
Karnataka Congress dispute over CM post : कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा एक बार फिर जोर पकड़ चुकी है। रामनगर के विधायक इकबाल हुसैन के बयान ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। उन्होंने दोबारा दावा किया कि वह 200 फीसदी आश्वस्त हैं कि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार जल्द ही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे। उनके मुताबिक, सत्ता हस्तांतरण का फैसला हाईकमान के हाथ में है और पांच-छह शीर्ष नेताओं की बातचीत के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
यह विवाद (Karnataka Congress dispute over CM post) ऐसे समय में उभरा है जब कांग्रेस सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा सफर पूरा कर लिया है। आमतौर पर इसी मध्य बिंदु पर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को हवा मिलती है, और कर्नाटक में यह असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है।
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दिल्ली में विधायकों की हलचल
पिछले दो दिनों में कर्नाटक कांग्रेस के कई विधायक दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की। छह विधायक, जिन्हें शिवकुमार का नजदीकी माना जाता है, रविवार देर रात दिल्ली रवाना हुए। इसके बाद भी कई और विधायकों के जाने की संभावना जताई गई।
पिछले हफ्ते करीब दस विधायक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर चुके हैं। मंड्या, मगेदी और मलवली क्षेत्रों के विधायकों का कहना है कि कर्नाटक में चल रही अनिश्चितता (Karnataka Congress dispute over CM post) पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है और हाईकमान को जल्द से जल्द स्थिति साफ करनी चाहिए।
कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि आने वाले कैबिनेट विस्तार में युवाओं और नए चेहरों को मौका मिलना चाहिए।
शिवकुमार कह रहे – मैंने किसी को नहीं बुलाया
दिल्ली में विधायकों की बढ़ती सक्रियता पर डी.के. शिवकुमार ने खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी विधायक को न बुलाया है, न बातचीत की है। (Karnataka Congress dispute over CM post)
उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उनके खेमे में भी काफी बेचैनी और गतिविधि है।
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बिहार से कांग्रेस ने सबक नहीं लिया?
कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान (Karnataka Congress dispute over CM post) ऐसे समय में हो रही है जब बिहार में पार्टी को बेहद करारी हार मिली। महागठबंधन ने उम्मीदों के उलट प्रदर्शन किया और कांग्रेस को अपने संगठन, संदेश और नेतृत्व पर गंभीर सवाल झेलने पड़े।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की हार के बाद कांग्रेस को अपनी रणनीति और अनुशासन पर ध्यान देना चाहिए था, लेकिन कर्नाटक में हालिया घटनाएं (Karnataka Congress dispute over CM post) दिखाती हैं कि पार्टी अभी भी पुरानी समस्याओं से बाहर नहीं निकल पाई है।
पहले से ही सीमित राज्यों में मौजूद सत्ता को स्थिर रखने की बजाय कर्नाटक जैसी अहम सरकार के भीतर असंतोष बढ़ना, कांग्रेस की कार्यशैली पर प्रश्न खड़े करता है।
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सिद्धारमैया–शिवकुमार तनाव फिर चर्चा में
कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार के बीच सत्ता संतुलन को लेकर तनाव बना हुआ है (Karnataka Congress dispute over CM post)। चुनाव के समय रोटेशनल मुख्यमंत्री का फॉर्मूला चर्चा में था, लेकिन सरकार बनते ही यह मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
अब जब सरकार ने आधा कार्यकाल पूरा किया है, वही मुद्दा फिर उठ खड़ा हुआ है। शिवकुमार खेमे का दावा है कि नेतृत्व परिवर्तन एक समझौते का हिस्सा था, जबकि सिद्धारमैया का गुट इसे सिरे से खारिज करता रहा है।
कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच तनाव लंबे समय से है और यही असंतोष अब विधायकों के जरिए सतह पर आ रहा है।
कर्नाटक में यह अस्थिरता भाजपा के लिए राजनीतिक अवसर बन सकती है। कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बढ़ रहा है कि वह जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करे, ताकि सरकार अपना शेष कार्यकाल सुचारू रूप से पूरा कर सके।



