
Diwali on same date : इस साल दिवाली की तारीख को लेकर उत्तर से दक्षिण तक कोई विवाद नहीं है। पिछले तीन वर्षों में पहली बार देशभर में दिवाली एक ही दिन मनाई जाएगी। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और पंचांगों की गणना में एकरूपता के कारण इस बार तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति नहीं बनी है।
पिछले तीन वर्षों से काशी विद्वत परिषद और बीएचयू के ज्योतिष विभाग की ओर से देशभर के 100 से अधिक पंचांगों का अध्ययन किया गया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन के माध्यम से पंचांगों की गणना में एकरूपता लाने का प्रयास किया गया। इसका असर अब सत्र 2026-27 के पंचांगों में दिखाई दे रहा है (Diwali on same date)।
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एक दिन ही मनाई जाएगी दिवाली
इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसी है कि दिवाली की तिथि को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं है। आमतौर पर अमावस्या कभी सूर्यास्त के आसपास शुरू होकर अगले दिन सूर्यास्त तक रहती थी। ऐसे में अलग-अलग पंचांगों में तिथि को लेकर अंतर दिखाई देता था। शास्त्रीय वचनों की अलग-अलग व्याख्या से भी भ्रम की स्थिति बनती थी। इस बार अमावस्या की स्थिति ऐसी है कि यह आठ नवंबर को ही प्रदोष काल और अर्द्धरात्रि में रहेगी। इसलिए दिवाली भी इसी दिन मनाई जाएगी (Diwali on same date)।
8 नवंबर को दिवाली, जानें लक्ष्मी पूजा का समय
आठ नवंबर की सुबह करीब 10:50 बजे अमावस्या तिथि शुरू होगी। इसके साथ ही दिवाली का मुहूर्त शुरू हो जाएगा। इससे पहले चतुर्दशी तिथि में हनुमान जयंती मनाई जाएगी।
दिवाली की रात सूर्यास्त के बाद करीब दो घंटे 24 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। इसी दौरान मां लक्ष्मी की पूजा और दीप जलाने का विशेष महत्व माना गया है (Diwali on same date)।
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आठ नवंबर को रात 12 बजे तक दिवाली मनाने के लिए करीब 13 घंटे 10 मिनट का समय मिलेगा। वहीं लक्ष्मी-गणेश और कुबेर की पूजा प्रदोष काल में करना विशेष शुभ माना गया है।
दिवाली पर व्रत रखकर लक्ष्मी पूजा करना लाभकारी माना जाता है। प्रदोष काल के बाद भोजन किया जा सकता है। इसी अमावस्या तिथि पर पितरों के श्राद्ध की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार, हाथ में दीपक लेकर दक्षिण दिशा की ओर पितरों को दीप दिखाया जाता है (Diwali on same date)।
विशाखा नक्षत्र में होगी महानिशा
पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार विशाखा नक्षत्र की अर्द्धरात्रि में महानिशा होगी। इसी दौरान लक्ष्मी-गणेश और कुबेर की पूजा की जाएगी।
वहीं, सुबह 10:50 बजे से पहले चतुर्दशी तिथि में हनुमान जयंती मनाई जाएगी। अमावस्या शुरू होने के बाद हनुमान जयंती का पर्व नहीं मनाया जाएगा (Diwali on same date)।
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पंचांगों की एकरूपता से दूर हुआ भ्रम
पंचांग एकरूपता अभियान से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, शुद्ध पंचांग गणना में तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति नहीं होती। इसके लिए गणना और आकलन का सही होना जरूरी है।
इस बार ग्रह-नक्षत्रों की प्राकृतिक स्थिति भी ऐसी है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में दिवाली की तारीख को लेकर अलग-अलग मत की स्थिति नहीं बनेगी। यानी 8 नवंबर 2026 को देशभर में एक ही दिन दिवाली मनाई जाएगी (Diwali on same date)।



