
Sheikh Hasina death sentence : बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई है। यह मामला पिछले साल जुलाई–अगस्त में हुए उस बड़े आंदोलन से जुड़ा है, जिसमें देशभर में हिंसा हुई थी और हसीना सरकार गिर गई थी।
शेख हसीना इस समय भारत में रह रही हैं और उनकी गैरमौजूदगी में ही यह पूरा मुकदमा चला। अदालत की तीन सदस्यीय पीठ, जिसका नेतृत्व जस्टिस मोहम्मद गुलाम मुर्तजा मजूमदार ने किया, ने हसीना सहित तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
हसीना पर पांच आरोप लगाए गए थे। इनमें से दो मामलों में अदालत ने उन्हें मौत की सजा दी (Sheikh Hasina death sentence) और एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसी केस में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मौत की सजा मिली है। पूर्व पुलिस प्रमुख अब्दुल्ला अल मनून को सरकारी गवाह बनने के बाद पांच साल की जेल की सजा दी गई।
अभियोजन पक्ष ने जून में अदालत में हसीना और अन्य दो आरोपियों के खिलाफ पांच गंभीर आरोप दाखिल किए थे। इसके बाद न्यायाधिकरण ने हसीना और कमाल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
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आंदोलन की वजह से छोड़ना पड़ा था पद
पिछले साल हुए सरकार-विरोधी प्रदर्शनों में कई जगह हिंसा हुई थी। उस समय प्रधानमंत्री रहीं हसीना पर आरोप लगा कि इन घटनाओं में हुई मौतों और दमन में उनका रोल था। आंदोलन बढ़ता गया और अगस्त 2024 में उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद वह देश छोड़कर भारत आ गईं और तब से यहीं रह रही हैं।
यह फैसला (Sheikh Hasina death sentence) बांग्लादेश की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि इससे देश में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
बांग्लादेश में माहौल तनावपूर्ण
ढाका में फैसले (Sheikh Hasina death sentence) से पहले माहौल बेहद तनावपूर्ण था। अदालत परिसर में भारी सुरक्षा तैनात थी। राजधानी के कई इलाकों में बम फटने की घटनाओं के बाद पुलिस ने shoot-at-sight तक की चेतावनी जारी कर दी थी। रविवार रात ढाका में हसीना समर्थकों की रैली के दौरान तनाव और बढ़ गया, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। फैसले के दिन अदालत कक्ष खचाखच भरा था, और मुख्य न्यायाधीश गोलाम मोर्तुज़ा मोजुमदार की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने फैसला पढ़ना दोपहर 12:30 बजे शुरू किया।
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शेख हसीना ने फैसले (Sheikh Hasina death sentence) को बताया पक्षपाती
शेख हसीना की प्रतिक्रिया एकदम तीखी रही। भारत से जारी अपने लिखित बयान में उन्होंने कहा कि यह फैसला पहले से तय था और पूरे ट्रायल को एक पक्षपाती और राजनीतिक इरादों से चलाए गए षड्यंत्र की तरह पेश किया। उनके अनुसार, अदालत एक अनिर्वाचित और अवैध सरकार के नियंत्रण में है, जिसका उद्देश्य उन्हें और उनकी पार्टी अवामी लीग को राजनीति से हटाना है।
उन्होंने स्वीकार किया कि 2024 के विद्रोह के दौरान सरकार स्थिति पर नियंत्रण खो बैठी थी, लेकिन उनके मुताबिक यह हिंसा किसी भी तरह पूर्वनियोजित हमला नहीं थी। उन्होंने अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस पर भी आरोप लगाया कि वह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम कर रहे हैं और देश को अस्थिर बनाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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फैसले से ठीक पहले हसीना ने भारत को भी संदेश भेजा था। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी है, और उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ढाका में लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर न पड़े। अंतरिम सरकार ने भारत से हसीना को वापस भेजने का अनुरोध किया है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ढाका में फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगले साल फरवरी में चुनावों से पहले देश की राजनीति किस दिशा में जाएगी। अवामी लीग को पहले ही चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है, और फैसले के बाद अशांति की आशंका और बढ़ गई है। अदालत ने कहा है कि इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है, लेकिन इसके लिए हसीना को देश में मौजूद रहना होगा। साफ है कि न्याय का दिखावा करने की पूरी कोशिश की जा रही है।
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