
Credit card interest trap : क्रेडिट कार्ड आज हमारी जेब में रखा हुआ सबसे आसान ‘लोन’ है। स्वाइप कीजिए और खरीदारी पूरी। लेकिन यही आसान सुविधा कई बार लोगों को ऐसे कर्ज में फंसा देती है, जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है।
यही वजह है कि क्रेडिट कार्ड को संभालकर इस्तेमाल करना आज के समय की सबसे बड़ी वित्तीय समझदारी है।
क्रेडिट कार्ड की शुरुआत कैसे हुई? (Credit Card History)
लोगों को नकद रखने की झंझट से बचाने का विचार पहली बार 1950 में अमेरिका में सामने आया, जब Diners Club Card लॉन्च हुआ। यह दुनिया का पहला क्रेडिट कार्ड था और इसका पहला इस्तेमाल न्यूयॉर्क के एक रेस्टोरेंट बिल के भुगतान में हुआ। तब फ्रैंक मैकनमारा ने डिनर के बिल के लिए अपना Diners Club Card इस्तेमाल किया। उस समय सिर्फ 200 कार्डधारक और 14 रेस्तरां ही इस सुविधा में शामिल थे।
बाद में बैंक ऑफ अमेरिका ने 1958 में BankAmericard लॉन्च किया, जो आगे चलकर Visa बना। इसी के बाद कार्ड दुनिया भर में तेजी से फैलने लगे और आज करोड़ों लोग रोज इन्हें इस्तेमाल करते हैं। (Credit card interest trap)
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क्रेडिट कार्ड कैसे काम करता है?
क्रेडिट कार्ड कंपनियां आपको एक क्रेडिट लिमिट देती हैं, जिसके भीतर आप खरीदारी, ऑनलाइन पेमेंट्स या बिल भुगतान कर सकते हैं। ज्यादातर कार्ड 20 से 50 दिन की इंटरस्ट-फ्री अवधि देते हैं यानि आप इस समय के भीतर पूरा बिल चुका दें तो कोई ब्याज नहीं लगेगा।
लेकिन जरा सी चूक इस व्यवस्था को बदल देती है। अगर आप पूरा बिल नहीं चुकाते, चाहे 100 रुपये भी बाकी क्यों न हों, कंपनियां 42% तक की वार्षिक ब्याज दर वसूल सकती हैं। इतना ही नहीं, नए लेनदेन भी खरीद की तारीख से ही ब्याज जोड़ना शुरू कर देते हैं। (Credit card interest trap)
ATM से कैश निकालेंगे तो उसी दिन से फाइनेंस चार्ज लागू हो जाता है।
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मिनिमम पेमेंट का भ्रम
कंपनियां हर महीने एक Minimum Amount Due (MAD) दिखाती हैं, जो आमतौर पर कुल बिल का 5% होता है। कई लोग इसे चुकाकर सोचते हैं कि वे सुरक्षित हैं, लेकिन यह एक भ्रम है। (Credit card interest trap)
मिनिमम पेमेंट भरने पर भी बाकी रकम पर रोजाना ब्याज लगता रहता है। साथ ही आपके सभी नए खर्चों पर भी ब्याज जुड़ता रहता है, क्योंकि ब्याज मुक्त ग्रेस पीरियड तुरंत खत्म हो जाता है।
भारत में कई बैंक 3.5% मासिक ब्याज लेते हैं, जो सालाना 42% तक बन जाता है। सबसे खतरनाक नियम यह है कि अगर आप पूरा बिल नहीं चुकाते, तो नई खरीदारी + पुरानी EMI – सब पर ब्याज उसी दिन से लगना शुरू हो जाता है, जब आपने खरीदा था।
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क्रेडिट स्कोर पर सीधा असर
अगर आप मिनिमम अमाउंट भी नहीं चुकाते, तो यह डिफॉल्ट (default) माना जाता है। इसका असर आपके क्रेडिट स्कोर पर सीधे पड़ता है और भविष्य में लोन या क्रेडिट लिमिट बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
दुनिया के टॉप एक्सपर्ट क्या चेतावनी देते हैं?
वित्तीय विशेषज्ञ कई सालों से क्रेडिट कार्ड को सबसे महंगा लोन बताते आए हैं (Credit card interest trap)। अमेरिका के मशहूर पर्सनल फाइनेंस गुरु डेव रैम्सी कहते हैं कि क्रेडिट कार्ड का असली बिजनेस ब्याज कमाना है, न कि सुविधा देना।
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री रिचर्ड थेलर के अनुसार कार्ड लोगों को भविष्य का पैसा आज खर्च करने की आदत डाल देते हैं, जिससे impulsive खरीदारी बढ़ती है। रेन बफे कहते हैं कि क्रेडिट कार्ड सबसे खराब निवेश है जो आप कभी कर सकते हैं। डेव रैम्जे तो इसे आधुनिक गुलामी कहते हैं और सलाह देते हैं कि क्रेडिट कार्ड को कैंची से काट दो।
भारत में भी अनेक विशेषज्ञ इसे कर्ज की धीमी आग कहते हैं, जो धीरे-धीरे जेब को खाली करती है, और लोगों को पता भी नहीं चलता कि किस लेनदेन पर कितना ब्याज (Credit card interest trap) लग रहा है।
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क्रेडिट कार्ड ट्रैप से कैसे बचें?
क्रेडिट कार्ड पर ब्याज डेली बेसिस पर कंपाउंड होता है यानि दिन-प्रतिदिन बढ़ता जाता है। इसलिए सबसे जरूरी है कि हर खर्च से पहले सोचें कि क्या मैं अगले महीने इसका पूरा बिल चुका पाऊंगा? अगर जवाब ‘हां’ है तो कार्ड उपयोग करें। अगर जवाब ‘नहीं’ है, तो उस खर्च को टाल देना ज्यादा समझदारी है।
साथ ही, हमेशा पूरा बिल चुकाएं। ड्यू डेट को कैलेंडर में सेव रखें (Credit card interest trap)। गैरजरूरी EMI या कैश Withdrawal से बचें।
कभी मिनिमम अमाउंट न दें। बिल की ड्यू डेट से 3-4 दिन पहले पेमेंट कर दें। EMI वाले सामान पर भी पूरा बिल चुकाएं, वरना ब्याज लगेगा।
ऑटो-डेबिट ऑन कर लें ताकि भूल न हो। हर महीने स्टेटमेंट ध्यान से चेक करें। जरूरत से ज्यादा कार्ड न रखें। रिवॉर्ड पॉइंट्स के लालच में अनावश्यक खरीदारी न करें। अगर कर्ज बढ़ गया है तो सबसे पहले पुराना ब्याज वाला कार्ड बंद करें।
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