Guru Gochar Ashlesha Nakshatra : देवगुरु बृहस्पति 8 अक्टूबर 2026 को शाम 7:03 बजे अश्लेषा नक्षत्र के चौथे पद में प्रवेश करेंगे। इस समय गुरु कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं, जहां उन्हें उच्च का माना जाता है। अश्लेषा नक्षत्र का चौथा पद मीन नवांश से जुड़ा है और इसके स्वामी भी बृहस्पति हैं। ऐसे में गुरु की स्थिति को ज्योतिष में मजबूत माना जा रहा है।
अश्लेषा नक्षत्र को गहराई, रणनीति, शोध और परिस्थितियों को समझने की क्षमता से जोड़ा जाता है। वहीं बृहस्पति ज्ञान, शिक्षा, विवेक, धर्म और निर्णय क्षमता के कारक माने जाते हैं। गुरु 31 अक्टूबर 2026 तक अश्लेषा के चौथे पद में रहेंगे। इसके बाद वे मघा नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश करेंगे (Guru Gochar Ashlesha Nakshatra)।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कुछ राशियों को करियर, धन, शिक्षा और रिश्तों से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है।
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मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के लिए बृहस्पति दूसरे भाव में हैं। यह भाव धन, बचत, परिवार और वाणी से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान आर्थिक स्थिति को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने के अवसर मिल सकते हैं।
नौकरीपेशा लोगों को वेतन वृद्धि, नई जिम्मेदारी या अतिरिक्त आय का मौका मिल सकता है। कारोबार में बातचीत और आपकी सलाह प्रभावी रह सकती है। परिवार से जुड़े मामलों में भी सहयोग मिलने के संकेत हैं (Guru Gochar Ashlesha Nakshatra)।
उपाय : गुरुवार को केले या पीली मिठाई का भोग लगाकर जरूरतमंद को भोजन कराएं।
कर्क राशि
कर्क राशि में ही बृहस्पति का गोचर चल रहा है और यहां उन्हें उच्च का माना जाता है। अश्लेषा नक्षत्र के चौथे पद में आने से निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ सकता है।
कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ प्रतिष्ठा भी मिल सकती है। निजी जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। लंबे समय से अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे लोगों को आगे बढ़ने की नई दिशा मिल सकती है (Guru Gochar Ashlesha Nakshatra)।
उपाय : गुरुवार को पीले चंदन से भगवान विष्णु की पूजा करें और पीली मिठाई का दान करें।
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कन्या राशि
कन्या राशि के लिए बृहस्पति ग्यारहवें भाव में हैं। यह भाव आय, लाभ, नेटवर्क और इच्छापूर्ति से संबंधित माना जाता है। इस दौरान पुराने संपर्कों से लाभ मिल सकता है और नए प्रभावशाली लोगों से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं (Guru Gochar Ashlesha Nakshatra)।
नौकरी में पदोन्नति या नई भूमिका की चर्चा आगे बढ़ सकती है। कारोबारियों के लिए नेटवर्किंग फायदेमंद रह सकती है। मीडिया, शिक्षा, वित्त और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं।
उपाय : गुरुवार को पीली दाल का दान करना शुभ माना जाता है।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि से बृहस्पति नौवें भाव में हैं। यह भाव भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा, गुरु और लंबी यात्राओं से जुड़ा माना जाता है।
पढ़ाई और करियर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में सही मार्गदर्शन मिल सकता है। उच्च शिक्षा, विदेश या दूरस्थ परियोजनाओं से जुड़े काम आगे बढ़ सकते हैं। किसी वरिष्ठ व्यक्ति या गुरु की सलाह भी उपयोगी साबित हो सकती है (Guru Gochar Ashlesha Nakshatra)।
उपाय : गुरुवार को भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें और बेसन के लड्डू का दान करें।
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मकर राशि
मकर राशि वालों के लिए बृहस्पति सप्तम भाव में हैं। यह भाव विवाह, साझेदारी और सार्वजनिक संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है। इस दौरान रिश्तों में स्थिरता बढ़ सकती है।
अविवाहित लोगों के विवाह से जुड़े मामलों में बातचीत आगे बढ़ सकती है। कारोबारियों को नए साझेदार या महत्वपूर्ण ग्राहक मिल सकते हैं। सार्वजनिक जीवन और लोगों के बीच आपकी प्रतिष्ठा मजबूत हो सकती है (Guru Gochar Ashlesha Nakshatra)।
उपाय : गुरुवार को पीले वस्त्र या चने की दाल का दान करें।
मीन राशि
मीन राशि के लिए बृहस्पति पांचवें भाव में हैं। यह भाव शिक्षा, बुद्धि, संतान, प्रेम और रचनात्मकता से जुड़ा माना जाता है। अश्लेषा के चौथे पद का मीन नवांश से संबंध होने के कारण इस राशि के लिए यह समय विशेष माना जा रहा है।
विद्यार्थियों को पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने और बेहतर रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है। लेखन, मीडिया और कला से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं (Guru Gochar Ashlesha Nakshatra)।
उपाय : गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें और जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई की सामग्री दान करें।



