
Magh Purnima : हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य और व्रत करने से जीवन के पापों का क्षय होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। माघ पूर्णिमा पर पूर्णिमा व्रत रखने वाले श्रद्धालु चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य भी देते हैं।
इस बार माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन रवि पुष्य योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रवि पुष्य योग में किए गए धार्मिक कार्य कई गुना फल देते हैं। ऐसे में माघ पूर्णिमा पर विधि-विधान से पूजा और स्नान-दान करने से जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है।
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) कब है?
माघ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 फरवरी 2026, रविवार को सुबह 5 बजकर 53 मिनट से होगी। वहीं, पूर्णिमा तिथि का समापन मध्य रात्रि के बाद 3 बजकर 39 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, जब पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल में होती है, तब उसी दिन व्रत और पूजा का विधान माना जाता है। इसी कारण 1 फरवरी 2026 को ही माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) का व्रत, स्नान और दान किया जाएगा।
इस दिन रविवार होने और पुष्य नक्षत्र के संयोग से रवि पुष्य योग बन रहा है, जो इस पर्व के महत्व को और बढ़ा देता है।
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) पर स्नान और दान के लिए लाभ चौघड़िया का समय सबसे उत्तम माना गया है। यह शुभ समय सुबह 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगा।
इस दिन तिल, कंबल, वस्त्र, घी, फल, अन्न और जरूरतमंदों को दान करना विशेष फलदायी माना गया है। साथ ही, माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) पर पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
यह भी पढ़ें : Supreme court stay on UGC regulation : यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) चंद्रोदय का समय
माघ पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम 5 बजकर 46 मिनट पर होगा। चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें जल, दूध या गंगाजल से अर्घ्य देने का विधान है। ऐसा करने से मानसिक शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
माघ पूर्णिमा पूजा विधि
- माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें।
- घर के पूजा स्थल पर एक चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु तथा देवी लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें और चौकी के चारों ओर कलावा बांधें। इसके बाद भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें और उन्हें वस्त्र, पुष्प और तिलक अर्पित करें। केले, फल, पंचामृत और अन्य भोग अर्पित कर विधि-विधान से आरती करें।
- माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) के दिन व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और जीवन में शुभता बनी रहती है।



