
Dharm narad jayanti : भारतीय सनातन परंपरा में कई ऐसे पर्व हैं जो केवल पूजा का दिन नहीं होते, बल्कि जीवन के गहरे अर्थ भी समझाते हैं। उन्हीं में से एक है नारद जयंती, जो देवर्षि नारद के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं में नारद मुनि को देवताओं और मनुष्यों के बीच संदेशवाहक, ज्ञानी और भगवान विष्णु के परम भक्त के रूप में जाना जाता है।
कहा जाता है कि देवर्षि नारद, ब्रह्मा के मानस पुत्र हैं और वह सृष्टि में ज्ञान, भक्ति और संवाद के प्रतीक माने जाते हैं।
नारद जयंती (Dharm narad jayanti) कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, नारद जयंती (Dharm narad jayanti) हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है।
- द्वितीया तिथि प्रारंभ : 2 मई 2026, रात 12:51 बजे
- द्वितीया तिथि समाप्त : 3 मई 2026, रात 3:02 बजे
उदयातिथि के अनुसार, 3 मई 2026 (रविवार) को नारद जयंती (Dharm narad jayanti) मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा।
नारद जयंती (Dharm narad jayanti) शुभ मुहूर्त
इस दिन पूजा के लिए कुछ विशेष समय शुभ माने गए हैं :
- सूर्योदय : सुबह 5:38 बजे
- लाभ चौघड़िया : सुबह 8:58 बजे से 10:38 बजे तक
- सूर्यास्त : शाम 6:57 बजे
- शुभ चौघड़िया : शाम 6:57 बजे से 8:17 बजे तक
इन मुहूर्तों में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
नारद जयंती (Dharm narad jayanti) का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के 24 अवतारों में नारद मुनि को भी एक महत्वपूर्ण स्वरूप माना गया है। वे केवल एक ऋषि नहीं, बल्कि भक्ति और ज्ञान के मार्गदर्शक हैं।
नारद जयंती (Dharm narad jayanti) के दिन भगवान विष्णु और नारद जी की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई साधना से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
नारद जयंती (Dharm narad jayanti) पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें और घर के पूजा स्थान को शुद्ध करें। गंगाजल का छिड़काव करके वातावरण को पवित्र बनाएं।
इसके बाद सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें ताजे फूल, फल, चंदन और कुमकुम अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर विधि-विधान से आरती करें। पूजा के दौरान पंचामृत का भोग लगाएं और उसमें तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
इसके बाद देवर्षि नारद की आराधना करें। उनसे ज्ञान, बुद्धि और सही मार्गदर्शन की प्रार्थना करें। मान्यता है कि इस दिन विष्णु मंदिर में जाकर बांसुरी अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।
नारद जयंती (Dharm narad jayanti) पर की गई पूजा से ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है, जीवन में सकारात्मकता आती है, मानसिक शांति और संतुलन मिलता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
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