
Deadliest Railway History : आज जब हम अमेरिका से जुड़े किसी बड़े रेल नेटवर्क की बात करते हैं तो हाई-स्पीड ट्रेन, विशाल पुल और आधुनिक तकनीक का ख्याल आता है। लेकिन करीब 170 साल पहले मध्य अमेरिका के एक छोटे से इलाके में ऐसी रेल लाइन बनाई जा रही थी, जिसकी कीमत हजारों मजदूरों की जान से चुकाई गई। इसे दुनिया की सबसे कठिन और घातक शुरुआती रेलवे परियोजनाओं में गिना जाता है।
यह कहानी है पनामा रेलवे की, जिसने अटलांटिक और प्रशांत महासागर के बीच रास्ता बनाया और बाद में अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच यात्रा का समय कम कर दिया।
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सोने की तलाश ने बढ़ाई जरूरत
1848 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में सोना मिलने के बाद हजारों लोग पूर्वी अमेरिका से पश्चिमी तट की ओर जाने लगे। उस समय अमेरिका के एक किनारे से दूसरे किनारे तक जाना बेहद लंबा और जोखिम भरा सफर था।
समुद्र के रास्ते दक्षिण अमेरिका का चक्कर लगाने में महीनों लग सकते थे। जमीन के रास्ते भी यात्रा आसान नहीं थी। ऐसे में पनामा का भूगोल बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। यहां अटलांटिक और प्रशांत महासागर के बीच जमीन की चौड़ाई बहुत कम थी (Deadliest Railway History)।
योजना बनी कि यात्रियों को जहाज से पनामा के अटलांटिक तट तक लाया जाए, वहां से रेल के जरिए प्रशांत तट तक पहुंचाया जाए और फिर आगे जहाज से कैलिफोर्निया जाया जाए।
जंगल के बीच बिछाई गई पटरी
पनामा रेलवे का निर्माण 1850 के दशक में शुरू हुआ। करीब 80 किलोमीटर लंबी रेल लाइन घने जंगलों, दलदली जमीन, पहाड़ियों और भारी बारिश वाले इलाके से होकर गुजरनी थी (Deadliest Railway History)।
आज मशीनें कुछ ही समय में ऐसा काम कर सकती हैं, लेकिन उस दौर में मजदूरों के पास मुख्य रूप से हाथ के औजार थे। उन्हें जंगल काटना, जमीन साफ करना, मिट्टी हटाना और पटरियां बिछाना था।
मुश्किल सिर्फ भौगोलिक परिस्थितियां नहीं थीं। पनामा का गर्म और नम मौसम मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के लिए बेहद अनुकूल था (Deadliest Railway History)।
सबसे बड़ा दुश्मन था बीमारी
निर्माण के दौरान मलेरिया और येलो फीवर ने भारी तबाही मचाई। उस समय चिकित्सा विज्ञान को यह पता नहीं था कि इन बीमारियों को मच्छर फैलाते हैं। इसलिए बीमारी से बचाव के आधुनिक तरीके मौजूद नहीं थे।
मजदूरों के लिए अस्पताल और इलाज की व्यवस्था भी सीमित थी। कई लोग कुछ ही समय में बीमार पड़ जाते और उनकी मृत्यु हो जाती (Deadliest Railway History)।
मरने वाले मजदूरों की सही संख्या आज भी स्पष्ट नहीं है। अलग-अलग ऐतिहासिक स्रोत अलग-अलग आंकड़े देते हैं। यही वजह है कि पनामा रेलवे को अक्सर ‘खूनी रेलवे’ या इतिहास की सबसे घातक रेलवे परियोजनाओं में से एक कहा जाता है।
रेलवे निर्माण के लिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से मजदूर लाए गए। इनमें बड़ी संख्या में चीनी, आयरिश और कैरेबियाई मजदूर शामिल थे। काम की परिस्थितियां बेहद कठिन थीं और बीमारी के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बना रहता था।
इतिहास में इस परियोजना का एक काला पक्ष यह भी है कि मजदूरों की मौत को उस समय के कारोबारी हितों और तेजी से बढ़ते यातायात की जरूरतों के सामने अक्सर आंकड़ों की तरह देखा गया (Deadliest Railway History)।
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आखिर 1855 में रेलवे पूरी हुई
तमाम मुश्किलों के बावजूद पनामा रेलवे का निर्माण पूरा हुआ और 1855 में ट्रेन ने पहली बार अटलांटिक और प्रशांत तटों के बीच सफर किया।
यह अपने समय की असाधारण उपलब्धि थी। लगभग 80 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली इस रेल लाइन ने यात्रियों को दक्षिण अमेरिका का लंबा समुद्री चक्कर लगाने से बचा लिया (Deadliest Railway History)।
कैलिफोर्निया के गोल्ड रश के दौर में इसका महत्व और बढ़ गया। पूर्वी अमेरिका से आने वाले यात्री पनामा के रास्ते पश्चिमी तट तक कहीं तेजी से पहुंच सकते थे।
कुछ दशकों बाद इसी इलाके में एक और भी बड़ी परियोजना शुरू हुई, पनामा नहर। इसका उद्देश्य अटलांटिक और प्रशांत महासागर को सीधे जोड़ना था।
झील में दफ्न खौफनाक इतिहास
पनामा नहर के लिए Gatun Lake नाम की विशाल कृत्रिम झील बनाई गई। पुरानी रेलवे का रास्ता इस झील के बनने वाले इलाके से गुजरता था। इसलिए 1907 से 1912 के बीच रेलवे के बड़े हिस्से को ऊंची जमीन पर नए रास्ते से ले जाया गया। नया ट्रैक 25 मई 1912 तक पूरा हो गया और पुरानी लाइन 1913 में छोड़ दी गई (Deadliest Railway History)।
इसके बाद झील का पानी बढ़ा और पुरानी रेलवे की पटरियां और उसका बड़ा हिस्सा झील के नीचे डूब गया। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, पुराने रेलमार्ग का लगभग आधा हिस्सा झील के तल में चला गया था। कुछ जगह तो यह पुरानी रेलवे लाइन पानी में 40 से 75 फीट तक नीचे है।



