

हिंदू पंचांग का तीसरा महीना ज्येष्ठ माह केवल भीषण गर्मी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी गहरी धार्मिक मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है। साल 2026 में यह महीना और भी खास हो गया है, क्योंकि इस बार इसका कालखंड सामान्य से लंबा है और कई दुर्लभ योग बन रहे हैं (Dharm 59 days Jyeshtha Month)।
साल 2026 में ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई, शनिवार से मानी जा रही है। यह तिथि ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा की उदयातिथि के आधार पर तय होती है। प्रतिपदा तिथि 1 मई रात 10:52 बजे से शुरू होकर 3 मई दोपहर 12:49 बजे तक रहेगी।
इस बार ज्येष्ठ माह 29 जून 2026 तक चलेगा, यानी कुल 59 दिनों का लंबा समय। इसका कारण है अधिक मास (पुरुषोत्तम मास), जो 17 मई से 15 जून के बीच पड़ेगा (Dharm 59 days Jyeshtha Month)।
अधिक मास क्यों खास है?
हिंदू कैलेंडर में समय-समय पर अधिक मास जोड़ा जाता है ताकि सूर्य और चंद्रमा के बीच संतुलन बना रहे। इसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दौरान पूजा-पाठ, दान और साधना का विशेष महत्व होता है (Dharm 59 days Jyeshtha Month)।
ज्येष्ठ माह की शुरुआत बेहद शुभ योग में हो रही है। 2 मई को व्यतिपात योग सुबह से रात 9:45 बजे तक रहेगा, इसके बाद वरीयान योग शुरू होगा। इस दिन विशाखा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा (Dharm 59 days Jyeshtha Month)।
ग्रहों की स्थिति भी खास है, चंद्रमा तुला राशि में और सूर्य मेष राशि में विराजमान रहेंगे। इसके अलावा 3 मई को त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।
इस बार ज्येष्ठ माह में एक और खास बात देखने को मिल रही है। पूरे महीने में कुल 8 मंगलवार पड़ रहे हैं, जिन्हें बड़ा मंगल कहा जाता है। यह सभी दिन भगवान हनुमान को समर्पित होते हैं (Dharm 59 days Jyeshtha Month)।
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बड़ा मंगल की तिथियां
प्रथम ज्येष्ठ माह
05 मई – पहला बड़ा मंगल
12 मई – दूसरा बड़ा मंगल
19 मई – तीसरा बड़ा मंगल
26 मई – चौथा बड़ा मंगल
द्वितीय ज्येष्ठ माह
02 जून – पांचवां बड़ा मंगल
09 जून – छठा बड़ा मंगल
16 जून – सातवां बड़ा मंगल
23 जून – आठवां बड़ा मंगल
मान्यता है कि इसी महीने भगवान राम और हनुमानजी का मिलन हुआ था, इसलिए इन मंगलवारों का महत्व और बढ़ जाता है (Dharm 59 days Jyeshtha Month)।
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इस महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और शुभ संयोग बन रहे हैं, जो साधना और पूजा के लिए बेहद फलदायी माने जाते हैं।
13 मई – अपरा एकादशी
27 मई – कमला पुरुषोत्तम एकादशी
11 जून – कमला पुरुषोत्तम एकादशी (द्वितीय)
25 जून – निर्जला एकादशी
इसके अलावा 16 मई को शनि अमावस्या (शनिदेव जयंती) और 21 मई व 18 जून को गुरु पुष्य अमृत योग भी बन रहा है।
ज्येष्ठ माह का धार्मिक महत्व
ज्येष्ठ माह में गर्मी अपने चरम पर होती है, इसलिए इस समय जल और छाया का महत्व सबसे अधिक होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान स्नान, दान, जप और तप करने से विशेष पुण्य मिलता है (Dharm 59 days Jyeshtha Month)।
ज्येष्ठ माह में कर सकते हैं ये उपाय
- प्यासे लोगों को पानी पिलाएं।
- घर के बाहर मिट्टी के घड़े में ठंडा पानी रखें।
- पक्षियों और जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था करें।



