पाकिस्तान क्रिकेट इन दिनों मैदान से ज्यादा चर्चाओं में अपने क्रिकेट बोर्ड (PCB) की वजह से है। जहां एक ओर टीम लगातार ICC टूर्नामेंट्स में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही, वहीं दूसरी ओर PCB में भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर नए-नए खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान के महालेखा परीक्षक (Auditor General of Pakistan) की एक रिपोर्ट ने पूरे PCB तंत्र की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
PCB में करोड़ों की अनियमितता, बिना अनुमति भर्तियां
इस रिपोर्ट के अनुसार 2023 में, जब बोर्ड की कमान मोहसिन नकवी (Mohsin Naqvi) और जका अशरफ (Zaka Ashraf) के हाथों में थी, तब PCB में करोड़ों की वित्तीय गड़बड़ियां हुईं। पुलिसकर्मियों को सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात करने के दौरान उनके भोजन के नाम पर 63.39 मिलियन पाकिस्तानी रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसका कोई वैध रिकॉर्ड नहीं मिला।
कराची हाई परफॉर्मेंस सेंटर में अंडर-16 कोचों की अनधिकृत नियुक्तियां की गईं, जिनमें से तीन कोचों को 5.4 मिलियन रुपये का भुगतान कर दिया गया। यह सारा काम बिना बोर्ड की अनुमति के किया गया।
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शक की सुई फिक्सिंग की ओर
ऑडिट रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा यह है कि मैच अधिकारियों को 3.9 मिलियन रुपये अतिरिक्त दिए गए। यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि मैच फिक्सिंग की संभावनाओं को जन्म देने वाली स्थिति है। इस संदर्भ में PCB से पारदर्शिता और जवाबदेही की ज़रूरत अब और ज़्यादा महसूस की जा रही है।
मीडिया डायरेक्टर की भारी सैलरी पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में एक और अहम बिंदु यह है कि PCB में बिना उचित प्रक्रिया के एक मीडिया डायरेक्टर की नियुक्ति की गई, जिनकी मासिक सैलरी 900,000 रुपये है। न तो चयन प्रक्रिया पारदर्शी थी, न ही इस पद की आवश्यकता पर कोई ठोस तर्क।
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टिकट बिक्री में भी घपले की बू
टिकटिंग से जुड़े ठेके भी बिना किसी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बांटे गए। यानी जो कंपनी ज्यादा लाभ दे सकती थी, उसे मौका ही नहीं मिला। इससे करोड़ों के नुकसान की संभावना जताई गई है।
मोहसिन नकवी पर बढ़ा दबाव, लेकिन कानूनी सुरक्षा बनी ढाल
मोहसिन नकवी इस वक्त न केवल PCB चेयरमैन हैं, बल्कि पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की राह आसान नहीं है। मगर लगातार सामने आ रहे खुलासों से उनकी साख पर सवाल उठ रहे हैं।
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हालिया विवादों ने PCB की छवि को और किया धूमिल
यह पहला मौका नहीं जब PCB विवादों में घिरा हो। हाल ही में पाकिस्तान टीम की चैंपियंस ट्रॉफी 2025 से पहले घरेलू सीरीज़ में खराब प्रदर्शन, टीम चयन को लेकर असंतोष और बार-बार कोचिंग स्टाफ में बदलाव ने भी फैंस का भरोसा तोड़ा है।
एक वक्त था जब पाकिस्तान क्रिकेट अपने तेज गेंदबाजों और अटूट जज़्बे के लिए जाना जाता था। लेकिन अब खेल से ज्यादा सुर्खियां बोर्ड की अंदरूनी राजनीति, भ्रष्टाचार और चयन में पक्षपात के चलते बटोर रहा है।
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इन सबके बीच फैंस का भरोसा टूटता जा रहा है। अगर PCB को वाकई में पाकिस्तान क्रिकेट को पटरी पर लाना है, तो उसे सबसे पहले पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर प्रबंधन पर ध्यान देना होगा।



