
Delhi Terror Attacks History : लाल किले के पास हुआ हालिया विस्फोट आतंकी हमला है या नहीं, अभी कंफर्म होना बाकी है। लेकिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आतंकवादियों के निशाने पर हमेशा रही है। यह शहर कई दशकों से आतंकी हमलों के जख्म झेलता आया है – 1985 के ट्रांजिस्टर बम धमाकों से लेकर 2008 के सीरियल ब्लास्ट तक, और अब 2025 के लाल किला धमाके तक।
इन हमलों का उद्देश्य हमेशा एक ही रहा – देश की लोकतांत्रिक भावना को कमजोर करना और आम नागरिकों में भय फैलाना। आइए नजर डालते हैं अब तक दिल्ली में हुए उन प्रमुख धमाकों पर जिन्होंने इतिहास में दर्द के निशान छोड़े (Delhi Terror Attacks History)।
1985 : ट्रांजिस्टर बम धमाके
मई 1985 में दिल्ली में हुए ट्रांजिस्टर बम धमाकों ने पूरे देश को हिला दिया था। आतंकवादियों ने ट्रांजिस्टर रेडियो सेटों में बम छिपाकर उन्हें बस स्टैंड और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में रख दिया था (Delhi Terror Attacks History)। इन विस्फोटों में 49 लोगों की मौत हुई और 127 से अधिक लोग घायल हुए। जांच में पाया गया कि इन हमलों के पीछे खालिस्तानी चरमपंथियों का हाथ था, जिनका मकसद लोगों के बीच दहशत फैलाना था।
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1996 : लाजपत नगर ब्लास्ट
21 मई 1996 को दिल्ली के भीड़-भाड़ वाले लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में शाम के समय एक जबरदस्त विस्फोट हुआ। धमाके में 13 लोगों की मौत और 39 लोग घायल हुए। इस हमले की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ्रंट ने ली थी। यह वह दौर था जब कश्मीर आधारित आतंकी समूहों ने दिल्ली को भी अपने निशाने पर लेना शुरू कर दिया था। (Delhi Terror Attacks History)
2001 : भारतीय संसद पर हमला
13 दिसंबर 2001 को भारत की संसद पर हमला देश के इतिहास की सबसे बड़ी आतंकी घटनाओं में से एक था। पांच हथियारबंद आतंकियों ने संसद परिसर में घुसकर गोलियां बरसाईं। इस हमले में दिल्ली पुलिस के छह जवान, संसद सुरक्षा सेवा के दो कर्मचारी और एक माली शहीद हुए, जबकि सभी पांच हमलावर मारे गए। इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन शामिल थे। यह घटना भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को नए स्तर पर ले गई थी। (Delhi Terror Attacks History)
2005 : दिवाली से पहले सीरियल ब्लास्ट
29 अक्टूबर 2005, दिवाली से दो दिन पहले, दिल्ली तीन धमाकों से दहल उठी। सरोजिनी नगर, पहाड़गंज, और गोविंदपुरी (डीटीसी बस) में एक के बाद एक विस्फोट हुए। त्योहार की भीड़ के बीच हुए इन धमाकों में 62 से अधिक लोगों की मौत हुई और 200 से ज़्यादा घायल हुए। इस हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ बताया गया। यह घटना त्योहार की खुशियों को मातम में बदल देने वाली साबित हुई।
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2008 : दिल्ली सीरियल ब्लास्ट
13 सितंबर 2008 की शाम दिल्ली में लगातार पांच धमाके हुए – कनॉट प्लेस, गफ्फार मार्केट (करोल बाग) और ग्रेटर कैलाश-I जैसे व्यस्त बाजारों में। इन हमलों में 20 से 30 लोगों की मौत हुई और 100 से अधिक घायल हुए। इन विस्फोटों की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन (IM) नामक आतंकी संगठन ने ली थी। जांच में कई स्थानों पर जिंदा बम भी बरामद किए गए, जिन्हें समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया। (Delhi Terror Attacks History)
अब, लाल किले के पास हुआ विस्फोट एक बार फिर दिल्ली को आतंक के साये में ले आया है। सोमवार शाम को हुए इस धमाके में 9 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए। सीसीटीवी फुटेज में सफेद Hyundai i20 कार में विस्फोट होते देखा गया। जांच एजेंसियां घटना की तहकीकात में जुटी हैं। (Delhi Terror Attacks History)
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