
केरल में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। इस साल Primary Amoebic Meningoencephalitis (PAM) से अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। यह एक बेहद दुर्लभ लेकिन जानलेवा संक्रमण है, जिसे आम भाषा में Brain eating amoeba इंफेक्शन कहा जाता है।
स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया कि 2025 में अब तक 69 केस दर्ज किए गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि इस साल संक्रमण किसी एक ही पानी के स्रोत से जुड़े क्लस्टर के रूप में नहीं फैल रहा है, बल्कि अलग-अलग स्थानों से मामले आ रहे हैं।
Brain eating amoeba क्या है?
PAM एक गंभीर संक्रमण है, जो Naegleria fowleri नामक अमीबा से होता है। यह अमीबा प्राकृतिक रूप से गर्म मीठे पानी जैसे तालाब, झील, नदी, या बिना क्लोरीन वाले स्विमिंग पूल में पाया जाता है।
जब कोई व्यक्ति ऐसे पानी में तैरता है और पानी नाक के रास्ते शरीर में चला जाता है, तो यह अमीबा सीधे दिमाग तक पहुंच जाता है। वहां यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट करता है और तेज सूजन पैदा करता है। यही वजह है कि इसे Brain eating amoeba कहा जाता है।
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दुनिया में Brain eating amoeba कितना खतरनाक है?
यह बीमारी बेहद दुर्लभ है, लेकिन एक बार संक्रमण हो जाने पर इसकी मौत की दर 97% से भी ज्यादा होती है।
अमेरिका के Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, 1962 से अब तक अमेरिका में केवल 160 से ज़्यादा केस रिपोर्ट हुए हैं, जिनमें से सिर्फ कुछ ही लोग बच पाए।
भारत में यह समस्या नई नहीं है। 2024 में केरल के कोझिकोड, मलप्पुरम और कन्नूर जिलों में क्लस्टर के रूप में मामले सामने आए थे।
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लक्षण क्या होते हैं?
संक्रमण के लक्षण आम तौर पर पानी नाक में जाने के 1 से 12 दिन बाद दिखने लगते हैं – तेज सिरदर्द, बुखार, मतली और उल्टी,
गर्दन अकड़ना, दौरे पड़ना, संतुलन खोना और भ्रम की स्थिति। संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ता है, और अक्सर मरीज कुछ ही दिनों में कोमा में चला जाता है।
Brain eating amoeba का पता कैसे चला?
इस बीमारी का पता पहली बार 1965 में ऑस्ट्रेलिया में चला, जब वैज्ञानिकों ने कई बच्चों की मौत की जांच की। बाद में पता चला कि इसके पीछे जिम्मेदार है – Naegleria fowleri। तब से दुनिया भर में इस पर शोध हो रहा है, लेकिन अभी तक कोई निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है।
केरल में मौजूदा हालात
इस साल अब तक 33 पुरुष और 19 महिलाएं संक्रमित पाई गई हैं। मरीजों में सबसे छोटा 3 महीने का बच्चा है और सबसे बुजुर्ग 91 साल के व्यक्ति।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को अलर्ट किया है और मेनिंगोएन्सेफलाइटिस के हर केस की जांच जरूरी कर दी है। पानी के स्रोतों की क्लोरीनेशन और सैंपल टेस्टिंग की जा रही है।
ग्रामीण इलाकों में अवेयरनेस ड्राइव चलाए जा रहे हैं ताकि लोग बिना क्लोरीन वाले पानी या तालाब में नहाने से बचें।
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इलाज और रोकथाम
अभी तक Brain eating amoeba का पक्का इलाज उपलब्ध नहीं है। कुछ एंटी-फंगल और एंटी-अमीबा दवाओं का उपयोग किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग ही बच पाते हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है – गर्म या असुरक्षित पानी में तैरने से बचें। स्विमिंग पूल या टैंक में क्लोरीनेशन जरूर कराएं। नाक में पानी जाने से बचें।
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