
Art exhibition in Delhi: रूसी हाउस की शांत दीवारों के बीच एक ऐसी कला प्रदर्शनी (art exhibition) का उद्घाटन हुआ, जो देखने वाले को न केवल ठहरने के लिए कहती है, बल्कि सोचने और महसूस करने की भी जगह देती है। यह थी राजनयिक अभय के. द्वारा प्रस्तुत ‘शून्यता’ – एक ऐसी प्रदर्शनी जो केवल रंगों की प्रस्तुति नहीं, बल्कि दर्शन और आत्मचिंतन की यात्रा है।
इस भव्य आयोजन का उद्घाटन भारत में रूसी संघ के राजदूत डेनिस अलीपोव ने किया। उनके साथ वेनेजुएला की राजदूत कैपाया रोड्रिग्ज गोंजालेज, भारत में रोस्कोट्रूडनिचेस्टवा के प्रतिनिधि कार्यालय की प्रमुख डॉ. एलेना रेमीजोवा, स्वयं कलाकार अभय के., कई भारतीय सांस्कृतिक प्रतिनिधि, राजनयिक, पत्रकार और छात्र भी उपस्थित रहे।
राजदूत अलीपोव की दृष्टि में ‘शून्यता’
उद्घाटन समारोह में राजदूत डेनिस अलीपोव ने अभय के. के बहुआयामी व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए कहा,
मैं अभय के. को एक कवि, चित्रकार, राजनयिक और विचारक के रूप में जानता हूं। ‘शून्यता’ उनकी उस आंतरिक यात्रा का प्रतिबिंब है जो दर्शन, कला और आत्म-अन्वेषण को एक साथ समेटती है। ये पेंटिंग्स किसी निष्कर्ष की ओर इशारा नहीं करतीं, बल्कि दर्शक को अपने ही भीतर उतरने का आमंत्रण देती हैं।
उन्होंने कहा कि शून्यता art exhibition का अर्थ केवल खालीपन नहीं है, बल्कि यह संभावनाओं का आधार है। नागार्जुन के शब्दों में, ‘गलत समझी गई शून्यता, सांप को गलत सिरे से पकड़ने जैसी है।’ लेकिन अभय के. की कला में यह शून्यता डराने वाली नहीं, बल्कि खोज का प्रवेशद्वार है।
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कलात्मक प्रस्तुति और शैली
Art exhibition ‘शून्यता’ में प्रस्तुत चित्रों को जलरंग की तकनीक से बनाया गया है। कैनवास पर हल्के रंगों की परतें, अधूरे आकार, और मौन से भरे स्पेस – सब कुछ मिलकर एक ऐसी दुनिया रचते हैं, जहां दर्शक स्वयं को भूलकर चित्र के भीतर उतर जाता है।
यह कार्य देखने में जितना सूक्ष्म है, उतना ही गहन भी। ये चित्र किसी कथानक को नहीं दिखाते, बल्कि दर्शक को एक मौन संवाद के लिए आमंत्रित करते हैं। प्रत्येक कृति एक निजी क्षण जैसी लगती है, जो किसी मान्यता की मांग नहीं करती, बल्कि सिर्फ उपस्थिति चाहती है।
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बौद्ध दर्शन से प्रेरणा
अभय के. ने बताया कि जब वे अपनी पुस्तक ‘Nalanda: How It Changed the World’ पर शोध कर रहे थे, तब उनका बौद्ध दर्शन के शून्यता सिद्धांत से परिचय हुआ। यह दर्शन उन्हें राजगृह से जुड़ी उस कथा में मिला जहां बोधिसत्व अवलोकितेश्वर ने शारिपुत्र को यह ज्ञान प्रदान किया था। राजगृह अभय के. का जन्मस्थान भी है।
उन्होंने कहा कि यह दर्शन केवल दार्शनिक चिंतन नहीं है, बल्कि एक जीवंत दृष्टिकोण है – जो व्यक्ति को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है और उसे भीतर से शुद्ध करता है। यही भाव उन्होंने इस प्रदर्शनी के माध्यम से साझा करने की कोशिश की है।
‘शून्यता’ प्रदर्शनी 31 मई 2025 तक रूसी हाउस, नई दिल्ली में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।
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