
Pakistani beggars
सऊदी अरब की पवित्र नगरी मक्का में रमजान के दौरान पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया, जो भीड़-भाड़ वाले इलाके में भीख मांग रही थी। पूछताछ में सामने आया कि वह पाकिस्तान (Pakistani beggars) से आई थी, और उसके पास उमरा वीज़ा था। यह कोई अकेली घटना नहीं थी।
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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के अनुसार, सऊदी अरब ने हाल ही में 4,700 पाकिस्तानी भिखारियों (Pakistani beggars) को देश से निकाला है। फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 के अंत तक पिछले तीन वर्षों में 4,000 से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को सऊदी अरब से भीख मांगने के आरोप में निर्वासित किया गया।
ख्वाजा आसिफ ने बताया कि पाकिस्तान में लगभग 2.2 करोड़ भिखारी (Beggars in Pakistan) हैं। इनकी सालाना आमदनी 42 अरब पाकिस्तानी रुपये है। जितना ये लोग अपने देश में काम-धंधे से नहीं कमा पाते, उससे ज्यादा खाड़ी देशों में भीख मांगकर कमा लेते हैं।
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पूरा देश कर्ज पर चल रहा (Debt on Pakistan)
पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। 2023 की जनगणना के अनुसार, बेरोजगारी दर 22.1% तक पहुंच गई है, जो 2021 में 6.3% थी। महंगाई दर भी 2023 में 38% तक पहुंच गई थी, हालांकि अब इसमें कुछ कमी आई है।
इस आर्थिक बदहाली के कारण, लाखों लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, और रोजगार की तलाश में विदेशों का रुख कर रहे हैं। वहां काम नहीं मिलता, तो भीख मांगने (Pakistani beggars) लग जाते हैं।
कई लोग तो विदेश जाते ही भीख मांगने के लिए हैं। ये लोग हज के नाम पर वीजा लेते हैं और मक्का पहुंचने के बाद भीख मांगने लगते हैं। खाड़ी में पहले भी ऐसे कई पाकिस्तानी भिखारी (Pakistani beggars) पकड़े जा चुके हैं। सऊदी अरब ने इसे लेकर पाकिस्तान से नाराजगी भी जताई थी।
खाड़ी देशों की सख्ती
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों ने भीख मांगने को गंभीर अपराध माना है। सऊदी अरब की ‘एंटी-बेगिंग रेगुलेशन’ के तहत, भीख मांगने पर जुर्माना, जेल और विदेशी नागरिकों के लिए निर्वासन की सजा है।
ऐसे में पाकिस्तान के भिखारियों (Pakistani beggars) की वजह से पूरे देश की छवि खराब हो रही है।
पाकिस्तानी सरकार ने अब इन निर्वासित भिखारियों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत कार्रवाई करने का निर्णय लिया है, ताकि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को बचाया जा सके।
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पाकिस्तान को इस संकट से उबरने के लिए संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है। IMF और विश्व बैंक ने पाकिस्तान को वित्तीय सहायता प्रदान की है, लेकिन इसके साथ ही कर सुधार, ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की शर्तें भी रखी हैं।
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