस का आरोप, ‘Hindu Terror’ कांग्रेस की गढ़ी गई साजिश
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने इस फैसले के बाद कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि तत्कालीन यूपीए सरकार ने वोटबैंक की राजनीति के तहत ‘भगवा आतंकवाद’ (Saffron Terrorism) और ‘हिंदू आतंकवाद’ (Hindu Terrorism) जैसे शब्द गढ़े थे।
फडणवीस के मुताबिक, ‘यह साजिश थी जिसमें हिंदुत्व से जुड़े संगठनों और RSS पदाधिकारियों को निशाना बनाया गया। लेकिन सच्चाई यह है कि कई अफसरों ने दबाव के बावजूद यह कहने का साहस किया कि कोई ठोस सबूत नहीं हैं।’
मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि अदालत के फैसले ने इस पूरे षड्यंत्र को बेनकाब कर दिया है। परत दर परत यह षड्यंत्र अब खुल रहा है। कांग्रेस ने जानबूझकर तमाम हिंदुओं को आतंकी ठहराने का प्रयास किया।
इस मामले पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले (Ramdas Athawale) ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘मुझे ठीक-ठीक जानकारी नहीं है कि इंस्पेक्टर ने क्या कहा, लेकिन उनके मुताबिक, तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जिन लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था, उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं थे। जहां तक मोहन भागवत जी (Mohan Bhagwat) का सवाल है, मुझे नहीं लगता कि उनका नाम इस मामले में आने की कोई वजह थी। लेकिन अगर सच में उन्हें लाने का आदेश दिया गया था, तो यह संभवतः उन्हें फंसाने की कोशिश रही होगी, जो अंततः नाकाम रही।’
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