
बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक हिंसा और अस्थिरता के दौर (Bangladesh unrest) से गुजर रहा है। युवा नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के बाद देश में पहले ही आक्रोश और विरोध का माहौल था, और अब एक और प्रमुख युवा नेता मोतालेब सिकदर को सिर में गोली मारने की घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इस हमले ने बांग्लादेश में बढ़ती राजनीतिक हिंसा और युवाओं की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोमवार को खुलना शहर में अज्ञात हमलावरों ने मोहम्मद मोतालेब सिकदर पर गोली चला दी (Bangladesh unrest)। गोली उनके सिर को निशाना बनाकर चलाई गई। स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह घटना गाजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास सुबह करीब 11:45 बजे हुई।
हमले के बाद मोतालेब सिकदर को तुरंत खुलना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत को पहले नाजुक बताया गया। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि गोली कान के पास से होकर निकल गई और अब वह खतरे से बाहर हैं (Bangladesh unrest)।
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कौन हैं मोहम्मद मोतालेब सिकदर?
42 वर्षीय मोहम्मद मोतालेब सिकदर बांग्लादेश की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के खुलना डिवीजन प्रमुख हैं और पार्टी की मज़दूर शाखा NCP श्रमिक शक्ति के केंद्रीय आयोजक भी हैं। वह खुलना के सोनाडांगा क्षेत्र के शेखपाड़ा पल्लि के निवासी हैं।
NCP की संयुक्त प्रधान समन्वयक महमूदा मितु ने फेसबुक पोस्ट के जरिए सबसे पहले इस हमले की जानकारी दी, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।
हादी की हत्या के बाद बढ़ा तनाव
मोतालेब सिकदर पर हमला ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश पहले से ही शरीफ उस्मान बिन हादी की मौत के बाद उबाल पर है (Bangladesh unrest)। 32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी बांग्लादेश के 2024 के जन आंदोलन से जुड़ा नेता था। वह इंकलाब मंच नामक छात्र-नेतृत्व वाले संगठन से जुड़ा था।
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12 दिसंबर को ढाका के मध्य इलाके में मस्जिद से निकलते समय नकाबपोश हमलावरों ने हादी को गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल हादी को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां पिछले हफ्ते उसकी मौत हो गई। इसके बाद ढाका समेत पूरे देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए (Bangladesh unrest)।
शरीफ उस्मान हादी की हत्या और अब मोतालेब सिकदर पर जानलेवा हमला यह संकेत दे रहा है कि बांग्लादेश में राजनीतिक मतभेद धीरे-धीरे हिंसक रूप ले रहे हैं। खासकर युवा नेताओं को निशाना बनाया जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि सत्ता, विरोध और जन आंदोलनों के बीच टकराव और गहरा होता जा रहा है (Bangladesh unrest)।
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