
Trump Gaza peace plan : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गाजा में लंबे समय से चल रही हिंसा और मानवीय संकट को खत्म करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश की गई शांति योजना को मंजूरी दे दी। प्रस्ताव 13–0 से पास हुआ, जबकि चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पिछले दो वर्षों में 71,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और दुनिया भर में गाजा की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज ने इसे मध्य पूर्व के लिए नया रास्ता बताते हुए कहा कि यह प्रस्ताव इज़राइल-फिलिस्तीन के लिए एक नई दिशा तय कर सकता है।
इस प्रस्ताव (Trump Gaza peace plan) की सबसे अहम बात यह है कि इसमें गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल भेजने की योजना शामिल है, जो इजराइल की सैन्य वापसी के बाद स्थिरता बनाए रखेगा। इसके साथ ही फिलिस्तीन राज्य का संभावित रास्ता भी इस प्रस्ताव का हिस्सा है, हालांकि उसमें काफी धुंधलापन और कई शर्तें हैं।
अमेरिका ने शुरू में राज्य बनाने का जिक्र नहीं किया था, लेकिन अरब देशों के दबाव के बाद इसे शामिल किया गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि जब फिलिस्तीनी अथॉरिटी सुधार करेगी और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी, तभी विश्वसनीय तरीके से फिलिस्तीन राज्य बनने की संभावना पैदा हो सकती है।
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इजराइल का विरोध
इसी बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मतदान से पहले और बाद में साफ कर दिया कि उनकी सरकार फिलिस्तीन राज्य के निर्माण का विरोध करती है। वाशिंगटन से बातचीत में उन्होंने प्रस्ताव की भाषा पर सहमति जताई थी, लेकिन अपनी सरकार के दक्षिणपंथी साझेदारों की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने दोबारा कहा कि इज़राइल की नीति नहीं बदलेगी। इससे यह बड़ा सवाल उठ गया है कि क्या इजराइल इस प्रस्ताव को लागू होने देगा या नहीं।
दूसरी तरफ हमास ने भी इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया। संगठन ने कहा कि यह (Trump Gaza peace plan) अंतरराष्ट्रीय निगरानी थोपने जैसा है और गाजा की जनता इस तरह की व्यवस्था को कभी स्वीकार नहीं करेगी। हमास ने यह भी साफ कर दिया कि वह अपने हथियार नहीं छोड़ेगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल को गाजा में सशस्त्र समूहों को निरस्त्र करने का अधिकार दिया गया है। यह स्थिति भविष्य में एक और बड़े टकराव का संकेत देती है।
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अरब देशों का समर्थन
अरब देशों ने प्रस्ताव को कई कमियों के बावजूद इसलिए समर्थन दिया क्योंकि उनका मानना है कि अभी प्राथमिकता युद्ध रोकने और गाजा में भोजन-दवा पहुंचाने की है। अल्जीरिया के प्रतिनिधि ने कहा कि प्रस्ताव में कमजोरियां जरूर हैं, लेकिन यह मानवता बचाने के मौजूदा प्रयासों का आधार बन सकता है। उन्होंने प्रस्ताव के उस ऐनेक्स पर भी जोर दिया जिसमें कहा गया है कि किसी भी तरह का कब्जा, जमीन हथियाना या फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करना स्वीकार्य नहीं होगा।
हालांकि प्रस्ताव (Trump Gaza peace plan) के कई हिस्से अभी भी अस्पष्ट हैं। इसमें एक बोर्ड बनाने की बात कही गई है, जिसकी अध्यक्षता डोनाल्ड ट्रंप करेंगे, लेकिन इसमें कौन-कौन शामिल होंगे, यह स्पष्ट नहीं है। गाजा को संभालने के लिए एक फिलिस्तीनी तकनीकी समिति का भी जिक्र है, पर उसके सदस्यों के नाम तय नहीं हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अब तक किसी भी देश ने गाजा के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल भेजने की घोषणा नहीं की है, जबकि सुरक्षा परिषद की रूपरेखा का बड़ा हिस्सा इसी फोर्स पर निर्भर है।
यूरोपीय देशों ने भी प्रस्ताव (Trump Gaza peace plan) का समर्थन किया, क्योंकि उनकी नजर में गाजा को तत्काल राहत देना और युद्धविराम बढ़ाना अभी सबसे जरूरी कदम है। उनका कहना है कि राजनीतिक समाधान बाद में भी निकल सकता है, लेकिन फिलहाल दो करोड़ से अधिक फिलिस्तीनियों की सुरक्षा और भोजन-दवा सुनिश्चित करना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।
इन्हीं सब बहसों और विरोधाभासों के बीच ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ऐतिहासिक बताते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि जल्द ही इस शांति प्रक्रिया से जुड़े बड़े ऐलान किए जाएंगे। हालांकि जमीन पर स्थिति अभी भी जटिल है। एक तरफ इजराइल की आपत्ति है, दूसरी तरफ हमास का सख्त रुख और बीच में है एक प्रस्ताव जिसने उम्मीद भी जगाई है और नई उलझनें भी खड़ी कर दी हैं।
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