
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के कासिबुग्गा स्थित वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में शनिवार सुबह हुए भीषण हादसे ने पूरे राज्य को हिला दिया। एकादशी के अवसर पर उमड़ी भारी भीड़ के बीच मची भगदड़ में कम से कम 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं (Andhra Pradesh Venkateswara Temple Stampede)।
कैसे हुई भगदड़
पुलिस के अनुसार यह हादसा सुबह लगभग 11:30 बजे हुआ, जब हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए एकत्र हुए थे। भीड़ के बेकाबू होने से प्रवेश और निकास द्वार पर अचानक अफरातफरी मच गई। कई लोग गिर पड़े और पीछे से आती भीड़ उन पर चढ़ गई। (Andhra Pradesh Venkateswara Temple Stampede)
डीएसपी लक्ष्मण राव ने बताया कि भारी भीड़ के कारण स्थिति अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई। कई लोग बेहोश हो गए और भगदड़ में घायल हुए।
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मंदिर का क्षेत्र निर्माणाधीन था
अधिकारियों ने बताया कि जिस क्षेत्र में श्रद्धालु जमा हुए थे, वह अभी निर्माणाधीन था। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि मंदिर में प्रवेश और निकास का रास्ता एक ही था, जिससे भीड़ और अधिक जाम हो गई।
राज्य सरकार के अनुसार, यह मंदिर निजी रूप से संचालित है और एंडॉवमेंट विभाग में पंजीकृत नहीं है। आयोजकों ने किसी भी सरकारी विभाग से कोई अनुमति या सूचना नहीं दी थी। (Andhra Pradesh Venkateswara Temple Stampede)
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कासिबुग्गा के वेंकटेश्वर मंदिर में हुई भगदड़ बेहद दर्दनाक है। श्रद्धालुओं की मृत्यु अत्यंत हृदयविदारक है। मैंने अधिकारियों को घायलों को तत्काल और उचित इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
राज्य के कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडु तुरंत मौके पर पहुंचे और मंदिर प्रशासन से घटना की जानकारी ली। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर शोक जताया और पीएम राहत कोष (PMNRF) से मुआवजे की घोषणा की। मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। (Andhra Pradesh Venkateswara Temple Stampede)
विपक्ष का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने इस हादसे को सरकारी लापरवाही का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि कासिबुग्गा में हुई यह त्रासदी प्रशासन की अक्षमता को दर्शाती है। इससे पहले भी तिरुपति और सिम्हाचलम मंदिरों में ऐसे हादसे हो चुके हैं, लेकिन सरकार ने कोई सबक नहीं लिया।
उन्होंने राज्य सरकार से मृतकों के परिवारों की सहायता और घायलों को सर्वोत्तम इलाज देने की मांग की।



