
Mystery of The Tower of Jericho : क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान ने सबसे पहले कौन-सी इमारत बनाई होगी? कौन-सा ढांचा ऐसा था जिसने यह साबित किया कि मनुष्य सिर्फ जीवित रहने के लिए नहीं, बल्कि सोचने, समझने और आकाश को पढ़ने के लिए भी बना है?
इस सवाल का जवाब छिपा है वेस्ट बैंक के रेगिस्तानी इलाके में, जेरिको (Jericho) नाम के शहर में, जहां लगभग 11,000 साल पहले इंसानों ने पत्थरों से एक रहस्यमयी संरचना बनाई थी – The Tower of Jericho।
यह टावर सिर्फ पत्थरों का ढेर नहीं था, यह मानव सभ्यता की पहली सामूहिक कल्पना और भय के मनोविज्ञान का प्रतीक था (Mystery of The Tower of Jericho)।
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सभ्यता की पहली बस्ती था जेरिको
Jericho को आज भी दुनिया का सबसे पुराना आबाद शहर (Oldest Inhabited City in the World) कहा जाता है। यहां लोग करीब 9000 BCE में बसने लगे थे, जब न तो लोहा था, न पहिया, और न ही पक्के औजार।
फिर भी, उन्होंने पत्थरों से दीवारें बनाईं, सीढ़ियां तराशी और एक विशाल टावर खड़ा किया, जो The Tower of Jericho के नाम से इतिहास में दर्ज हुआ (Mystery of The Tower of Jericho)।
यह टावर लगभग 8.5 मीटर ऊंचा (28 फीट) और 9 मीटर चौड़ा (30 फीट) था, जिसमें 22 सीढ़ियों वाली एक आंतरिक सीढ़ी थी। इतनी सटीक इंजीनियरिंग उस दौर में असंभव सी लगती है, लेकिन यह इंसानों के उस युग की प्रतिभा का प्रमाण है।
क्यों बनाया इतना बड़ा टावर, आज भी जवाब रहस्य (Mystery of The Tower of Jericho)
अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह टावर बना क्यों था? क्या यह सुरक्षा के लिए था? सूर्य पूजा का प्रतीक था? या फिर भय और नियंत्रण का माध्यम?
2011 में तेल अवीव विश्वविद्यालय (Tel Aviv University) के दो पुरातत्वविद् रॉय लिरान (Roy Liran) और रान बरकाई (Ran Barkai) ने इस रहस्य को समझने की कोशिश की। उन्होंने कंप्यूटर मॉडलिंग के जरिए पाया कि ग्रीष्म संक्रांति के सूर्यास्त के समय पास के माउंट कुरंतुल (Mount Quruntul) की छाया सबसे पहले टावर पर पड़ती है और फिर धीरे-धीरे पूरे शहर को ढक लेती है। (Mystery of The Tower of Jericho)
टावर का खगोलीय महत्व
टावर की सीढ़ियां बिल्कुल उसी कोण पर बनी हैं, जहां सूर्य माउंट कुरंतुल के पीछे डूबता है। इससे यह सिद्ध हुआ कि यह शायद दुनिया की सबसे पुरानी आर्कियोएस्ट्रोनॉमी (Archaeoastronomy) संरचना थी यानी एक प्राचीन सूर्य कैलेंडर!
संभावना है कि लोग इससे लंबी रातों की शुरुआत का संकेत लेते थे और सूर्य की वापसी की प्रार्थना करते थे।
शोधकर्ताओं का एक और दिलचस्प सिद्धांत है – यह टावर भय का प्रतीक भी था। गर्मियों के बाद अंधकार बढ़ने वाला था, लंबी रातें आने वाली थीं।
लोगों ने इस डर को एक सामूहिक संरचना में बदला – एक टावर जो सभी को एकजुट रखे, डर को साझा करे, और समाज को संगठित करे।
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि यह जल संरक्षण या सामुदायिक सभा के लिए भी इस्तेमाल किया जाता रहा होगा। फिर भी, खगोलीय कनेक्शन आज भी सबसे मजबूत सिद्धांत माना जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि यह टावर 2650 BCE तक दुनिया की सबसे ऊंची मानव-निर्मित संरचना रहा यानी मिस्र के डजोसर पिरामिड (Pyramid of Djoser) से भी पहले!
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बाइबल की कहानी से भी जोड़ा गया टावर को
1930 से 1936 के बीच ब्रिटिश पुरातत्वविद जॉन गारस्टैंग (John Garstang) ने जेरिको की खुदाई शुरू की। उन्हें दीवारों के अवशेष मिले और उन्होंने इन्हें बाइबल की जेरिको की लड़ाई (Battle of Jericho) से जोड़ा – वह प्रसिद्ध कथा जिसमें यहूदी लोगों ने शहर को घेरकर तुरहियां बजाईं और दीवारें गिर गईं। लेकिन बाद में पता चला कि गारस्टैंग की तारीखें बाइबल की घटनाओं से हजारों साल पहले की थीं।
फिर 1952 से 1958 के बीच कैथलीन केनियन (Kathleen Kenyon) ने खुदाई की। उन्होंने साबित किया कि यह संरचना 8000 BCE की है यानी बाइबल के युग से 6,000 साल पहले!
आज यह स्थल UNESCO World Heritage Site का हिस्सा है और Southern Levant क्षेत्र के प्राचीन बसावट पैटर्न को समझने की कुंजी बना हुआ है।
Natufian संस्कृति की देन
यह टावर नाटूफियन संस्कृति (Natufian Culture) से जुड़ा था। इसी संस्कृति ने कृषि क्रांति की शुरुआत की।
नाटूफियन संस्कृति का उद्भव लगभग 12,500 से 9,500 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है। इसका केंद्र था लेवांत क्षेत्र (Levant Region) यानी आज का इजराइल, फिलिस्तीन, जॉर्डन, लेबनान और सीरिया।
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नाटूफियन लोग पहले की तरह पूरी तरह शिकारी या घुमंतू नहीं थे। उन्होंने पहली बार स्थायी घर बनाना शुरू किया। उनके मकान गोल आकार के पत्थर के झोपड़ों जैसे थे, जिनकी नींव गहरी और दीवारें मजबूत थीं।
वे गेहूं, जौ और जंगली अनाज इकट्ठा करते थे और धीरे-धीरे उन्हें उगाने लगे। यही खेती की शुरुआत थी। उनके घरों के पास अनाज के भंडार और घास काटने के औजार भी मिले हैं, जो यह साबित करते हैं कि वे भोजन को योजनाबद्ध तरीके से संग्रहित करते थे।
नाटूफियन समाज में धार्मिक और सामाजिक भावनाएं दिखती हैं। पुरातत्वविदों को कब्रों में फूलों, आभूषणों और पत्थर के हारों के प्रमाण मिले हैं। इससे पता चलता है कि उन्हें मृत्यु और परलोक की धारणा थी।
कई जगहों पर कुत्तों के अवशेष भी मानव कब्रों के साथ मिले हैं, जो यह दिखाते हैं कि कुत्ता मानव का पहला साथी इसी युग में बना।
जेरिको को इसी सभ्यता ने खड़ा किया। उम्मीद है कि जिस तरह से इस संस्कृति के बारे में पता चला है, एक दिन उनके खड़े किए टावर का रहस्य भी खुल जाएगा (Mystery of The Tower of Jericho)।
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