
Beaufort Castle History : दक्षिणी लेबनान की एक ऊंची पहाड़ी पर बना ब्यूफोर्ट कैसल आज सिर्फ एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं है, बल्कि मध्य पूर्व की राजनीति और युद्धों का जीवंत गवाह भी है। लगभग 900 साल पुराना यह किला हाल के दिनों में फिर सुर्खियों में आ गया है, जब इजरायली सेना ने इस पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने का दावा किया।
लेकिन Beaufort Castle की कहानी केवल आधुनिक संघर्षों तक सीमित नहीं है। इसकी दीवारों में क्रूसेडर्स, सलादीन, मामलुक शासकों, ऑटोमन साम्राज्य, फिलिस्तीनी लड़ाकों और इजरायली सेना तक की सदियों पुरानी कहानी दर्ज है (Beaufort Castle History)।
यह किला कहां स्थित है?
ब्यूफोर्ट कैसल को अरबी में क़लअत अल-शकीफ (Qalaat al-Shaqif) कहा जाता है, दक्षिणी लेबनान में नबातियेह क्षेत्र के पास एक ऊंची चट्टान पर स्थित है। यह समुद्र तल से लगभग 700 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है (Beaufort Castle History)।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी भौगोलिक स्थिति है। यहां से दक्षिणी लेबनान, लितानी नदी घाटी, पश्चिमी बेका घाटी और उत्तरी इजरायल के बड़े हिस्से पर नजर रखी जा सकती है। यही कारण है कि सदियों से यह किला सैन्य दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
क्रूसेडर्स ने बनाया था यह किला
12वीं शताब्दी में जब यूरोपीय क्रूसेडर्स पवित्र भूमि पर नियंत्रण के लिए लड़ रहे थे, तब उन्होंने इस रणनीतिक स्थान पर कब्जा किया। वर्ष 1139 में यरुशलम के क्रूसेडर शासक फुल्क और रानी मेलिसेंडे के नेतृत्व में इस क्षेत्र पर अधिकार स्थापित किया गया (Beaufort Castle History)।
क्रूसेडर्स ने इस किले का नाम Beaufort रखा। पुरानी फ्रेंच भाषा में Beaufort का अर्थ होता है सुंदर किला या मजबूत किला।
इसके बाद यहां विशाल पत्थर की दीवारें, रक्षा चौकियां और सैन्य संरचनाएं बनाई गईं। जल्द ही यह क्रूसेडर साम्राज्य के सबसे मजबूत किलों में शामिल हो गया (Beaufort Castle History)।
1187 में इतिहास का प्रसिद्ध Battle of Hattin हुआ, जिसमें मुस्लिम सेनापति सलादीन ने क्रूसेडर सेनाओं को करारी हार दी। इसके बाद यरुशलम सहित कई महत्वपूर्ण शहर और किले मुस्लिम सेनाओं के नियंत्रण में आ गए।
लेकिन ब्यूफोर्ट कैसल उन अंतिम किलों में था जिसने लंबे समय तक प्रतिरोध किया। उस समय किले का नियंत्रण सिडोन के शासक रेनॉल्ड के पास था। कहा जाता है कि उसने सलादीन से बातचीत के बहाने समय हासिल किया और किले की रक्षा तैयारियां मजबूत कर दीं। अंततः लंबी घेराबंदी के बाद 1190 में किले के सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और ब्यूफोर्ट कैसल सलादीन के नियंत्रण में आ गया (Beaufort Castle History)।
फिर लौटे क्रूसेडर्स, फिर आए मामलुक
इतिहास ने एक और मोड़ लिया जब लगभग 50 वर्ष बाद एक संधि के तहत यह किला दोबारा क्रूसेडर्स को वापस मिला। बाद में इसे प्रसिद्ध सैन्य धार्मिक संगठन Knights Templar ने खरीद लिया। उन्होंने किले की दीवारों और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया।
लेकिन 1268 में मामलुक सुल्तान Baibars ने इस किले पर कब्जा कर लिया। इसके बाद कई सदियों तक यह मुस्लिम शासकों के नियंत्रण में रहा (Beaufort Castle History)।
यह भी पढ़ें : Jatan Nagar Palace : 100 कमरों का यह भव्य महल आज क्यों माना जाता है भुतहा?
ऑटोमन शासन और भूकंप से हुआ नुकसान
17वीं शताब्दी में जब ऑटोमन साम्राज्य ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया, तब किले के कुछ हिस्सों को नष्ट कर दिया गया। बाद में 1837 के विनाशकारी गैलीली भूकंप ने भी ब्यूफोर्ट कैसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया।
धीरे-धीरे यह किला खंडहर में बदलने लगा। स्थानीय लोग इसके पत्थरों का उपयोग अन्य निर्माण कार्यों में करने लगे और कुछ समय तक यह चरवाहों के लिए आश्रय स्थल भी बना रहा (Beaufort Castle History)।
आधुनिक दौर में भी युद्ध का केंद्र
20वीं शताब्दी में ब्यूफोर्ट कैसल फिर से सैन्य महत्व हासिल करने लगा। 1970 के दशक में यहां Palestine Liberation Organization के लड़ाकों ने अपना ठिकाना बनाया।
1982 में लेबनान युद्ध के दौरान इजरायली सेना ने इस किले पर कब्जा कर लिया। इसके बाद लगभग 18 वर्षों तक यह इजरायल के नियंत्रण में रहा (Beaufort Castle History)।
यह भी पढ़ें : Witches’ Pond : ड्रैकुला के इस तालाब से आज भी क्यों डरते हैं लोग?
साल 2000 में तत्कालीन इजरायली प्रधानमंत्री Ehud Barak ने दक्षिणी लेबनान से सेना हटाने का फैसला किया और Beaufort Castle खाली कर दिया गया।
सितंबर 2025 में लेबनान ने Beaufort Castle को UNESCO World Heritage Site की संभावित सूची (Tentative List) में शामिल किया।
इस कदम का उद्देश्य किले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किला मध्यकालीन सैन्य वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और क्रूसेडर तथा इस्लामी इतिहास दोनों की महत्वपूर्ण विरासत को दर्शाता है।
Takht-e-Rustam Stupa : बौद्ध मठ या रुस्तम की जगह, अफगानिस्तान के इस स्तूप का रहस्य क्या है?


